गुरु रविदास के आदिधर्म का समर्थन, विश्व साधु संप्रदाय ने क्यों किया?
गुरु रविदास के आदिधर्म का समर्थन विश्व साधु संप्रदाय ने क्यों किया।
गुरु रविदास जी ने आजीवन एक मूलमंत्र, एक वैश्विकधर्म, एक वैश्विक धर्मग्रंथ, एक वैश्विक सरकार की स्थापना के लिये ही अपने मन मष्तिष्क को केंद्रित कर रखा था, जिसमें वे पूर्ण सफल रहे थे। आदर्श बेगमपुरा की ऐतिहासिक स्थापना को भी बादशाह सिकन्दर लोदी और बादशाह बाबर से करवा लिया था। गुरु रविदास जी के ज्योतिर्लीन हो जाने पर भारत में कोई भी साधु सन्त, उनके समान शक्तिशाली नहीं रहा तो, जिस का नाजायज लाभ उठाकर ब्राह्मणों ने, गुरु रविदास जी का सारे का सारे इतिहास खत्म कर दिया था और सारा साहित्य जला दिया था, जिसका उल्लेख कानपुर के इतिहासकार रामचरण कुरील जी ने गुरु रविदास जी की "सत्य कथा" में वर्णन अठाहरवीं शताब्दी में किया हुआ है। उन्होंने लिखा हुआ है कि, गुरु रविदास महाराज का कांशी में स्वर्ण मंदिर भी था, जिसे ब्राह्मणों ने नष्ट भ्रष्ट कर दिया था मगर, गुरु नानकदेव जी, गुरु रविदास जी के पोथीसाहिब का कुछ अंश अपने पास ले आए थे, जिसे पंजाब में सुरक्षित रखा हुआ था, जो गुरु ग्रँथ साहिब में दर्ज किया गया है, आज हमें यही गुरु रविदास जी महाराज का साहित्य, प्रमाणिक रूप से मिलता है। उन का सारा क्रांतिकारी आंदोलन भी खत्म कर दिया था, जिसे पुनः जिंदा किया था, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी ने। उन्होंने 11/12 जून 1926 ईस्वी को, पुनः आदिधर्म मंडल की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में घोषणा की, कि हमने पुनः आज से, अपने आदिधर्म को अपना लिया है, उन्होंने तत्कालीन अंग्रेज सरकार द्वारा भेजे गए, साईमन कमीशन के पास, अपना पक्ष रख कर, आदिधर्म को सन 1931 की ऐतिहासिक जनगणना में भी शामिल करबाया था। सन 1932 ईस्वी में जब दूसरी लार्ड लोथियन कमेटी लाहौर आई तो, उन्होंने साहिबे कलाम मंगूराम मुगोबाल को पूछा, कि आप कौन हो तब उन्होंने कहा था, कि हम भारत के असली वाशिंदे हैं, तो हिन्दू चिल्ला कर, कहने लगे कि ये हिंदुओं की तरह वेदों के, वैदिक रीति रिवाजों के नियमानुसार ही विवाह, शादियां करते हैं। मुस्लिम भी कहने लगे ये मुर्दों को दफनाते है। सिख भी कहने लगे, कि ये गुरु ग्रँथ साहिब को मानते हैं और उसके अनुसार आनंद कारज पढ़ते हैं। तब उन के तर्को का जबाब देते हुए और वकालत भी करते हुए, बाबा साहिब डाक्टर भीमराव अंवेदकर ने सन 1932 में, लाहौर असेंवली हाल में, लार्ड लोथियन कमेटी के सामने निम्नलिखित ढंग से पक्ष प्रस्तुत किया था।
हमारा जबाब:----सर हम वेदों को बिल्कुल नहीं मानते हैं, ना ही हमें वेदों का पता है, हिन्दू लोगों ने हमें पढ़ने का हक नहीं दिया हुआ है, मंदिरों में प्रवेश करके कथा सुनने, कुंओं से पानी भरने की इजाजत नहीं दे रखी है, तो फिर हमें वेदों का पता कैसे हो सकता है और फिर विवाह किस प्रकार हो सकता? हो सकता है कि, इन्होंने ही हमारे पूर्वजों के वेदों की नकल की हो, ये हिन्दू लोग तो स्वयंबर की रश्मों से अपने विवाह शादियां करते हैं।
लोथियन की ओर से सवाल:----आप का धर्म ग्रँथ कौन सा है, आप किस किस को अपना ईष्ट मानते हैं।
हमारा जबाब:---,-----हमारा धर्म ग्रँथ गुरु आदि प्रकाश ग्रँथ है और गुरु रविदास जी महाराज, महाऋषि वाल्मीकि, सतगुरु कबीर, सतगुरु नामदेव, सतगुरु सेन जी, सहित सात सौ सन्तों की वाणी इस पवित्र ग्रँथ में दर्ज है।
सिखों की ओर से जबाब:-----गुरु आदि प्रकाश ग्रँथ कहां है? दिखाओ।
डाक्टर भीमराव की ओर से जबाब:---सर गुरु आदि प्रकाश ग्रँथ वहां है, जहां पर गुरु नानकदेव जी के समय में गुरु ग्रँथ साहिब था।
सिखों की ओर से जबाब:----- सर ये तथ्य सरासर बेबुनियाद और गलत है, क्योंकि गुरु ग्रँथ साहिब तो पांचवीं पातशाही गुरु अर्जुनदेव जी ने तैयार करवाया था, गुरु नानकदेव के समय में गुरु ग्रँथ साहिब की बीड़ थी ही नहीं।
डाक्टर अंवेदकर का जबाब:-----आपका मतलब,गुरु ग्रँथ साहिब गुरु नानकदेव जी के बाद तैयार किया गया था?
