महाऋषि वेद व्यास का कलंकित जीवन।।
।। महाऋषि वेद व्यास का कलंकित जीवन।।
वेदों पुराणों का अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि, जिन राजाओं महाराजाओं की कथाएं वेदों पुराणों में भरी पड़ी हैं,वे सभी मूलभारतीयों की ही हैं,जिन्हें मनुवादी पुट देकर पुनः लिखा गया है।हरिबंश पुराण में लिखा गया है कि सत्यवती पिछले जन्म में पितरों की बेटी अछोदा थी, जिसे पृथ्वी पर जन्म लेने का श्राप था। एक लेखक लिखता है, कि सत्यवती एक अभिशप्त बेटी को अप्सरा अद्रिका नाम दिया गया था। अद्रिका एक शाप से, मच्छली में तब्दील हो गई थी और यमुना नदी में रहने लगी थी।
दूसरी किंवदंती के अनुसार, एक चेदि राजा ने, आकाशीय मार्ग से, अपना वीर्य अपनी रानी को भेजा था, मगर किसी ईगल के साथ मध्य वायु से लड़ने के कारण वीर्य नदी में गिर गया और शापित आद्रिका मच्छली द्वारा निगल लिया गया था, जिस से मच्छली गर्भवती हो गई। जल्दी ही एक मछुआरे ने मच्छली को पकड़ लिया, जब उस ने मछली का उत्सर्जन किया तो, उस के गर्भ से एक लड़का और एक लड़की निकली। लड़के कानाम मत्स्य राज रखा गया था जो बाद में मत्स्य राजा रबना था और लड़की का नाम काली रखा गया था, जिसे बाद में सत्यवती कहा गया था।सत्यवती अपने पिता मछुआरे की काम मे मदद करती थी। एक दिन ऋषि पराशर नदी पार करना चाहते थे, वह काली उर्फ सत्यवती के रूप सौंदर्य पर आशक्त हो गया और उस के पिता को, पानी में नाव धकेलने का भय देकर, ब्लैकमेल कर के, काली से वासनात्मक संबद्ध बना कर, काली उर्फ सत्यवती का कौमार्य भंग कर देता है, जिस से महाऋषि व्यास का जन्म हुआ बताया गया है, जिन्हें ऐतिहासिक वेदों, पुराणो का संकलन कर्ता और महाभारत का रचनाकार घोषित किया गया है।
बड़ी हैरानी का विषय है कि, महाऋषि व्यास जैसे आदवंशी, मूलभारतीयों और मूलनिवासी जीनियस बेटों, बेटियों के जीवन चरित्र को किस प्रकार धुन्दला, संदेहास्पद, बना गया जाता रहता है।, किस प्रकार की बेहूदा कथाएं घड़ कर इन मेधावी आदिवासी, मूलनिवासियों के दामन को कलंकित कर के ब्राह्मण लेखकों ने लिखा हुआ है।
अगर सत्यवती की कथा का मनोवैज्ञानिक, तर्क के आधार पर विश्लेषण किया जाए तो, ये सारी कथा ही फेक, काल्पनिक और शैतानी दिमाग की उपज लगती है क्योंकि बच्चे के जन्म में तो नौ महीने लगते ही है, फिर माता पिता का संसर्ग भी अति आवश्यक है, मगर मनुवादी द्वारा किये गए बलात्कार को छिपाने के लिए, राजा के वीर्य को आकाशीय रास्ते से भिजवाया हुआ बताया गया है, जो नदी में गिर गया और मच्छली के गर्भ चला गया था, जिस से दो बच्चे जन्मे जो कोरी बकबास ही लगती है क्योंकि कभी भी किसी एक योनि में जन्म लेना भ्रूण दूरी योनि में विकसित नहीं होता, फिर मछली ने किस प्रकार काली को विकसित किया होगा। वास्तव में भारत की मूलनिवासी कन्याओं के साथ ऐसे ही जाहिल बलात्कारी, बलात्कार करते आए हैं और मनुवादी अपने पाप कर्मों को छिपाने के लिए, ऐसी ही काल्पनिक अमनोवैज्ञानिक कथाएँ घड़ कर, बलात्कारियों का बचाब करते हैं। महाऋषि व्यास से, वेद पुराण भी लिखवा लिये और बाद में, उसे अपमानित भी कर दिया। आज भी इन्हीं लोगों ने, भारत का संविधान भी लिखवा लिया और उसी संविधान लिखने वाले, भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को अपमानित करने के लिए, उन की मूर्तियां भी तोड़ते जा रहे हैं फिर ना जाने कितने भद्दे कमेंट कर के, उन के ऊपर छींटाकसी की जा रही है।
भारत के मूलनिवासी राजनेताओं को, मनुवादी षडयंत्रों को समझ कर, एक मंच पर आ कर, राज सत्ता छीनने के लिए, प्रयास करना चाहिए ताकि मूलभारतीयों की अस्मिता को बचाया जा सके। जीनियस वच्चों के साथ हो रहे खिलबाड़ को रोका जा सके। मूलनिवासी समाज सेवकों को भी, इन अहंकारी राजनेताओं को एक झंडे तले इकठ्ठा होने के लिए विवश करना चाहिए।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
फरवरी 20, 2021।
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