गुरु रविदास जी की शिष्या "मीराँबाई" की भाई को फटकार।!
।। गुरु रविदास की शिष्या "मीराँबाई" की भाई फटकार!
गुरु रविदास जी, अपनी शिष्या की कड़ी परीक्षा ले रहे थे, जिस के बारे में मीराँबाई अनभिज्ञ थीं, मगर अपनी दिव्य दृष्टि से सारे कौतुकों को भी देख रहे थे। मीराँ का अहंकारी भाई, मीराँ को मारने के लिए, जहर का प्याला देकर, उस के समक्ष खड़ा था। विवश मीराँबाई, आँखें बंद कर के अपने गुरु रविदास जी को याद करती हुई उन से अपनी व्यथा को बताती हुई, मुंह में कुछ बोल रही थी, जिसे उस का दारुण भाई, बोलती हुई मीराँ को सुनता है, जिस से आहत हो कर वह मीरांबाई को, कसाईयों की तरह, पछ पछ कर, कत्ल करने की धमकी देता है, जिस का चित्रण स्वामी ईशरदास जी महाराज ने, दिव्य गुरु आदि प्रकाश ग्रँथ के पृष्ठ संख्या 572-573 पर बड़ी ही मार्मिकता से किया है:-----
।। शब्द जिला।।
मीराँ पीन्दी ना पिआला तीर मारूं कस कस के। नहीं नाल शमशीर मारूं पछ पछ के। कैसी बुड़ बुड़ है लगाई। किस को रही है ध्याई। तेरी मौत सिर पर आई। किधर जाणा नस नस के। नहीं धरनी बीच गडवाई। देवां कूकरां ते तुड़वाई। पी तूँ पिआला मीरांबाई। मारूं दस दस के। जे जांणदे असीं तेरी सार। देंदे जमदी नूँ मार। कीता सप जहिरी हुशियार। गिआ डस डस के। मन अजे वी तूँ तां कहणा। जे जिंदी जग पर रहणा। छड साधां दा तूँ बहिणा। मन लै हस हस के। लैंदी उस दा ही तूँ नाम। जिस दे नाम किआ बदनाम। की नफा जपे तूँ राम। मर गए बस बस के।
मीरांबाई को मानसिक रूप से प्रताड़ित, करता हुआ भाई कहता है कि, मीराँ तूँ जहर के प्याले को नहीं पिया तो तुझे तीर कस कस के मारूंगा, फिर भी नहीं मरी तो तलवार से पछ पछ कर के अर्थ धीरे धीरे शरीर को तलवार से थोड़ा थोड़ा कर के काटूँगा, तूँ ने ये किस प्रकार की बुड़ बुड़ लगाई हुई है? किस का ध्यान लगा रही है? अब तो तेरी मौत सिर पर मंडरा रही है, अब तूँ भाग कर कहाँ जाएगी? अगर जहर का प्याला नहीं पिया तो धरती के बीच गॉड दूंगा, खूनी कुत्तों से नोचवा दूंगा, मीराँ प्याले को पी ले नहीं तो लोगों को दिखा कर, दिखा कर मारूंगा। यदि हम तेरी वास्तविकता को जान जाते तो जन्म लेते समय ही तुझे मार देते, हम ने तो खुद ही जहरीला सांप तैयार कर लिया है, जो हमें बार बार दंश मारता गया। यदि तूँ संसार में जिंदा रहना चाहती है तो अभी भी तूँ मेरा कहना मान ले, साधों के साथ उठना बैठना छोड़ दे, मेरे इस कथन को हंस हंस कर मान ले। तूँ अब भी उसी का नाम ले रही है, जिस के नाम ने हमें अपमानित किया है, उस का राम राम जपने से क्या लाभ? सुख से जीवन बिताने वाले कितने लोग, गुरु रविदास के कारण मर गए हैं।
मीराँबाई के भाई के कथन से स्पष्ट होता है कि, उन दिनों जिन लोगों ने, चमार गुरु रविदास जी के साथ चलने का प्रयास किया था, वे ना जाने, कितने बेमौत, जात अभिमानियों ने कत्ल किये थे।
।। शब्द जिला।।
पीता पिआला सबर दा पहिलां, हुण तूँ पलादे जहर दा। धिआँ पुत्रां नूँ मापे मारन, वेला आया कहर दा। जे साधां दे सी जांदी। तुहाडा की सी गुआंदी। सोहम सोहम नाम नूँ धिआँदी। जोर पाया बैर दा। जिह नूँ आखो जात चमार। तूँ की जाणों तां उस दी सार। करदा भव समुन्द्रों पार। बेड़ा भरिया लहर दा। तुसीं देवो जातां दी दुहाई। किहड़ी रव ने बनाई। ऐथे तां सराह दा कहिणा नाहीं। वसणा बेगम शहर दा। किहड़ी दिती जात पलटि। पी लऊं पिआला गटा गटि। आह लै चक लिआ है झटा झटि। पिआला पी लऊं जहर दा।
मीरांबाई, अपने सब्र को तोड़ती हुई, भाई को डांटती हुई कहती है कि, इससे पहले मन मारती रही, सब्र का प्याला पीती रही मगर अब तूँ जहर का प्याला पिलादे। अब तो ऐसा प्रलय का समय आ गया है कि, माता पिता अपने ही बेटों बेटियों को जान से मार रहे हैं। यदि मैं साधु और संतों के पास जाती थी तो आप सब का क्या नुकसान करती थी? मैं तो सोहम सोहम शब्द का ही जाप करती थी मगर आप ने दुश्मनी को ही बढ़ाया है। जिसे तुम चमार कहते हो, उस के गुणों के बारे में आप क्या जानो, भयंकर लहरों के बीच फसे हुए बेड़े को वही समुन्द्र से पार करते हैं अर्थात किनारे लगाते हैं। तुम तो जातियों के गीत गाते हो, ये कौन सी भगवान ने बनाई हुई हैं? यहां सराह की बात नहीं, अगर जीना है, तो केवल बेग़मपुरे का ही है। मैंने कौन सी जात बदल दी? लाओ जहर का प्याला में गटागट पी लूंगी। ये लो मैंने झटपट उठा लिया और आप का जहर का प्याला पी लेती हूँ।
मनुबाद के काले नियमों ने, केवल शूद्रों को ही, बलि का बकरा नहीं बनाया हुआ है, अपितु सवर्ण जाति के लिए अभिशाप बन कर कहर बरसाया है, कितने ही अंतर्जातीय विवाह करने के कारण, सवर्ण मासूम युवक और युवतियों को ब्राह्मणवाद, अजगर की तरह निगल गया है। ये मनुवादी अपने ही बेटों और बेटियों को जातीय स्वाभिमान के लिए, खुद ही मौत के घाट उतार चुके हैं। जब तक जातीयता का मॉन्स्टर मर नहीं जाता तब तक भारत में कोई भी बेगम नहीं रह सकता और ना ही भारत बेगमपुरा बन सकता है।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
नबंबर 01,2020।
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