गुरु रविदास के सेवकों की परेशानियां।।

।।गुरु रविदास के सेवकों की परेशानियां।।
गुरु रविदास जी की शक्ति के सामने गुरु नानकदेवजी ने कभी अपने आपको उच्च नहीं माना था, गुरु अर्जुनदेव जी महाराज ने गुरु रविदास जी को सर्वोच्च गुरु स्वीकार किया है फिर जिन्होंने सिखधर्म के गुरु ही नहीं अवतार गुरु नानकदेव जी को बनाया, उन्हीं के सिख, गुरु रविदास जी को, भगत लिखें और कहें, क्या ये न्यायसंगत है? जब मैं, 2008 में गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ ट्रष्ट आनंदगढ़ का महासचिव चुना गया तब मुझे पहली बार, स्टेज को हैंडल करते समय अनुभव हुआ कि, गुरु रविदास जी के, जीवन चरित्र को जिस ढंग से, सिखों ने दर्शाया है, वह गुरुओं के गुरु रविदास जी से अन्याय है। जब वहां सन्त सम्मेलन में, पंजाबी जत्थे गुरु रविदास जी के, शब्द गाते थे और उसमें गुरु जी को जूतियाँ गंडें कहें, तो मुझ से बर्दास्त नहीं होता था मगर मैंने उन्हें स्पष्ट आदेश ही दे दिया, भाई यहां जूतियाँ गंडे गुंडे नहीं चलेगा, अगर गाना हो तो गुरु नानकदेव जी के "गुरु" को, गुरु पुकारना होगा अन्यथा यहां आकर, हमारा ही सिर और हमारी जूतियाँ नहीं चलेगी, तब सिख ढाडी जत्थे और रागी रागनों ने भगत शब्द कहना छोड़ा। जब मैंने गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ साहिब का, 2009 में हिंदी अनुवाद पूर्ण किया था और अपने सहयोगी अक्षय जी, अशोक कुमार, सन्त राम मूर्ति, नानक सहोता, तरसेम सहोता, मदन लाल बैंस, ज्ञान चन्द की सहायता से, गुरु आदि प्रकाश ग्रँथ के हिंदी संस्करण का 2010 में विमोचन किया तब भी, आग भड़काने वालों ने अखवारों में छापा कि, स्वामी ईशरदास जी महाराज के आनंदगढ़ डेरे में नए ग्रँथ, का प्रकाश किया गया है, जिस की बड़ी बड़ी खबरें अखबारों में छापी गई और गुरु द्वारा प्रबंधक कमेटी का प्रधान मक्कड़ बड़ा भड़क उठा और हमें नोटिस तक सर्व कर दिया, जब हमने अपने वकील से उसे जबाब भिजवाया तब वह शांत हुआ। मुझे समझ नहीं आता कि जब कोई धार्मिक काम करे, तो फिर कोई अहंकार, दादागिरी क्यों दर्शाए। जब गुरु रविदास जी गुरु नानकदेव जी के गुरु हैं, तब गुरु रविदास क्यों नहीं पुकारते? उनके शिष्य को तो ये घमण्डी लोग, गुरु पुकारते, मगर उनके गुरु को भगत, ऐसा क्यों? कमी किसी और की नहीं रही, हमारे लेखकों, गीतकारों और गायकों की ही रही है, जो गुरु रविदास जी को भगत लिखते, गाते और सुनते रहे, ब्राह्मणवादी जाटों को, गुरु रविदास जी को भगत कहते हुए सुनते रहे। हम किसी भी धर्म संप्रदाय के भगत को भी भगत ना कह कर, आदर से गुरु ही पुकारते हैं, फिर हम ये बिलकुल बर्दास्त नहीं करेंगे, कि कोई गुरु रविदास जी को भगत कहे या कहने की हिमाकत करे, उसके लिए हमें कोई भी बलिदान देना पड़ेगा, देने से पीछे नहीं रहेंगे, कोई अब 1947 वाला युग समझ कर, हमें धमकाने की भी हिमाकत ना करें। इसी अति गंभीर समस्या पर, पंजाब के प्रोफेसर लालसिंह जी ने अपने शोध काव्य, "आदिधर्म बनाम विश्व धर्मग्रंथ आदि पोथीसाहिब दे सिरजक सतिगुरु रविदास जी" के संख्या पृष्ठ 20 पर लिखते हैं कि, ""गुरु आदि प्रकाश ग्रँथ को प्रवान करने के विरोध में, अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुदुआरा प्रबंधक कमेटी की ओर से दी जा रही धमकियां जारी हैं "" जो बिल्कुल सही नहीं हैं। गुरु रविदास जी ने हिंदू धर्मग्रंथों को सिरे से रद्द कर के उनकी जगह अपनी पवित्र वाणी का ग्रँथ "पोथीसाहिब" तैयार करके सेवकों की आत्मिक उन्नति के लिए मुहैया किया है, फिर उनकी और अन्य महापुरुषों की वाणी के ग्रँथों की पूजा और उससे अगवाई नहीं ली जा सकती?
प्रोफेसर लालसिंह जी लिखते हैं कि, यह साबित हो चुका है कि, भगतों की वाणी गुरु नानकदेवजी के पास थी। क्या लगभग सौ साल बड़े गुरु रविदास, जिनकी महिमा और महत्व सारे संसार में था,वे खुद अपने शिष्य गुरु नानकदेव जी के आगे, तरले करते थे कि, उनकी वाणी भी लेलो? क्या गुरु नानकदेव जी ने सर्व प्रवान ""गुरु"" रविदास का और उनकी बजुर्गी का कोई सतिकार और साधु मॉन मर्यादा का कोई ख्याल नहीं रखा होगा और गुरु रविदास जी से अपने चरणों में मत्था टिकवाया होगा, ऐसा गुरु नानकदेव जी ने हरगिज़ नहीं किया है। अपने घर पर पहुंचे मेहमानों का साधु संतों की रिवायतों के अनुसार, गुरु रविदास जी महाराज ने, पूरा सम्मान सतिकार और उठ कर, गुरु नानकदेव को जी आयां कहा।
गुरु रविदास जी महाराज के मान सम्मान के खिलाफ घटिया और नीच सोच रखने वाले, धार्मिकता का आवरण, अपने मन पर चढ़ा कर, अपने आप को, भगवान की दृष्टि में गिराने का कार्य ना करें अन्यथा धर्म का चोला पहनना मात्र दिखावा होगा।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
अगस्त 27, 2020।

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