सन 1937 में पंजाब विधानसभा के मंत्री और मुख्यमंत्री।।
।।सन 1937 में पंजाब विधानसभा के मंत्री और मुख्यमंत्री।।
अंग्रेजी सरकार ने, 1932 में निर्णय कर लिया था कि, भारत में विधानसभा चुनाव करवा कर, लोकतंत्र की स्थापना कर के, भारत को आजाद कर देंगे। इसीलिए सन 1937 के चुनाब करवाए गए थे, उस के बाद, जब गुलाम भारत का पहला मंत्रिमंडल बना था, उस के निम्नलिखित मंत्री और मुख्यमंत्री बनाए गए थे :----
मुख्यमंत्री------सर सिकन्दर हयात खान।
राजस्व मंत्री----सुंदर सिंह मजिठिया।
विकास मंत्री----छोटू राम।
वित्त मंत्री------- मनोहर लाल।
पब्लिक कार्य मंत्री--खिजार हयात टिबाना।
शिक्षा मंत्री------- अब्दुल हयात।
पंजाब विधानसभा में, जीत कर आए अनुसूचित जाति आदधर्म मंडल के विधायक।
चौधरी प्रेम सिंह ठेकेदार, हिदायतपुर छावनी।गुड़गांव।
फकीर चन्द चौधरी, करनाल।
लाला हरनाम दास अध्यापक चक नंबर 196- आर बी इस्लामावाद, जिला लायलपुर।
सेठ किशन दास, गांव व डाकखाना खाम्बरा जालंधर।
जुगल किशोर, गांव माजरी चमाराँ, डाकखाना जगाधरी, अंबाला।
भगत हंस राज पलीडर, पूरन नगर सियालकोट शहर।
सरदार गोपाल सिंह अमरीकन मर्चेंट, गाँव लील, डाकखाना पखोवाल लुधियाना।
मूला सिंह, गाँव व डाकखाना बालाचौर, गढ़ शंकर, होशियारपुर।
किंग मेकर साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल:-- सन 1937 में ही वहुजन राज की नींव डालने वाले, पंजाब आदधर्म मंडल के अध्यक्ष, साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल जी किंग मेकर के रूप में उभरे थे। उन्होंने निःस्वार्थ भाव से, अछूतों को चुनाव में उतार कर, ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। जिस का प्रभाव भावी राजनीति पर भी पड़ा, उसी नींव पर साहिब कांशीराम जी ने भी वहुजन राज की नींव का पत्थर रखा और विश्व को दिखा दिया था कि, भारतवर्ष में, जल्दी ही ब्राह्मणवाद खत्म कर के, चँवरवंशी राज पुनः स्थापित हो जाएगा। बाबू मंगू राम मुगोवाल, वहुजन क्रान्ति के मसीहा के रूप में जाने जाएंगे। उन के इतिहास और ऐतिहासिक कार्यों को किसी ने हिंदी भाषा में लिख कर जनता के समक्ष उजागर नहीं किया है, इसी कारण उन की सफलताओं को कोई और ही भुनाता आ रहा है। वास्तव में, वहुजन महाक्रांति के मसीहा साहिबे कलाम मंगूराम मुगोवाल और स्वामी अछुतानन्द जी महाराज कानपुर ही थे। उन्होंने भारतवर्ष में आने वाले अंग्रेजी हकूमत के कमिशनों को, बार बार ज्ञापन देकर, धन धरती शिक्षा रोजगार और आरक्षण के अधिकार प्राप्त कर के, 1937 तक लागू करबा लिये थे। साहिबे कलाम मंगू राम ही पूना पैक्ट के खिलाफ बारह दिनों तक आमरण अनशन पर बैठे रहे थे, जब कि कर्म चन्द गांधी की हवा तीन चार दिनों में ही निकल गई थी। अगर मंगू राम मुगोवाल जी, मुस्लिम लीग के नेता मुहम्मद अली जिंन्हा का कहना मॉन जाते और उन्हें समर्थन दे देते तो, पाकिस्तान की सीमा दिल्ली की यमुना नदी तक होती, मगर ये साहिबे कलाम ही थे, जिन्होंने ये अनहोनी घटने ही नहीं दी थी।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
जनवरी 29, 2021।
Comments
Post a Comment