गुरु रविदास जी महाराज के अनुसार धर्मी कौन?

।।गुरु रविदास जी महाराज के अनुसार धर्मी कौन।।
गुरु रविदास जी ने धर्मों को त्याग कर, धर्म का पालन किया है और सँगत को भी ऐसा ही करने के लिए उपदेश दिए हैं। आद का बेटा जुगाद हुआ है, जिससे स्पष्ट होता है, कि आदिकाल से ही आदधर्म चलता आ रहा है, गुरु रविदास जी महाराज ने इसी आदधर्म को मानवीय धर्म कहा है। संसार में, आदधर्म के उपरांत कई मजहब (उपधर्म) जन्म ले चुके हैं, जिन्होंने मॉनवता को खण्ड खण्ड ही किया है, एक दूसरे के जानी ही नहीं कट्टर दुश्मन बना कर, दुश्मनी को ही जन्म दिया है। धर्म तो, इंसानियत, भाईचारा, प्यार, प्रेम, सामंजस्य और समरसता ही सिखाता है, धर्म कभी भी किसी की हत्या करने की अनुमति नहीं देता, किसी को भी, किसी के शोषण की अनुमति नहीं देता और ना ही किसी को, किसी की आत्मा को दुख देने की वकालत ही करता है, मगर जितने उपधर्म हैं, वे आपस में धर्मों के नाम पर खून की नदियाँ बहाते आ रहे है और हैवानियत का नँगा नाच करते जा रहे, जिस का साक्षात प्रमाण, अजरबेजान और आर्मीनिया का युद्ध, ईसाई धर्म और इस्लाम धर्म का युद्ध बना हुआ है। गुरु रविदास जी महाराज ने, आदधर्म और आदधर्मी के बारे में, स्वामी ईशरदास जी महाराज के शब्दों में, गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के पृष्ठ संख्या, 626- 627 पर फरमाया है:----
                ।।शलोक।।
हिंसा करम इह जीव घात कर जोई। रविदास जो नर हिंसक जुलमी जगत कहोई। दया ना उपजे जिस नर सो नर रूप कसाई। दया धर्म बिन भन रविदास जिनहे छुरी चलाई। जीव घनेरे घैल कर कहन हक हलाल। रविदास लेखा दरगाह दे जेते करम चंडाल।
गुरु रविदास जी सच्चे धर्मी के बारे में फरमाते हैं कि, जो लोग हिंसा कर के, जीवों का कत्लेआम करते हैं, गुरु जी उन्हें हिंसक और जुल्मी कहते हैं, अर्थात उन्हें आदमी ना कह कर आदमखोर कहते हैं। जिन के मन में दया और धर्म उतपन्न नहीं होते हैं, वे व्यक्ति कसाई होते हैं। जो लोग निर्दयी हो कर, धार्मिक ना हो कर, छुरियां चला कर जीव हत्या करते हैं, जीवों को घायल करते हैं, जीवों को कत्ल करते हैं, फिर कहते हैं, कि ये हक हलाल हैं, गुरु रविदास जी महाराज फरमाते हैं कि, ऐसे चंडाल के कार्य करने वाले इसी जन्म के चोले में, नरक की जिंदगी जी कर मरते हैं।
              ।। शब्द देव गांधारी।।
धरमी सोई नर है, जीवन दान जो देंवदे। जीव गरीब की रक्षा कर जो, सोई शूरमें कहेंवदे। क्रोध हिंसक जोऊ घट पसारा। चंडाल रूप सदेंवदे। जीव अनुकंपा खिमा सन्तोष जग जस लैंवदे। रविदास रिस हिंसक तिआगू, सोई गुरमुख नर वणेंवदे।
गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, वही व्यक्ति धर्मी है, जो अन्याय, अत्याचार और मॉनवता कि रक्षा के लिए, अपना जीवन बलिदान कर देते हैं। जो जीवों, गरीबों और असहाय लोगों की रक्षा करते हैं, वही शूरवीर कहलाते हैं। जिन के दिल और मन में क्रोध, मारकाट की भावना होती है, उन्हें चंडाल पुकारा जाता है। जो जीवों पर दया करते हैं, उन की गलतियों के लिए क्षमा कर के सन्तोष करते हैं, वही संसार में यश, सम्मान और बढ़ाई प्राप्त करते हैं। गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, जो क्रोध और हिंसा छोड़ देते हैं, वही लोग गुरु के प्यारे बनते हैं।
रामसिंह आदवंशी।
गुरु रविदास सेवक।
नबंबर 09, 2020।

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