गुरु रविदास के वैश्विक आदिधर्म को अपनाने का समय आ गया है।

।।गुरु रविदास के वैश्विक आदिधर्म को अपनाने का समय आ गया है।
गुरु रविदास जी, विश्व शान्ति दूत बन कर आए थे। धर्मों के ठेकेदारों ने, समूचा विश्व, इस्लाम, बौद्ध,यहूदी, हिन्दू जैनी, पारसी और क्रिश्चियन धर्मों के कुचक्र में उलझा दिया गया था, जिन्होंने मॉनवता को भी बुरी तरह से खंडित करके, चीथड़े-चीथड़े कर के, खंड-खण्ड कर के, मानव को एक दूसरे का हत्त्यारा ही नहीं एक दूसरे के खून का प्यासा बना रखा था। धर्म के नाम पर संकीर्ण मानसिकता के शिकार, शासक अपने धर्म की ध्वजा को लेकर, विश्व में शासन करने की होड़ में, अंधाधुंध इंसान का खून बहाते जा रहे थे, धर्म के नाम पर कट्टर ईसाइयों और मुसलमानों ने धरती को मानव जाति के से लहू लुहान कर दिया था, मगर ये सभी शासक भी, धर्म के ठेकेदार ही बने हुए थे। इस्लाम और क्रिश्चियन दोनों धर्म तो दूसरे देशों को अपने अपने धर्मो के मकड़ जंजालों में जकड़ने के लिए, खून की नदियाँ  बहा रहे थे, मगर भारत के ही हिन्दू तो, अपने ही देश में, अपने हिन्दू धर्म के लिए अपने ही मूलनिवासियों का खून बहाते जा रहे थे, जबकि ये विदेशियों के सामने भीगी बिल्ली बने हुए थे। जब इस्लाम की धारदार तलबार, दिन रात हिंदुओं के जनेऊ छाती से, उतार रही थी, तब ये हिन्दू धर्म के योद्धा चूहों के बिलों में जान बचा रहे थे, ऐसे ही विकट समय पर, अगर खूनी और खूंखार तलवार को रोका तो केवल शांति के अग्रदूत, गुरु रविदास जी महाराज ने। इसीलिए गुरु जी महाराज ने कहा:----
आद से प्रगट भयो, जा को ना कोउ अंत।
आदधर्म रविदास का, जाने बिरला सन्त।गुरु रविदास जी ने, सभी धर्मों के मूल को परिभाषित करके, सभी की निःसारता को सँगत के समक्ष प्रस्तुत किया और अपनी मानवीय सोच को जन जन तक पँहुचाने का जोखिम उठाया मगर ब्राह्मणों को, जहां उनका जी जान से, साथ देना चाहिए था वहीं उनकी टांगें खींचना जारी रखीं हुई थी, अकेले गुरु जी इस्लाम को नकेल डाले जा रहे थे, वहीं ब्राह्मण गुरु रविदास जी को, मुस्लिम बादशाहों के पास, उन के जन आंदोलन को रोकने के लिए, उन्हें जेल में बंद करने के लिए मुखबरियाँ करते फिरते थे, जो पीर, ब्राह्मणों के जनेऊ उतारने के खिलाफ जंग लड़ रहे थे, उन्हीं को ब्राह्मण बादाशाहों के दरवारों में पेशियां भुगतने के लिए, झूठे आरोपपत्र देकर, अपनी मूर्खता का इजहार कर रहे थे।
भारतवर्ष में, आदिकाल से, आदिपुरुष से लेकर चँववंश का शासन चलता आ रहा था। विदेशी लेखक कर्नल टॉड ने हिस्ट्री आफ राजस्थान में लिखा है कि,भारत में चँववंश का ही राज चलता आ रहा था। डाक्टर हमीदा खातून ने भी लिखा है कि, इस्लामिक शासन से पहले, भारत में चरम कर्म कोई शब्द नहीं था, कोई चमार और सफाई कर्म करने वालों की जाति नहीं थीं। केवल मुसलमान बादशाहों ने ही भारत में, चर्म कर्म को, बढ़ावा दिया था और चर्म उद्योग को बुलंदियों तक पहुँचाया था, मगर गुरु रविदास जी को, हीन शब्द के रूप में चमार शब्द को ईजाद तब किया गया था, जब ब्राह्मणों