गुरु रविदास जी महाराज और सच्चा व्यापार।
।। गुरु रविदास जी महाराज और सच्चा व्यापार।।
गुरु रविदास जी महाराज ने, सँगत को सच्चा व्यापार करने की हिदायत दी हुई है। जिस घट में सत्य निवास करता है, जिस की जिह्वा से सत्य ही निकलता है, उसे कोई भी पराजित नहीं कर सकता है, उसे कोई भी हानि पहुंचा नहीं सकता, प्रत्येक कोर्ट कचैहरी में उसे विजय हासिल होती है, सभी उस के चरण कमलों में नमन करने के लिए विवश हो जाते हैं। गुरु रविदास जी ने, खुद भी जीवन में सच्चा व्यापार किया है, जिस के बल पर, विश्व की सभी राजे रयितें उन के चरणों पर दण्डवत हो कर झुकीं और उन के समक्ष आत्मसमर्पण किया, केवल आत्मसमर्पण ही नहीं किया अपितु गुरु जी के निर्देश से शासन भी किया, जिस से प्रजा सुखी रही, समृद्ध भी हुई, बेगम भी रही। शासक भी अमर हो कर सम्मानित भी हुए और इतिहास पुरुष बन गए, जिन शासकों ने प्रजा के खून से अपने हाथ लथपथ किये थे, खून की नदियां बहाईं थी, वे गुरु जी के सानिध्य में आ कर, बड़े सम्मान से, इतिहास में अमर भी हो गए हैं। इसीलिये गुरु जी ने, मानव को सच है व्यापार करने का उपदेश देते हुए, स्वामी ईशरदास जी महाराज के शब्दों में, गुरु आदि परगास ग्रँथ के पृष्ठ संख्या 969 पर, फरमान जारी करते हए, सँगत को समझाते हुए कहते हैं :-----
।।शब्द आसा।।
सच्चे वणज बपार दी तूँ पेख रख बपारीआ। सचा वणज करे बपारी दरगाह माह पचारिआ। सच वणज दे कारने जनम लीयो भव में। झूठे वणज ले लपटाइयो दरगाह जा धिरकारीआ। जास करवै सच वणज अलख अगम बाजार गए। शहशाहां दे, ते शाह सो कहीऐ साहिब दे दरबारीआ। दृढ़ वणज घाटा रास गई जिन सोच ना बचारीआ। रविदास रास गंवा बपार बपारी जिन्दड़ी नूँ घैल कीउ। सतिनाम वणज कीता ना सभै वणज वसारीआ।
गुरु रविदास जी व्यापारियों को व्यापार करना सिखाते हुए समझाते हैं कि, हे व्यापारी! तू सब से पहले व्यापार करने की परख कर ले, सच्चे व्यापार को समझ ले फिर तूँ व्यापार कर। जो व्यापारी सच्चा व्यापार करता है, उस का हर जगह सम्मान होता है, सब जगह प्रचार होता है। हे व्यापारी ! तूँ ने सच्चे व्यापार के लिए ही जन्म लिया हुआ है। जो जो झूठे व्यापार में संलिप्त रहते हैं, लिपटे रहते हैं वे हर जगह फटकारे और धिक्कारे ही जाते हैं। जो जो सच्चा व्यापार करते हैं, वही अलख अगम बाजारों के दर्शन कर पाते हैं, वही लोग आदपुरुष के दरबार में, शहंशाहों के शहंशाह कहलाते हैं, जिन जिन व्यापारियों ने सोच विचार कर व्यापार नहीं किया वे, बड़े बड़े व्यापारों में भी घाटा पा लेते हैं और अपनी रास तक को भी खो देते हैं। गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, हे व्यापारी ! तुम ने व्यापार की रास को बर्बाद कर के, अपने आप को घायल कर लिया है, तुम ने सारे व्यापारों को भुला कर के सतनाम का व्यापार नहीं किया।
गुरु रविदास जी महाराज, सच्चे व्यापार को ही काम कहते हैं, आदमी जो जो कार्य होते हैं उन्हें ही व्यापार कहते हैं, वे समझाते हैं कि, तुम ने, मायाजाल में उलझ कर, असली काम को भुला कर, जीवन को बर्बाद कर लिया है। वे सँगत को सन्देश देते हुए फरमाते हैं कि, आप अपने काम के व्यापार के साथ साथ, सोहम शब्द का भी व्यापार करो, तभी जीवन की नैया पार लगेगी अन्यथा किनारे नहीं लगेगी, जिस के लिए सच के चप्पू वहुत ही जरूरी हैं। सत्य के साथ ही जीवन की नैया तैरती है अन्यथा मंझधार में ही डूबती है।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
20जनवरी, 2021।
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