गुरु रविदास जी और शूरवीर की पहचान।।

।।गुरु रविदास जी और शूरवीर की पहचान।।
गुरु रविदास जी क्रांतिकारी शूरवीर योद्धा हुए हैं जिन का कोई भी, हिन्दू मुसलमान ज्ञानी, ध्यानी साम्य, नहीं कर सकता था, क्योंकि पाठशालाओं और मदरसों में पढ़ने वाले लोग केवल, पूर्वजों की लिखी अतार्किक, मनोवैज्ञानिक पुस्तकों को पढ़ कर, केवल धर्मांध पण्डे, पुजारी और मौलबी ही बनते थे, इसीलिए, इन लोगों के साथ किसी भी प्रकार की धार्मिक, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक चर्चा नहीं की जा सकती थी, मगर इन्हीं अधूरे ज्ञानियों ने गुरु रविदास महाराज के नाक में दम कर रखा था, जिसके कारण गुरु रविदास जी ने अपना शिकार, पोंगापंथियों, तिलकधारियों, पुजारियों, मौलवियों, मुल्लों और राजाओं, महाराजाओं और बादशाहों को ही सब से अधिक बनाया था, इन सबसे वाकयुद्ध करने के लिए, दैवीय शक्ति चाहिए थी, वह केवल उन्हीं के पास थी जिस का उन्होंने कभी भी किसी को अहसास तक नहीं होने दिया था। उन्होंने अपनी मूलनिवासी सँगत को, धार्मिक, मानसिक और शारीरिक रूप से शूरवीर बनाने के लिए प्रेरित  किया और शूरवीरों की पहचान भी बताई है। वे फरमाते हैं कि शूरमा कौन होता है:----
                  ।।धनाक्षरी छंद।
सूरमा ना होवे फड़ टेंगा संगराम करे, सूरमा ना होवे जंग खेत में कराई के। सूरमा ना होवे हथियारां नूँ लगाई कर, सूरमा ना होवे हथियार को चलाई के। सूरमा ना होवे डंड पेल पहलवान माहे, सूरमा ना होवे पहिलवान नूँ ढाई के। कहित दास सोई सूरमा है जग मध, मन हूँ को मार इक नाम को धिआइ के।
गुरु रविदास जी शूरवीर की पहचान बताते हुए कहते हैं कि, हाथ में हथियार ले कर,हथियाबन्द हो कर रणक्षेत्र में युद्ध करने वाला ही शूरवीर नहीं होता, ना ही युद्ध में हथियारों को लगा कर और चला कर, पहलवानों की तरह पहलवान को हरा कर होता है, असली शूरवीर वही होता है जो मन को वश में कर के, सत नाम का ध्यान करता है, अर्थात जो मन को अपने अधीन कर लेता है, वहीं सभी प्रकार के, ज्ञान हासिल कर सकता है।
                       ।।1।।
सूरमा ना होवे छड देश विदेश जाई, सूरमा ना होवे लख वणज कहाई के। सूरमा ना होवे जित राजिआं अधीन कर, सूरमा ना होवे जग हुकम मनाई के। सूरमा ना होवे माया राज नूँ त्याग कर, सूरमा ना होवे माया राज नूँ बधाई के। कहित दास सोई जग मध मनहुँ को मार इक नाम को धिआइ के।
गुरु रविदास जी महाराज फरमाते हैं कि, जो आदमी अपने घर को छोड़ कर, देश विदेश में जा कर, बेहिसाब वणज व्यापार करके व्यापारी कहलाए, जो राजाओं, महाराजाओं को फतेह करके, जीत कर संसार के ऊपर अपना हुकम चला कर और हुकम मनवाए, वह भी शूरवीर नहीं होता है जो, माया मोह और राजपाठ को त्याग कर और बढ़ा कर भी कोई शूरवीर नहीं होता है। गुरु जी फरमाते हैं कि, विश्व में वही शूरवीर होता है जो अपने मन को वश में कर के, सतनाम का ध्यान करता है।
                   ।।2।।
सूरमा कबीर सेवा साधुआँ दी रोज कर, कमाल कुर्वान समन मूसन वांगूं लाई के। नामदेब सूरमा जिवाई गाई छंन बंध, बहतर बार दरशन हरि जी का पाई के। धंना जट सूरमा पाहन मध हरि कढ कराई  कंम किरखी दे धेन नूँ चराई के। कहित दास सोई सूरमा है जग मध, मनहुँ को मार इक नाम को धिआइ के।
गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, सच्चे शूरवीर तो कबीर साहिब हुए हैं जिन्होंने आजीवन साधु, सन्तों की सेवा की और अपने बेटे कमाल को भी छाती पर पत्थर रख कर कुर्वान कर दिया था। शूरवीर नामदेब जी हुए हैं जिन्होंने मरी हुई गाय को जीवनदान दिया था, जिन्हें भगवान ने बहतर बार दर्शन दिए थे। धन्ना जाट शूरवीर हुए जिन्होंने पत्थर को चीर कर, भगवान से कृषि और खेतीबाड़ी का काम ले कर, उन से अपनी गऊएं करवाईं। गुरु जी कहते हैं कि शूरवीर वही होता है जो मन को वश में कर के, सतनाम का ध्यान करता है।
                   ।।3।।
श्री रविदास होइ सूरमा जहान मध, पथरां नूँ तार चार वरण निंवें आईं के।श्री गुरु नानक जी सूरमा जहान बीच तारिया जगत सतनाम नूँ जपाई के। सूरा पूरा मोमन मुहम्मद पियंबर जो कीह्नी अल बंदगी ईमान नूँ रखाई के।कहित दास सोई सूरमा जग मध मनहुँ को मार इक नाम को धिआइ के।
स्वामी ईशरदास जी फरमाते हैं कि, संसार में शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज हुएहैं, जिन्होंने पानी में पत्थरों को तार कर, चारों वर्णों के लोगों को अपने चरणों पर झुकाया। संसार में, सतनाम शब्द को जपा कर, जनता का कल्याण कर, गुरु नानकदेव सूरमा हुए। संपूर्ण शूरवीर अल्ला की बन्दगी कर के पैगम्बर मुहम्मद हुए, जिन्होंने भी ईमान को रखा। स्वामी ईशरदास दास फरमाते हैं कि, संसार में वही सूरमा हुआ है, जिस ने मन को मार कर अर्थात मन और  इंद्रियों को वश में कर के, नाम का ध्यान किया है, इसी शक्ति से ही ज्योतिर्ज्ञानी, हो कर मानव सर्व शक्तियों का मॉलिक बन कर, सांसारिक युद्धों को जीतता है। कोई भी उसे हरा नहीं सकता। गुरु रविदास जी महाराज, सतगुरु  नामदेब जी , गुरु नानकदेव जी, सरगुरु कबीर साहिब जी, सतगुरु धन्ना जी, सतगुरु सेन जी, सतगुरु सदना जी महाराज ऐसे ही शूरवीर योद्धा हुए हैं जिन्होंने मन को वश में किया था और बड़ी बड़ी जंगें जीती थी जिन से राजे, महाराजे और बादशाह भी पराजित हो कर, उन के चरणकमलों पर झुके थे।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदधर्म मंडल।
अक्टूबर 11, 2020।

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