साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल से बढ़ कर कोई राष्ट्रवादी नेता नहीं हुआ।
।। साहिबे कलाम मंगू राम से बढ़ कर कोई राष्ट्रवादी नेता नहीं हुआ।
आदधर्म मंडल के नौ विधायक सन 1937 के असेंबली चुनाबों में जीता कर, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने जो चमत्कार कर दिखाया था, उस से हिन्दू-मुस्लिम नेता सकते में पढ़ गए थे। हिन्दू नेताओं के पांवों तले जमीन खिसक गई थी, उधर मुस्लिम नेता मुहम्मद अली जिंन्हा के भी होश उड़ गए थे। हिन्दू-मुस्लिम नेताओं को वहुजन राज की भनक पड़ गई थी कि, हम साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल से बाजी हार जाएंगे, जिस के लिये हिन्दू मुस्लिम नेताओं ने अपनी अपनी विसात बिछाने के लिए योजनाएं बनानी शुरू कर दीं थी। हिन्दू नेताओं गांधी, नेहरू ने, दस साल के लिए गुलामी और मांग कर अंग्रेजों को सकते में डाल दिया था, उधर मिस्टर मुहम्मद अली जिंन्हा ने भी विशाल पाकिस्तान के निर्माण के लिए, स्वपन में अपने खुआब लेने के लिए शुरू कर दिए थे।
मुहम्मद अली जिंन्हा ने, पंजाब आदधर्म मंडल को निगलने के लिए, अपने सचिव को कुछ साथियों सहित , गद्दरी बाबा साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के घर, गाँव मुगोवाल भेजा ताकि उन से सौदेबाजी कर कर के, उन के नौ विधायकों का समर्थन जुटा कर, पाकिस्तान की सीमा यमुना नदी तक बढ़ाई जा सके। उस का सपना था, कि यदि साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी, मुस्लिम लीग के साथ मिल कर, मुस्लिम लीग का समर्थन कर दें, तो पाकिस्तान की राजधानी दिल्ली ही रहेगी। जिंन्हा के सचिव ने, मुगोवाल आ कर अपनी विसात का जाल बिछाने के लिए, गद्दरी बाबा साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी को बड़े अदब से सलाम किया और बड़ी ही मुहब्बत दिखा कर उनकी चारपाई पर विराजमान हो गए। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के बड़े भाई की उन्हीं दिनों मृत्यु हुई थी, जिस के कारण उन्होंने समझा कि ये लोग मुहम्मद अली जिंन्हा की ओर से शोक व्यक्त करने आए होंगे। उन्होंने तत्काल उन को चाय पिलाने के लिए, चाय बनाने के लिए कहा, मगर इसी दौरान सचिव ने कहा, सर हमें मुहम्मद अली जिंन्हा साहिब ने, आप के पास इसीलिए भेजा है कि, आप मुस्लिम लीग का समर्थन कर के, हमारी सहायता करें ताकि पाकिस्तान की सीमा यमुना नदी तक जा सके। साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने, एक दम कहा, भाई ये कदापि नहीं हो सकता है, जिसे सुन कर सचिव महोदय अपने प्रतिनिधि मंडल सहित तुरंत वहां से रफ़्फ़ु चक्कर हो गए।
गांधी एंड कंपनी ने, साहिबे कलाम के बड़े बड़े जरनैलों को खरीदने के लिए, अपने धन कुबेरों को उन के मगर लगा दिया ताकि आदधर्म मंडल को कमजोर कर दिया जाए। आदधर्म मंडल के गद्दारों को खरीदा जाने लगा, धन दौलत, कांग्रेस के टिकट और मंत्री पदों की थैलियों खोली गईं जिस के कारण, सन 1946 के विधान सभा के चुनाबों में, उन के गद्दार नेता कांग्रेस के टिकट पाने में सफल हो गए और पंजाब आदधर्म मंडल को खोखला कर दिया गया। साहिबे कलाम मंगू राम जी अकेले पड़ गए और वहुजन समाज के गद्दारों ने, गुरु रविदास जी मन्दिर चकहक़ीमा पंजाब में मीटिंग बुलाई और वहां पर, गुंडागर्दी पर उतर कर, मुगोवाल जी को कहा कि, हमारी सभी मांगें पूरी हो चुकी हैं, इसीलिए आदधर्म मंडल को भंग कर दिया जाए। मुगोवाल जी अकेले पड़ गए, जिस से आदधर्म मंडल भंग हो गया और वहुजन राज को वहुजन समाज के भूखे भेड़िए खा गए। साहिबे कलाम मंगू राम जी भी, विवश हो कर यूनिनिष्ट पार्टी में शामिल हो गए मगर उन्होंने कांग्रेस पार्टी का गंदा दामन नहीं पकड़ा। यूनिनिष्ट पार्टी से वे विधायक जीत गए थे। जब स्वतंत्रता के बाद, ये यूनिनिष्ट पार्टी भी समाप्त हो गई और नई पार्टी बनाने में भी वे असमर्थ थे, तब भी वे वहुजन समाज की सेवा में लगे रहे।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
फरवरी 24, 2021।
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