गुरु रविदास और आदिप्रकाश ग्रँथ की मान्यता के प्रमुख कारण।।
गुरु रविदास और आदिप्रकाश ग्रँथ की मॉन्यता के प्रमुख कारण।
गुरु रविदास जी महाराज के साथ, जिस किसी का हाथ स्पर्श हो जाता था, वह भी बहुमूल्य हीरा बन जाता था, जिसने भी गुरु रविदास जी की वाणी कानों से तनिक भी सुनी वह भी सुखी हो जाता था। बालक गुरु नानकदेव जी ने रास्ते से गुजरते हुए ही कानों से गुरु जी की वाणी "को बनजारों राम कू, मेरा टांडा लादिया जाई रे" को सुना था और उसी के कारण व्यापारी परिवार का बेटा व्यापारी ना बन कर, अवतार बन गया, फिर इससे बड़ा कौतुक देखने के लिए और क्या हो सकता? उस समय तो सत्संग के लिये काव्यात्मक, सुरीले, धुंन वाले शब्द नहीं थे मगर गुरु रविदास जी, ऐसी रचनाएं रच रहे थे कि, जिन्हें सुन कर नेचर भी कुछ पलों के लिए चलने से रुक जाती थी। गुरु नानकदेव जी जब गुरु रविदास जी के दर्शन करने कांशी गए थे, तभी वे, पवित्र चालीस शब्द और एक दोहा लिखकर ले आए थे, जिनका वे हररोज मधुर लय में गायन करते थे। कीर्तन करते थे, सत्संग करते थे, जिन्हें बाद में सिखों के कल्याणार्थ, जीवन को सफल बनाने के लिए, सबसे पहले, पूज्य गुरु ग्रँथ साहिब में शामिल किया गया था, उन्हीं गुरु रविदास जी महाराज को ग्रँथ साहिब में भगत लिख कर, जो अपमान सिखों ने किया है, उसे हम और हमारा समाज आज तक समझ नहीं पाए। गुरु रविदास जी ने सिखों को ऐसा भुलाया हुआ है कि, वे खालसास्तान की मांग करके, लाखों की संख्या में शहीद हो चुके हैं, जिस का ये लोग एहसास नहीं कर पाए है, अब इन्हीं के सहोदर भाई, हिन्दू! बाबरी मस्जिद, गुरु रविदास मंदिर तुग़लकावाद को गिराने के बाद, सवर्ण मंदिर को गिराने की योजना बना कर रहे है, जो हिंदुओं और सिखों को ले डूबेगी।
प्रोफेसर लालसिंह जी इन्हीं कारणों पर विस्तार से अपने शोध काव्य "आदिधर्म बनाम विश्व धर्मग्रंथ आदि पोथीसाहिब दे सिरजक सतिगुरु रविदास जी" के पृष्ठ 20 पर लिखते हैं, कि गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ के प्रवान करने के प्रमुख कारण इस तरह हैं:-- 1 गुरु ग्रँथ साहिब को, मानने वाले उच्च जातीय, सिख जाट गुरु रविदास जी को गुरु ग्रँथ साहिब की विचारधारा का वानी (Fonder) हरगिज प्रवान नहीं करेंगे, जबकि गुरु ग्रँथ साहिब के अनुसार, गुरु रविदास जी ही बानी (Founder) सिद्ध होते हैं।
2 प्रोफेसर लालसिंह जी 23 नबंबर 2007 को गुरु नानकदेव जी यूनिवर्सिटी अमृतसर विखे पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के संसार प्रसिद्ध विद्वानों की हाजरी में सिद्ध कर चुके हैं, कि गुरु ग्रँथ साहिब की विचारधारा के बानी (Founder) केवल गुरु रविदास जी ही हैं।
3 गुरु ग्रँथ साहिब को मानने वाले तो, गुरु रविदास जी को मानते ही नहीं हैं। गुरु रविदास जी महाराज को गुरु ना मानना गुरु गोविंदसिंह जी के हुकम का उलंघन है। श्री गुरु रविदास साधु संप्रदाय के लिए, गुरु रविदास जी ही सब कुछ हैं। इसलिए वे गुरु रविदास जी का अपमान किसी भी तरह सहन नहीं करेंगे। साधु समाज ने इस तथ्य को शिरोमणि गुरु गुरुदुआरा प्रबंधक कमेटी अमृतसर और अकाल तख्त साहिब तक अपनी आवाज पंहुचा दी है। गुरु ग्रँथ साहिब को मानने वाले लोग, इस तथ्य को स्वीकार नहीं करेंगे, जिस कारण साधु समाज को मजबूरन आदिप्रकाश ग्रँथ ही प्रवान करना पड़ेगा।
प्रोफेसर लालसिंह जी आगे लिखते हैं कि, आदिधर्म सर्व संसार में प्रबान और स्वीकार है, पर आदिप्रकाश ग्रँथ को प्रबान करने में समय चाहे समय लग सकता है, परन्तु इसे प्रबान करना मूलनिवासी शूद्रों, अछूतों और रविदास जी के अनुयायियों की ही नहीं, समूचे भारत के आदिवासियों की मजबूरी होगी।
भले ही कुछ सन्त अहंकारवश, सत्य से भटक गए हैं, मगर समय बड़ा बलबान होता है, जिसके सामने बड़े बड़े पीर पैग़ंबरों को भी झुकना पड़ा है, सन्त उन्हीं को कहते हैं कि, जो सँगत को सर्वोच्च मान्यता देते हैं, अगर सँगत नहीं तो कौन भगवान की पूजा अर्चना करेगा? कौन उस का नाम लेगा? मगर जनता का धन दौलत, जनता का दिया सम्मान कुछ थोथे लोगों को हजम नहीं होता है, जो बाद में साहिब के दरबार मे धक्के ही खाते हैं, जिससे बचने के लिये अपने आप को विनम्र दयालू बनना सन्तों का प्रथम चिन्ह है। जब ऐसे योग्य सन्त होंगे तभी गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ की अलौकिकता को समझ पाएंगे, सात सौ सन्तों और महापुरुषों को समझ सकेंगे और गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ को भी मान्यता दे सकेंगे, मगर मान्यता देनी ही पड़ेगी।
रामसिंह आदवंशी
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
अगस्त 26, 2020।
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