गुरु रविदास, वाल्मीकि, नामदेब, कबीर, गुरुओं के मन्दिरों में ही अर्चना हो।
।।गुरु रविदास, वाल्मीकि, नामदेब, कबीर गुरुओं के मंदिरों में ही अर्चना हो।
गुरु रविदास जी ने सर्व समाज के हित में ही आजीवन संघर्ष किया, भारतीयों की सुख समृद्धि के लिए ही नहीं अपितु सारे ज्योतिर्मंडल में उन्होंने बेगमपुरा स्थापित करने की वैश्वक योजना तैयार की हुई थी, जिस के लिए गुरु रविदास जी ने अपने शिष्य गुरु कबीर, नानकदेवजी, नामदेव जी, सेनजी, सधना जी के साथ मिलकर ही रोड मैप बना दिया था। सारे विश्व के लिए धर्मग्रंथ "पोथीसाहिब" तैयार कर के "वैश्विक आदिधर्म" भी घोषित कर दिया था।
गुरु जी ने, मॉनवता की रक्षा के लिए ही आजीवन संघर्ष किया, हिंदुओं के जनेऊ उतारने बन्द कराए, मुसलमान बनाना बन्द कराए, छोटी छोटी बच्चियों के वालविवाह मुस्लिमों से भय से किये जाते थे, जिन्हें गुरु जी ने बन्द कराया, भारत में सभी की सुख समृद्धि और सुरक्षा के लिए बादशाहों को विवश किया, ब्राह्मणों के कत्लेआम रुकवाए, राजाओँ को राजाओं के साथ मधुर संबंध स्थापित करने के लिए, मधुर वाणी में समझाया और आपस में रक्तपात, खून खरावा करना रुकवाया मगर इसके बाबजूद भी मनुवादी लाइन पर नहीं आए और गुरु जी के वहुजन समाज के ऊपर अत्याचार बन्द नहीं किये। सिखों को एक आदर्श "गुरु" नानकदेव दिया जिसने, सिख धर्म की आधारशिला रखी, जिनके पथ पर चल कर भावी सिख गुरुओं ने, हिंदुओं के खिलाफ किये जाने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की, और गुरु तेग बहादुर जी ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश तक भी कुर्वान कर दिया, गुरु गोविंदसिंह जी ने खलसा पंथ का सृजन किया, इतना सब कुछ करके भी हिन्दू और सिख, गुरु रविदास जी महाराज को गुरु की मॉन्यता नहीं देते आए हैं। गुरु जी की शोभायात्राओं में, शामिल होने से परहेज करते हैं, उनके सत्संग सुनने से भी परहेज करते हैं, उनका नाम लेना तक उचित नहीं समझते, अछूतों को अमृत छकाते समय भी, सिख यहाँ तक कहते हैं कि आप गुरु रविदास का नाम नहीं लेंगे। गुरु जी की मूर्तियों को तोड़ देते, मोदी सरकार ने, गुरु रविदास जी और बादशाह सिकन्दर लोदी के इतिहास को खत्म करने के लिए, दिल्ली स्थित गुरु रविदास मंदिर तुग़लकावाद को, दस अगस्त 2019 को हजारों पुलिस बलों से गिरवा दिया गया, जिसके लिए हम सब ने लंबा संघर्ष किया, गुरु रविदास मंदिर पुनर्निर्माण संघर्ष समिति बना कर, सरकार को विवश किया कि मंदिर वहीं बनाने के लिए, जमीन दी जाए, मैंने संघर्ष समिति के महासचिव के रूप में, मीडिएटर श्री दुष्यंत गौतम की, गुरु रविदास विरोधी नियत को बुरी तरह से फटकारा था, वह बार बार आल्टरनेटिव जमीन की वकालत कर रहा था, जब मैंने उसे चिल्ला कर कहा, कि तुग़लकावाद की जमीन में गुरु रविदास जी का पवित्र सरोवर है, जिस में कई कोहड़ी नहा कर, कोहड़ से मुक्त हो गए थे, आज भी चमड़ी के रोगी इस तालाब की मिट्टी शरीर को मल कर अपनी चमड़ी के रोगों से निजात पाते हैं। गुरु रविदास महाराज का सिकन्दर लोदी से जुड़ा हुआ इतिहास है इसी तुग़लकावाद की धरती से जुड़ा हुआ है, क्या ऐसी पवित्र धरती दिल्ली में कहीं है तो देदो, मगर याद रखना, हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के संतोषगढ़ कस्बे के गुरु रविदास मंदिर को चब्बा ब्राह्मण परिवार ने जबरन सुप्रीमकोर्ट के माध्यम से लिया था, वह सारा सात सदस्यों का परिवार 2009 को इकठ्ठा मर गया था और जिस ड्राइबर ने, रात के चार बजे, मंदिर की दीवार को जे सी बी से टक्कर मारी थी, वह तो 13 अप्रेल 2005 को ही गुरु रविदास चौक नंगल में हुई दुर्घटना में दोनों टांगे गंवा चुका है, जिन जजों ने ये फैसला सुनाया था, वह भी मर गए थे, इसलिए जो तुग़लकावाद केस में छलकपट करेंगे वे भी मारे जाएंगे, तब भी मिस्टर गौतम ने दो सौ गज जमीन की ही सिफारिश की, मगर सुप्रीमकोर्ट ने गुरु रविदास के भय से चार सौ गज, वही जमीन दी जहां गुरु जी का मंदिर था। इस छलकपट के एवज में दुष्यन्त गौतम को अभी अभी राज्यसभा का सांसद भी बना दिया मगर गुरु रविदास जी महाराज किसी भी अन्यायी और धोखेबाज को बख्शेंगे नहीं। इस ऐतिहासिक जमीन को कांग्रेस सरकार ने ही दिल्ली प्राधिकरण को दिया था, कई वर्षों तक कोर्ट में केस लड़ा मगर कोर्ट ने भी न्याय नहीं किया।
ब्राह्मणवादी सरकारें अंदरखाते एक ही हैं, ये मूलनिवासियों के साथ तो भेदभाव करते ही हैं मगर हमारे देवताओं से नफरत करते हैं, जिस कारण हम सभी मूलनिवासियों को भी, अपने गुरुओं, सतगुरु रविदास जी, सतगुरु कबीर साहिब, सतगुरु नामदेब जी, सतगुरु सेन, महाऋषि वाल्मीकि जी के ही मंदिरों में जा कर पूजा अर्चना और चढ़ाबा चढ़ाना चाहिए, हमें किसी भी ब्राह्मणवादी मंदिर में कतई भी नहीं जाना चाहिए।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
सितंबर 07, 2020।
Comments
Post a Comment