गुरु रविदास जी का कथन, करनी-भरनी ही पड़ती।।

।।गुरु रविदास जी का कथन, करनी-भरनी ही पड़ती।।
गुरु रविदास जी यथार्थवादी, क्रान्तिनायक और क्रांतिकारी समाज सुधारक हुए हैं, जिन्होंने पांच हजार सालों से चले आ रहे, वेदों, मनुस्मृतियों उपनिषदों, ब्राह्मण ग्रँथों और ब्राह्मणवादियों के काले कानूनों को ललकारा, फटकारा, दुत्कारा और उनके पाखण्डों, आडंबरों को झूठा सिद्ध किया। ब्राह्मणवाद की जड़ों को खोखला किया और नेशतनाबूद भी किया था। स्वर्ग नरक जन्म मरण के झूठे प्रपंचों को तर्कहीन सिद्ध किया और सँगत को कर्म की ओर उन्मुख किया। गुरु रविदास जी ने स्वर्ग-नरक, जन्म-मरण, पुनर्जन्म को ब्राह्मणों की काल्पनिक खोज सिद्ध किया हैं ताकि शासक वर्ग और निरीह सँगत ब्राह्मणों के काल्पनिक जाल से बाहर निकल कर, सुकर्म कर के, वर्तमान में सुख की सांस ले कर जियें। स्वर्ग नरक के मानसिक आतंक को खत्म किया जाए। कर्म की महत्ता बता कर, सँगत को अच्छे सुकर्म करने के लिए तैयार किया जाए। गुरु जी नरक के भय से मुक्त करते हुए समझाते हैं कि, करनी का फल भरना पड़ता है, स्वामी ईशरदास जी महाराज के शब्दों में, वे गुरु आदि प्रगाश ग्रँथ के पृष्ठ संख्या 399-400 पर लिखते हैं :-----
                      ।।शलोक।।
जैसी करनी, भरनी तैसी शुभ अशुभ जो करम कमावें। भन रविदास मंद करम का उड़क नूँ फल मंदा पावें। छल छिद्र कर कोट बिघन कर पाप करम तेरे अगे आवे। ईश को दोष ना अवर को दोष ना सुण रविदास कीता पावे। जाहर जुलम कर सभ जन जाने, गुप्त जुलम साईं पहचाने। सुण रविदास कबहूँ ना छपनी अनल तृण जियूँ है परगटांने। घर किसे ना घात कमाई पृथमे बीतस नाल जो तेरे। सुण रविदास खून छुपाइये विच पताली हो प्रगटे रे। जियूँ कर बिंजन जहर मिला कर दीन्हीं फकराँ खा मर जाए। कन्त सुत मर गए अबला घर दे सुण रविदासा किया निज पाई। लूंबड़ सिंघ नूँ खर को फड़ावे पिरथम ऊँन की मीच हो आई। अवर्ण के जे इक कर काटे अपने दोवें कर लै कटाई। जोतिषी भूप की कन्या कारण जियूँ  कर भालू ग्राम में आया। सुण रविदास फरेब चतराई कीता अपना जरूर हूँ पाया। बारवधू सुआ खंभ तुड़ावत उनका बदला शीश मुंडाई। सुण रविदास सिर मुंह काला गरधब चढ़ मध शहर फराई। जाहर जुलम भूले तुझ ते नाहिं अचेत पाप ते रही तूँ डरदा। सुण रविदास लँघ दीर्घ दी अदालत साईँ कलहु करदा। छडदे बदियाँ कर लै बंदगी साध सँगत की कर सतिसँगा। सुण रविदास चंगे करम कर पाई मोक्ष सुंन नासंगा।
गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, मानव जो जो अच्छे और बुरे कर्म करता है, उन्हीं कर्मों के अनुसार वैसा वैसा ही करना और भरना पड़ता है। गुरु रविदास जी कहते हैं कि, मंदे अर्थात बुरे कर्म का फल बुरा ही मिलता है। दूसरों के कार्यों में रुकाबट डाल कर और छलकपट करके जो पाप किये जाते हैं, वे सभी करने वाले की आंखों के सामने आ ही जाते हैं, जिस का ना तो ईश्वर को और ना ही किसी अन्य को दोष नहीं दिया जा सकता है, केवल अपना किया कर्म ही प्राप्त होता है। जो अपराध सरेआम किया जाता है उसे तो सब जान जाते मगर जो अपराध गुप्त ढंग से, छुपा कर किये जाते हैं, उन्हें मालिक जानता है।गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, जब तिनकों को आग लगती है, तब  वह किसी से छुपाने पर भी छुपती नहीं है। किसी भी घर के आदमी से घात लगाकर, अनीष्ट नहीं करना चाहिए, अन्यथा तेरे साथ सब से पहले वैसा ही बीतेगा। गुरु रविदास जी फरमाते हैं, हे पाप कर्म करने वालो सुनो! बेशक आप पाताल में भी जा कर छुप जाओ,  वहां भी आप के पाप कर्म प्रकट हो ही जाते हैं। जिस प्रकार, भोजन में जहर मिला कर, फकरों और साधु संतों को मारने के लिए दिया गया था, उससे पूर्व ही उस औरत के पति और पुत्र मर गए थे। गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, अपने किये का फल अवश्य मिलता है। शेर को  खाने के लिए लोमड़ी बन्दर को पकड़ाती है, परन्तु पहले उसी की ही मौत आती है। जो दूसरों को मारने के लिए, एक अंग को काटने का दुष्कर्म करते हैं, उन के तो दोनों ही हाथ पहले ही कट जाते हैं। ज्योतिषी की लड़की के कारण, जब भालू गांव में आया था, गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, जो फरेब और चतराई उसने की थी उस के कर्म का फल उसे जरूर मिला। जो लोग तोते के पंख तोड़ते है, उसके बदले में उन्हें शीश मुंडा कर, मुंह काला करवाना पड़ता है और लोग उन्हें गधे पर बैठाकर शहर में घुमाते हैं। हे प्राणी! जग जाहिर जुल्म कभी भुलाए नहीं जाते और फिर तूँ गुप्त पापों से डरता रहंता है। गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, सर्वोच्च अदालत में हाजर होना पड़ेगा, वहां साईँ अर्थात आदपुरुख दूध का दूध पानी का पानी करेगा, इसीलिए तुम बुरे कर्म छोड़ कर अच्छे कर्म करो, साहिब की बन्दगी करो, साधु संतों की सँगत में बैठ कर सत्संग सुनो। निःसंकोच होकर अच्छे कर्म करो, तभी जीवन सुखी होगा अन्यथा, इसी धरती पर आदि व्याधियां शरीर को नरक बना देंगी। इसी धरती पर स्वर्ग और नर्क है, दूसरी कोई जगह नहीं है, जहां कर्म का फल भोगना पड़ता है।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्मी मंडल।
अक्टूबर 16, 2020।

Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

।।राम बिन संशय गाँठि न छूटे।।