गुरु रविदास जी महाराज और गुरुओं से बैर।।
।।गुरु रविदास जी महाराज और गुरुओं से बैर।।
गुरु रविदास जी ही सर्वशक्तिमान, ज्योतिर्ज्ञानी और सर्वज्ञ हुए हैं। मंसूर, यीशू मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया था, शम्स की चमड़ी उधेड़ दी गई, खलील को जिंदा जलाया गया था, कोई भी जालिमों के जुल्मों से उनकी रक्षा नहीं कर सका था, ना ही वे अपने आप को बचा सके, मगर गुरु रविदास महाराज और उन के, परिपूर्ण शिष्यों को कोई भी जरा भी आंच नहीं पहुंचा सके थे। सतगुर कबीर साहिब को खूनी हाथी के आगे डाला गया, गहरी नदी में वहाया गया, सतगुरू मीरांबाई को जहर का पिआला पिलाया गया था पिटारे में सांप भेजा गया, मगर उन का कोई भी बाल बांका नहीं कर सका। सदना कसाई जिंदा दीवार में चिनवाया गया था मगर दीवार भी गिर गई थी, फिर भी तत्कालीन शासकों ने गुरुओं, सन्तों और पीरों को मानसिक और शारीरिक रूप से वहुत परेशान किया था। गुरु रविदास जी महाराज को तो, आजीवन ही मनुबाद ने इतना सताया कि, उस का वर्णन करना भी कठिन है। गुरु रविदास जी इतने आध्यात्मिक शक्ति सम्पन्न थे कि, जिस का आज तक कोई भी सानी नहीं हुआ है, कोई भी उन का साम्य नहीं रखता है। कोई भी उनको सूली पर चढ़ा नहीं सका, जिस से गुरु जी की सर्वोच्चता, सर्वज्ञता, अपरम्पार शक्ति का अहसास होता है। संतों को सताने का चित्रण, स्वामी ईशरदास जी महाराज, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के, पृष्ठ संख्या 637-638 पर करते हैं कि:----
।। चौपाई।।
मूरख मनमुख शाक्त भाई। सचे अनामीआँ संग बैर बधाई। करामात वेखन कहन दस शकती। जेहड़ी केहन करदा है राम वाली भगती। अनामी जे कोई शक्ति वखलावे। मूर्ख मनमुख जादूगर बतलावे। इस विद्ध शाक्त नरक के गामी। ईशर दास कहे पायो झगड़ा अनामी।
भगवान से बिमुख, महामूर्ख शक्ति के पुजारियों और उन के भाईयों ने, हमेशा ही नामधारियों, साधकों के साथ दुश्मनी बढ़ाई है। आध्यात्मिक शक्तियों को देखने के लालच में, ये लोग, गुरु रविदास जी को कहते कि, अपनी शक्तियों को दिखाओ। जो ये कहते थे कि, ये राम की भगती करता है, फिर भी यही धूर्त, गुरु रविदास जी को दुखी करने के लिए, उन्हें शक्तियों को दिखाने के लिए, विवश किया करते थे, विकृत शक्ल बना कर कहते कि आप जिस भी भगवान की भगती करते है, उसे दिखाओ। जब गुरु रविदास जी उन्हें शक्ति दिखा भी देते, तब भी प्रभु से बिमुख, मूर्ख, उन के चमत्कारों को देख कर यही कहते कि, ये तो जादूगर ही है। ऐसा अनर्गल विलाप करते हुए ये, काल्पनिक शक्ति के पुजारी, संतों को अनाप शनाप बातें, कह कर नारकीय जीवन जीते रहे हैं। स्वामी ईशर दास जी फरमाते हैं कि, ऐसा कह कर ये मूर्ख नामधारी साधु, सन्तों के साथ झगड़े करते हैं।
।।शब्द देव गांधारी।।
जिन्हां ने जींदे मुर्दे कीते उन्हां से भी बैर बधाऐ।राम के पिआरे सिमरन उचारे अनक भांत शक्ति वखलाऐ। अंधड़े पिंगले गुंगड़े बहरे सबूत कीते कुशटिआँ कुष्ठ गुआऐ। वेखत शक्तियां वेख वेख हैरान हुए पुन जादूगर बतलाऐ। ऐसे नूरियाँ ते जगत ना रीझिआ दास का चीज कहाऐ।
स्वामी ईशरदास जी महाराज फरमाते हैं कि, गुरु रविदास जी महाराज ने, राजस्थान में सत्रह सांप के काटे हुए मुर्दे जिंदा किये थे, उन से भी मूर्खों दुष्टों ने दुश्मनी ही बढ़ाई थी। गुरु जी ने भगवान से प्रेम करने वाले जिज्ञाशुओं को, भगवान का सिमरन करना भी सिखाया और उनकी इच्छा अनुसार अनेकों प्रकार की शक्तियां भी दिखाईं, अंधे, लँगड़े, लूले और गूंगे बहरे भी ठीक किये, असंख कोहड़ियों को कोहड़ रोग से मुक्त किया, गुरु जी की शक्तियाँ देख देख कर बड़े हैरान भी हुए मगर बाद में मूर्खों ने, गुरु जी को जादूगर ही कहा। स्वामी ईशरदास जी महाराज फरमाते हैं कि, ऐसे आत्म प्रकाशी गुरु रविदास जी के नूर से जगत खुश नहीं हुआ, तो हम क्या चीज हैं? स्वामी ईशर दास जी महाराज को भी, हिमाचल प्रदेश, के ऊना की जेल में कैद किया गया था, फिर पंजाब के होशियार पुर में, पुलिस ने बुरी तरह से प्रताड़ित किया था, जिस के कारण थानेदार को भी प्राणों के लाले पड़ गए थे, उन की दिव्य शक्तियों को देख कर, ब्राह्मणों ने छल कपट नहीं छोड़ा था। सभी सन्त महापुरुष, गुरु और अवतार भारत के मूलनिवासी ही हुए हैं, कोई भी ब्राह्मण आज तक, इन गुरुओं का साम्य नहीं कर सका जिस से आहत हो कर, इन्होंने हमेशा जाति के आधार पर गुरुओं का अपमान ही किया है, इसी कारण स्वामी जी फरमाते हैं, कि इन्होंने सर्वोत्तम, सर्वोच्च, सर्वश्रेष्ठ और सर्व गुण संपन्न सर्वज्ञ गुरु रविदास जी को अपमानित किया है तो, हम क्या चीज हैं, अर्थात ईश्वरीय शक्ति संपन्न गुरु रविदास जी महाराज के समक्ष हम नगण्य हैं।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
जनवरी 16,2020।
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