ने, गुरु रविदास जी की झूठी मुखबरियाँ मूर्ख बादशाहों के पास की थी, जिसके कारण, सब से पहली बार ये शब्द अज्ञानता के कारण ही, बादशाह सिकन्दर लोदी ने गुरु रविदास को प्रयोग किया था। भारत के शासक वर्ग को, ब्राह्मणों के छल कपट ने ग्रहण लगबाया हुआ था। लगभग एक हजार वर्षों तक, इस्लाम ने भारत में खून बहाया, दो सौ सालों तक ईसाइयों ने भी भारत में धर्म के नाम पर खून बहाया। आज फिर वही इतिहास दोहराया जा रहा है, विश्व के देश खाड़ी में पुनः अपने अपने युद्ध पोतों को तैनात कर के मॉनवता को शर्मसार करके, खून की नदियां बहाने के लिए तैयार हैं।
धर्मों के नाम पर खरवों रुपयों को मंदिरों, मस्जिदों और चर्चों पर खर्च करके, बेकार युवाओं के पेट पर लात मारी जा रही है, बेकारी के कारण युवा आत्महत्या करते जा रहे। अच्छी शिक्षा के मन्दिरों के स्थान पर धार्मिक उन्माद पैदा करने वाले अड्डे बनाए जा रहे हैं। अच्छे अध्ययन के लिए शिक्षा संस्थानों की जगह धार्मिक पागलों के लिए धर्मस्थल बनाए जा रहे हैं। जो धन अच्छी शिक्षा देने के लिए खर्च किया जाना चाहिए था, वह अरबों रुपयों से मिजायल, कोपटर राकेट लांचरों और सैनिकों पर खर्च किया जा है, ये साजो सामान केवल मानव जाति को खत्म करने के लिए ही तैयार किया जा रहा है, इंसानों को खत्म करने के लिए खर्च किया रहा है, समस्त प्रकृति के जीव जगत को समाप्त करने के लिए खर्च किया जा रहा है।
अरबों खरबों रुपये सैन्य बलों, सैन्य मानव मारक सामग्री, मिजायल, राकेट लाँचरों, हेलीकॉप्टरों, टैंकों, गाड़ियों, गोला बारूद पर सभी सरकारें खर्च कर रहीं हैं। किस लिये खर्च कर रहीं? किस लिए हर समय सीमाओँ पर एल ओ सी रेखाएं बनाई गई है? क्यों हररोज माताओं के लाल सीमाओँ पर भेज कर शहीद करवाए जा रहे हैं? कभी कोई शासक नहीं सोचता, कभी मन में तरस नहीं करता कि, कहीं मेरा भी बेटा सीमा के ऊपर मरे, जले, अंग-अंग कटे, चमड़ी के तश्में बना दिए जाएँ, तब मन पर क्या बीतेगी? कभी कोई भी शासक कभी चिंतन नहीं करते, तानाशाह भी किस मौत मरते हैं वह भी याद नहीं रहता है। इन सभी कारणों के पीछे केवल अनेकों धर्म, अनेकों शासक और अनेकों एलओसी रेखाएं है, इसी कारण गुरु रविदास जी ने, वैश्विक सरकार की बकालत की थी, एक "वैश्विक आदिधर्म" की नींव रख कर, विश्व धर्मग्रंथ, "पोथी साहिब" ग्रँथ की रचना की थी।
आज विश्व का प्रत्येक शासक ईर्ष्या-विद्वेष की अग्नि में भष्म हो रहा है, विश्व शक्ति बनने के कुचक्र में आदिपुरुष के अस्तित्व को भूल चुका है, प्राणिजगत के विनाश को भूल चुका है, जिस का मूल कारण विश्व का एक धर्म का ना होना ही है, जिस की आज नितांत आवश्यकता है। आज सभी राष्ट्राध्यक्षों को तत्काल अंतराष्ट्रीय सम्मेलन बुला कर, वैश्विक सरकार बना कर, विश्व के लिए एक ही वैश्विक धर्म, "आदिधर्म" स्वीकार कर लेना चाहिए, तभी विश्व में शान्ति स्थापित होगी।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
सितंबर05,2020।

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