साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ।
।। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ।।
जनवरी सन 1928 इस्बी को जोहन साईमन कमीशन जब लाहौर पहुँचा था, तब साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के नेतृत्व में हंस राज प्रेमगढ़ आदि, अपने पांच हजार लाल पगड़ी धारियों के साथ, "गुरु रविदास शक्ति, अमर है, अमर है" के नारे लगाते हुए, साईमन कमीशन के पास पेश हुए थे। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने, जोहन साईमन कमीशन को अपना मेमोरेंडम दे कर, गुलामों के गुलाम अछूतों की दर्दनाक तस्वीर प्रस्तुत की, जिस को साईमन ने, तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री को सौंप दिया था, मगर जब पुनः साईमन कमीशन की रिपोर्ट भारत में आई, तो आदधर्म मंडल के नेता उसे पढ़ कर बड़े हैरान हुए। रिपोर्ट में लिखा था कि, पंजाब के आदिधर्मी अछूत, भारत के अन्य सूबों के अछूतों की अपेक्षा बेहतर स्थिति में हैं, जिस रिपोर्ट को पढ़ कर, आदधर्म मंडल ने, एम सी राजा का बहिष्कार कर दिया और कहा कि, ये आदमी हमारा प्रतिनिधि नहीं है। नबंबर 1928 को आदधर्म मंडल का डेपुटेशन पुनः साईमन कमीशन को मिला। इंग्लैंड में आदधर्म मंडल के मेमोरेंडम पर चर्चा हुई और आदधर्म की मांगों को स्वीकार कर लिया गया। इसी कारण पुनः सन 1932 में, लार्ड लोथियन को, भारत में रह रहे सभी धर्मों के लोगों के धर्मों की वास्तविक जानकारी इकठ्ठा करने के लिए भेजने का निर्णय लिया गया, कि भारत में कौन कौन धर्म हैं। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर समझ गए कि, आदधर्म मंडल ने भारत के, अछूतों के आदधर्म की बात की है, उस की सत्यता की भी जांच होगी, जिसके लिए, हमारे पास ठोस सबूत चाहिये। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी को कहा, कि हो सकता है कि, लार्ड लोथियन भारत के सभी धर्मों के नेताओं से पूछें कि, आप का धर्म कौन सा है, आप अपना धर्म ग्रँथ दिखाओ। आप के अवतार कौन कौन हैं? आप के साधना शब्द क्या क्या है? आदि प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जिन के उत्तर हमारे पास नहीं हैं। साहिबे कलाम मंगू राम जी ने कहा, ये प्रश्न तो अवश्य ही पूछे जा सकते हैं, मगर धर्म तो हमारा आदधर्म हैं और अबतार भी सतगुरु रविदास जी महाराज, गुरु कबीर जी, सतगुरु नामदेव जी, सतगुरु सेन जी, महाऋषि वाल्मीकि जी हैं, पवित्र शब्द सोहम और जय गुरुदेव भी हैं, मगर धर्मग्रँथ की समस्या है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने कहा, यही तो सब से बड़ी समस्या है। साहिबे कलाम मंगू राम जी ने तत्काल कहा कि, चलो स्वामी ईशरदास जी महाराज के पास चलते हैं, वे तो सत्संग भी करते हैं, खुद ही वाणी की रचना भी करते हैं। वही हमारी सभी समस्याओं का समाधान भी कर सकते हैं।
स्वामी ईशरदास महाराज, उन दिनों हिमाचल प्रदेश के ऊना के समीप गांव कुठार खुर्द में रहते थे। दोनों ही नेता उनके निवास स्थान गांव कुठार खुर्द आए और स्वामी जी को अपनी ही नहीं सारे मूलनिवासी समाज की समस्याओं को भी बताया और कहा, महाराज हमें धर्म ग्रँथ की सब से बड़ी समस्या पेश आ रही है। स्वामी जी ने, उन्हें बताया कि आप कोई, अखिल भारतीय सन्त सम्मेलन बुलाओ, जिस में हम इस विषय पर चर्चा कर के निर्णय करेंगे कि, ये काम कौन कर सकता है? तभी ये कार्य सार्थक होगा और सामाजिक मान्यता भी मिल सकेगी। साहिबे कलाम मंगू राम जी और उन के साथियों ने, मूलनिवासी समाज के सन्तों को, पंजाब के लुधियाना में आमंत्रित किया, जिस में उन्होंने अपनी ग्रँथ की समस्या को प्रस्तुत किया था, कि मूलभारतीयों के लिए धर्म ग्रँथ कौन तैयार कर सकता है? सभी सन्त कोई जबाब नहीं दे सके, किसी ने भी इस कार्य को करने की हिम्मत नहीं की। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल हिम्मत हार गए और सोचा, कि अब हम अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो सकेंगे। मगर कुछ सन्तों ने कहा कि, इस काम को केवल स्वामी ईशरदास जी महाराज ही कर सकते हैं। सभी ने, स्वामी ईशर दास जी के पक्ष में ही प्रस्ताव पारित कर दिया। स्वामी जी ने भी इस चुनौती को स्वीकार कर लिया और सभी सन्तों से आग्रह किया, कि आप भी सभी अपनी लिखित मौलिक वाणी हमें दे कर, इस में अपना अमूल्य योगदान अवश्य करें। सन्त सम्मेलन में, सर्वसम्मति से, इस धर्म ग्रँथ का नाम गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ रखा गया।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
फरवरी 24, 2021।
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