सन 1946 में पंजाब विधानसभा के आरक्षित विधायक।।
।।सन 1946 में पंजाब विधानसभा के आरक्षित विधायक।।
दूसरे विश्व युद्ध के कारण सन 1942 में भारत में विधानसभा के चुनाव नहीं कराए गए थे, जिस के बाद ये चुनाव सन 1946 में करवाए गए थे। भारत में लोकतंत्र की स्थापना केवल अंग्रेज ही कर गए थे, जिस से भारत के मूलनिवासियों को वोट के अधिकार नसीब हो गए थे, अगर कहीं वे लोकतंत्र की स्थापना नहीं करते तो शायद भारत में वही पुरानी मनुस्मृति थोंप दी जाती और पुनः वही जातिवाद बना रहता, छुआछूत, ऊँच नीच कायम रहती। शायद आदपुरुष ने, ब्राह्मणवाद के खात्मे के लिए ही अंग्रेजों को भारत भेजा था, उन्होंने ही, अछूतों को गुलामी से मुक्त किया था, वही वोट का भी अधिकार दे गए थे, मोहनदास कर्म चन्द गांधी और जवाहर लाल नेहरू एंड कंपनी ने ऐड़ी छोटी का जोर लगा लिया था, ताकि भारत के मूलनिवासी लोगों को, वोट का अधिकार ना मिले, गांधी और उस के पिछलग्गू अछूत समाज के बिकाऊ दलालों ने भी साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के आंदोलन का भी डट कर विरोध कर के, गांधी एंड कंपनी का ही साथ दिया था। आदधर्म मंडल के समानांतर ही अछूत सुधार मंडल जैसे फर्जी संगठन बना कर, पंजाब आदधर्म मंडल को धोखा दिया गया था। सन 1937 में ही अंग्रेज सरकार भारत को स्वतंत्र कर देना चाहती थी, मगर साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल की विजय से गांधी एड कंपनी भयभीत हो गई थी। आदधर्म मंडल को मनुवाद के लिए वहुत बड़ा खतरा समझ कर, भारत की आजादी दस वर्षों के लिए टाल दी गई थी, गांधी एंड कंपनी ने, अंग्रेजों को कह दिया कि, हमें दस साल तक आजादी नहीं चाहिए। इन्हीं दस वर्षों में, भ्रष्ट कांग्रेस ने, आदधर्म मंडल के नेताओं को खरीदा और साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल को, अकेला करबा दिया था, आदधर्म मंडल के गद्दार, बाबू मंगू राम जी को छोड़ कर कांग्रेस की झोली में चले गए, कुछ ने सांसद और कुछ ने राज्यसभा की उम्मीदबारी लेकर, वहुजन समाज को धोखा देकर अपने उल्लू सीधे कर लिये। बाबू मंगू राम मुगोवाल जी को, गुरु रविदास मंदिर चक हकीमा पंजाब में, पंजाब आदधर्म मंडल का सम्मेलन बुलाने के लिए इन्हीं स्वार्थी लोगों ने विवश कर दिया था। सम्मेलन में, बाबू मंगू राम मुगोवाल जी पर, कांग्रेस के इशारे पर दबाब बनाया गया कि, आदधर्म मंडल की सारी मांगे पूरी हो चुकी हैं, इसीलिए आदधर्म मंडल को भंग किया जाए। गुंडागर्दी पर उतर कर, इन्हीं वहुजन समाज के दुश्मनों ने बाबू मंगू राम जी की इच्छा के विरूद्ध, आदधर्म मंडल को खत्म कर दिया, जिस के कारण, आदधर्म आंदोलन को भी मिट्टी में मिला दिया गया। वहुजन समाज के ये दुश्मन कांग्रेस के टिकट पर सन 1946 के विधानसभा के चुनाबों में उतरे और कुछ कांग्रेस पार्टी के सहयोग से जीत गए, कुछ अपनी और आदधर्म की नैया को भी डुबो बैठे। बाबू मंगूराम मुगोवाल जी अकेले पड़ गए। उस समय उन्हें ना तो बेतन मिलता था ना ही पेंशन। विवश हो कर बाबू जी को भी कांग्रेस का दामन थामना पड़ा था, जिस के बारे में, कई लोग उन पर कांग्रेस पार्टी में चले जाने का आक्षेप लगाते है मगर नेता भी साथियों के बिंना अपंग हो जाता है, बाबू जी की भी यही दशा हुई थी। निम्नलिखित पंजाब आदधर्म मंडल के जीतने वाले लोगों के दलों से ज्ञात हो जाता है कि, किन किन ने बाबू मंगू राम मुगोवाल जी से धोखा कर के, अपने परिवारों के पेट भरने के लिए, आदधर्म मंडल को त्याग दिया था।
बाबू मंगू राम मुगोवाल जी ने भी विवश हो कर, सन 1946 में यूनिनिष्ट पार्टी से चुनाव लड़ा था, क्योंकि वे नया दल नहीं बना सके और गद्दार उन्हें छोड़ कर जा चुके थे, जिन धोखेबाजों में से निम्नलिखित विधायक चुने गए थे:---
1 श्री प्रेम सिंह, दक्षिण पूर्वी गुड़गांव।।आजाद।।
2 सुंदर लाल, उतर करनाल।। कांग्रेस।।
3 पृथि सिंह, अंबाला और शिमला।। कांग्रेस।।
4 बाबू मंगूराम मुगोवाल, पूर्वी होशियारपुर।। यूनिनिष्ट।।
5 मेहर चन्द, पश्चिम होशियारपुर।।कांग्रेस।।
6 सन्त राम वाल्मीकि, जालंधर ग्रामीण।।कांग्रेस।।
7 मास्टर गुरबन्ता सिंह, जालंधर शहरी।। कांग्रेस।।
8 मातू राम, लुधियाना और फिरोजपुर।कांग्रेस।।
9 सुंदर सिंह, अमृतसर और सियालकोट।। कांग्रेस।।
10 हरभज राम, लायलपुर और झांग। आजाद।।
जिन लोगों को थोड़ी भी शर्म थी, वे तो कांग्रेस पार्टी में नहीं गए और विधायक पुनः चुने गए। यदि साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के सिपाहसालार अछूतों के साथ गद्दारी नही करते तो आज तक भारत में वहुजन राज होता मगर अछूतों के दुश्मन कांग्रेस में शामिल हो गए और अपनी गरीबी दूर कर ली, अपने ही परिवार के वच्चों को आई ए एस, आई पी एस और बड़े बड़े पदों पर आसीन कर लिया, मगर अछूत समाज को, गुलामी के गर्त में ही पड़ा रहने दिया था। भले ही बाबू मंगू राम को धोखेबाजों ने, अकेला छोड़ दिया था, भले ही वे अंतिम दिनों में परेशान रहे मगर उन का सम्मान सारे विश्व में हो रहा है, उन का इतिहास जिंदा होता जा रहा है, मगर जिन जिन गद्दारों ने, कांग्रेस की झोली में पड़ कर, गद्दारी भते खाए उन के नाम को इतिहास सदा सदा के लिये मिटा देगा।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल
जनवरी 30, 2021।
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