सम्राट बाणासुर का मिथ्या इतिहास।।

।। सम्राट बाणासुर का मिथ्या इतिहास।
असुर कौन थे:----भारतवर्ष की धरती अवतारी महापुरुषों की धरती है, जहां आदि पुरुष से ले कर वर्तमान चंवरवंश तक के शासक हुए हैं, जिन के जीने के सिद्धांत, अत्यंत कड़ें थे, वे सुरा सुंदरी से, दूर रहते थे, जिस के कारण, उन्हें असुर कहते हैं, जिस का शाब्दिक अर्थ होता है, जो व्यक्ति सुर, शराब नहीं पीता है। ऐसे थे भारतवर्ष के, संयमी, सौम्य, सुशील, मर्यादित, न्यायिक, चरित्रवान सम्राट, जिन में से एक हुए हैं, बाणासुर जी महाराज। इन्हें छद्म यूरेशियन आक्रांताओं ने, छद्म इतिहास लिख कर  असुर राज, महाकाल, सहस्त्रबाहु, भूतराज भी लिखा हुआ है।
बाणासुर का जन्म:----आज से पांच हजार वर्ष पूर्व, सोनितपुर में राजकुमार बाणासुर का जन्म हुआ था। 
पिता:----सम्राट बलि वैरोचन सम्राट बाणासुर जी के पिता थे।
माता:----बाणासुर की माता साम्राज्ञी आशना थी।
बाणासुर की पत्नी:----सम्राट बाणासुर की पत्नी अनौप्पया थी।
बाणासुर की पुत्री:----बाणासुर की ऊषा नाम की पुत्री हुई है।
बाणासुर का इतिहास:----पांच हजार वर्ष पूर्व, सम्राट बाणासुर भारतवर्ष के एकछत्र सम्राट थे, जिन की, कई राजधानियां थी, जिन में से एक राजधानी श्रीनगर थी। एक सोनितपुर में थी जिस का वर्तमान नाम तेजपुर आसाम है, एक बामसू में थी जिस का वर्तमान नाम लमगोंदी है जो उत्तराखंड में स्थित है। उत्तराखंड में उन का मंदिर भी है, जहाँ उन की पूजा भी होती है।
बाणासुर की कल्पित तर्कहीन दंतकथाएं:--बड़ी ही अजीबोगरीब, तर्कहीन, संदेहास्पद कथाओं का सृजन कर के, भारतवर्ष के शासकों का इतिहास लिख कर, यूरेशियन आक्रांताओं ने, अपनी मूर्खता जाहिर की हुई है। बाणासुर के बारे में निम्नलिखित अस्वाभाविक कथाएं पढ़ने लिखने को मिलती है, जिन का कोई ना तो मूल नजर आता है, ना ही सच्चाई नजर आती है।
1 बाणासुर के सौ पुत्र थे।
2 बाणासुर ने, शिव शंकर की घोर तपस्या से निम्नलिखित वर प्राप्त किये थे।
क देवी पार्वती उसे पुत्र रूप में प्राप्त करे तथा उसे स्कंद का छोटा भाई माना जाए।
ख वह शिव से आरक्षित रहे।
ग उसे केवल अपने समान वीर से युद्ध करने का अवसर दिया जाए।
3 शिव ने कहा, अपने स्थान पर स्थापित तुम्हारा ध्वज जब खंडित हो कर गिर जाएगा, तभी तुम्हें युद्ध का अवसर मिलेगा।
4 बाणासुर की सहस्त्र भुजाएं थीं।
5 बाणासुर ने, अपने मंत्री कुभाँड़ को समस्त घटनाओं के विषय में बताया, तो वह चिंतित हो उठा, तभी इंद्र के बज्र से उस की ध्वजा टूट कर नीचे गिर गई। ध्वजा टूटने पर, बाणासुर का कृष्ण से युद्ध हुआ।
6 बाणासुर को बचाने के लिए पार्वती दोनो के बीच खड़ी हो गई, जो कृष्ण को नग्न रूप में नजर आ रही थी, बाकी किसी को नजर नहीं आ रही थी।
7 कृष्ण ने, नग्न पार्वती को ओर से अपनी दोनों आंखें मूंद ली थी।
8 पार्वती की प्रार्थना पर, कृष्ण ने बाणासुर को, जीवित रहने दिया था, किंतु उस की सहस्त्रों भुजाएं काट दीं।
9 पुत्रवत बाणासुर को शिव ने चार वरदान दिए थे।
क बाणासुर अजर अमर रहेगा।
ख शिव भक्ति में, विभोर हो कर नाचने वालों को पुत्र प्राप्ति होगी।
ग बाहें कटने से कष्ट से मुक्ति होगी।
घ महाकाल नाम से प्रसिद्ध होगा, जिस कारण वह महाकाल कहलाने लगा।
अब तर्क के आधार पर, इन दन्तकथाओं का, पोस्टमार्टम किया जाए तो मालूम होता है कि, क्या किसी के सौ पुत्र हो सकते है ? क्या कोई अपनी मौत को निमंत्रण दे सकता है ? क्या किसी की सौ भुजाएं हो सकती हैं ? क्या कोई किसी की कटी हुई भुजाओं के दर्द को रोक सकता है ? क्या कुभाँड़ नाम तर्कसंगत और सत्य लगता है ? ऐसे नाम ईजाद कर के, केवल मूलनिवासी महापुरुषों, के नामकरण कर के, यूरेशियन लेखकों ने यूरेशियन और भारतवर्ष के मूलनिवासी लोगों के बीच अंतर रखा हुआ है। ये सारी की सारी दन्त कथाएं तर्कसंगत नहीं हैं, केवल और केवल मूल निवासी सम्राटों का मिथ इतिहास लिख कर अपमानित किया गया है, जो शोध के विषय हैं।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल
फरवरी 03, 2021।

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