राक्षस कुंभकर्ण।
।। कुंभकर्ण राक्षस।।
सम्पूर्ण मूलनिवासी महापुरुषों का इतिहास, तर्कहीन, महाझूठ और कोरी कल्पनाओं पर ही आधारित लगता है। रावण महिसासुर से ले कर, सभी मूलनिवासी भारतीय नायकों के सिरों पर सींग, भयंकर शक्लें, शक्तिशाली वीर योद्धाओं के रूप में चित्र बना कर और उन का अंत दैवीय शक्ति सम्पन्न लोगों के विचित्र सुदर्शन चक्र जैसे काल्पनिक हथियारों से लिखा गया है। जिस इतिहास को भारतीय निरक्षर मूलनिवासी भी सत्य मानते आए हैं। ऐसे ही एक भारतीय महा योद्धा, कुंभकर्ण को भी इतिहास के पन्नों में दर्ज किया गया।है।
कुंभकर्ण का परिचय:---कुंभकर्ण, लंकापति राजा रावण का भाई था, जिस के सिर पर भी सींग थे, भयानक, भयावह आकार, डरावनी आंखें, विशालकाय महायोद्धा और गुफाओं में सोने वाला राक्षस लिखा गया है। जो छः महीने बाद भी केवल एक दिन के लिए जागता था। वह फिर दुबारा छः महीने के लिए भोजन कर के सो जाया करता था क्योंकि इस ने ब्रह्मा से निद्रासन का वरदान मांगा हुआ था। जब युद्ध के दौरान किसी तरह कुंभकर्ण को जगाया भी गया, तभी उस ने निंद्रा तोड़ी थी। वीर कुंभकर्ण ने युद्ध में अपने विशाल शरीर से वानर सेना पर आक्रमण करना शुरू कर दिया था। जिस से राम की बंदर सेना में भगदड़ और हाहाकार मच गई थी। राम ने सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए कुंभकर्ण को युद्ध के लिए ललकारा और उस से भयंकर युद्ध किया था, कमनीय रामचन्द्र के हाथों कुंभकर्ण वीरगति को प्राप्त हो गया था।
अब प्रश्न उतपन्न होते हैं, कि क्या कोई आदमी छः महीने निरन्तर सो सकता है, जब कि यदि हम भी, किसी सर्दी वाले दिन बिस्तर पर ही पड़े रहें तो, हमारा शरीर ऐसा लगता है कि, जाम ही हो गया है, टांगे भी चलने में सहयोग नहीं देती, यही नहीं, आज कोरोना महामारी के कारण भी पिछले मार्च से लोहे की बनी बसें खड़ी हैं, जिन के पुर्जे जाम हो चुके हैं, बैटरियां बर्बाद हो चुकीं हैं, फिर यदि निष्क्रिय लोहे की ही यह हालत हो जाती है तो क्या, मांस रक्त और अस्थियों से बना हुआ ढांचा, क्या छः छः महीने, अंधेरी गुफाओं में निर्जीव मुर्दे की तरह पड़ा रहा सकता है, क्या ब्रह्मा जैसा व्यक्ति, किसी को ये शक्ति दे सकता है, जिस का चरित्र ही कलंकित हो। क्या कोई कमनीय बालक ऐसे महायोद्धा को कत्ल कर सकता है।
ब्राह्मणों ने, मूलनिवासी वीर बहादुर नायकों को तो शक्तिशाली अवश्य लिखा हुआ है मगर उन का अंत निर्बल मनुवादियों के हाथों दिखा कर, अपनी सर्वोच्च अलौकिकता को ही दिखाया है जो तर्क की कसौटी पर संदेहास्पद ही लगता है, जो झूठ का ही पुलिंदा मात्र है। नामकरण भी बड़े ही हास्यस्पद लगते हैं, किसी का भी नाम तर्कसंगत नहीं लगता है। ये केवल और केवल भारतीय महानायकों को अपमानित करने के लिए, काल्पनिक कथाएं घड़ी गईं हैं, जिन पर मूलनिवासी जनता को कतई विश्वास नहीं करना चाहिए।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
फरवरी 13, 2021।
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