साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और मनुवादी आतंकवाद।।
साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल और मनुवादी आतंकवाद।।
साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल पंजाब और स्वामी अच्छूतानंद जी महाराज कानपुर, उत्तर प्रदेश के प्रयासों से, अंग्रेजी सरकार ने भारत के अछूतों को विशेष अधिकार दे दिये थे, जिन में अछूतों को दो वोट का अधिकार, मनुवादियों से बर्दास्त नहीं हो रहा था, जिस के खिलाफ मोहन दास करमचंद गांधी ने, यरवदा जेल में आमरण अनशन रख दिया था। गांधी इतना धोखेबाज क्रूर व्यक्ति था कि, भारतवर्ष के मूलभारतीयों को कोई भी अधिकार नहीं देना चाहता था, इसी लिए उस ने, अंग्रेजों को कह दिया था कि भारत में कोई भी अछूत नहीं है, केवल छोटे हिन्दू हैं जिन्हें हम जल्दी ही अपने बड़े हिंदुओं के साथ मिला लेंगे, जो एक वहुत बड़ी मक्कारी भरी चाल चली जा रही थी। मूलभारतीयों को गुलाम बनाये रखने की साजिश रच कर, और सुरक्षित हो कर जेल में बैठ गया था, ताकि कोई अछूत उसे कोई नुकसान ना पँहुचा सके मगर हुआ इस के विपरीत कि, जिन के लिये ये छली काम कर रहा था, उन्हीं लोगों ने उसे मौत के घाट उतार दिया था, कहते हैं ना देर है अंधेर नहीं।
कम्युनल अबार्ड के खिलाफ गांधी जहां यरवदा जेल में ड्रामा कर रहा था, वहीं मूलभारतीयों की स्वतंत्रता के लिए, अपनी जान की बाजी साहिबे कलाम गद्दरी बाबा मंगू राम मुगोवाल जी पंजाब के गढ़शंकर में, आमरण अनशन पर बैठ कर लगा रहे थे। वे भी गांधी की हेकड़ी का जबाब दे रहे थे। गांधी ने केवल छः दिन ही ड्रामा किया था, मगर साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने बारह दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच रह कर मूलनिवासी भारतीयों की आजादी के लिए, संघर्ष किया था, जिस की लुटिया पूना पैक्ट के कारण डुबो दी गई।
उधर साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जिंदगी और मौत के बीच खेल रहे थे, उधर पंजाब के जाट और ब्राह्मण अछूतों को आतंकित करने के लिए, भयभीत करने के लिए, उन के गांवों में आतंक फैला रहे थे, ताकि साहिबे कलाम मंगू राम जी अपने अधिकारों की लड़ाई छोड़ कर के, आदवंशियों को गुलाम ही बने रहने दें। मूलभारतीयों के घरों के चारों ओर कांटों की चारदीबारी कर दी गईं थी, कुएं बन्द कर दिए ताकि उन की जमीन में बने कुओं से पानी भी ना भर सकें, पशुओं का घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया गया, बहु, बेटियों और औरतों के साथ बलात्कारी बलात्कार करते जा रहे थे। अछूतों को घरों से बाहर निकलना मुहाल हो गया था, मगर साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी अपने हठ पर डटे रहे। मूलनिवासी भारतीयों को गुलाम बनाने वाले समझौते, पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, उन का आमरण जूस पिला कर तुड़वाया गया था, जिस के कारण, वे अंवेदकर से खपा हो गए थे।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
फरवरी 23, 2021।
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