सिखों की ओर से जबाब:----हाँ, गुरु ग्रँथ साहिब गुरु नानकदेव जी के बाद तैयार करके छापा गया था।
डाक्टर भीमराव अंवेदकर की ओर से जबाब:---सर अगर गुरु ग्रँथ साहिब, गुरु नानकदेव जी के बाद छप कर तैयार हो सकता है, तो गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ भी, गुरु नानकदेव जी के, "गुरु" गुरु रविदास जी महाराज और आदि गुरूओं के बाद छप कर तैयार हो सकता है। (डाक्टर भीमराव अंवेदकर मनुस्मृति को दिखाते हुए) सर ये देखो, अछूतों को धन रखने का हक नहीं है, इसलिये हम गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ को छापवा नहीं सके, जब हमें धन रखने के हक मिल जाएंगे और हमारे पास धनदौलत इकठ्ठा हो जाएगी, तो गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ भी छप कर तैयार हो जाएगा। परम् सन्त स्वामी ईशरदास जी महाराज ने, सात सौ आदि गुरूओं की वाणी एकत्र कर रखी है।
लार्ड लोथियन की ओर से सवाल:-----गुरु आदि प्रकाश ग्रँथ में किन किन गुरुओं और सन्तों की वाणी होगी।
मंगूराम जी की ओर से जबाब:---गुरु आदि प्रकाश ग्रँथ में, सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज, महाऋषि वाल्मीकि, सतगुरु कबीर जी, सतगुरु नामदेव जी, सतगुरु सेन जी, सतगुरु सधना जी सहित और भी सात सौ सन्तों की वाणी को शामिल करके संगृहीत किया गया है।
लार्ड लोथियन की ओर से सवाल:----आप का पवित्र साधना शव्द क्या है?
हमारी ओर से जबाब:----सर हमारा पवित्र साधना और ध्यान और समाधि लगाने वाला शव्द ''सोह्म'' है।
लार्ड लोथियन की ओर से सवाल:---आप का आपस में मिलने पर संबोधन शव्द क्या है?
हमारी ओर से जबाब:-----सर संबोधन का सर्वश्रेष्ठ, पवित्र शव्द '' जय गुरुदेव'' है, ये शव्द किसी महापुरुष का नाम नहीं है,ये किसी आम आदमी की ओर संकेत नहीं करता है। ये सच्चे सतगुरु की जय का ही प्रतीक है,
(तत्कालीन गद्दार, धनलोलुप, अछूतों के दुश्मन, बेईमान अछूत लोगों ने डाक्टर भीमराव अंवेदकर, साहिबे कलाम मंगूराम मुगोबाल, स्वामी अच्छूतानंद जी, स्वामी ईशरदास जी के खिलाफ कई षडयंत्र रचे थे, उनके सामाजिक सुधारों के रास्ते में भी कई रोड़े अटकाए थे। इन्हीं कंगाल लोगों ने रिश्वत लेकर इनके खिलाफ़ ब्राह्मणवाद के पक्ष में, जूठी गवाहियां दी थी, मुखबरियाँ की थी, ब्राह्मणवादियों के साथ मिलकर दंगे फसाद किये थे, ऐसा ही लाहौर में लार्ड लोथियन के समक्ष कुछ गद्दार अछूतों ने भी किया था।
दयानंद दलित उधार मंडल की आदिधर्म मंडल के खिलाफ गवाही:-------दयानन्द दलित उधार मंडल होशियारपुर के स्वयंभू नेता लाला रामदास , स्वामी शूद्रानंद और पंडित गुरुदत्त ने कहा था कि, पंजाब में तो अछूत हैं ही नहीं! सवर्ण और छोटे हिन्दू सारे ही वेदों को मानते हैं, यहां हिंदुओं में कोई ऊँच नीच है ही नहीं, आदिधर्म मंडल वालों को मुसलमान पैसे देते हैं, जिससे वे हिंदुओं में भेदभाव पैदा कर रहे हैं। इन्हें अलग धार्मिक और राजनैतिक अधिकारों की आवश्यकता नही है।
हमारी ओर से जबाब:------सर हमें सदियों से हिंदुओं ने लताड़ा हुआ है, हमें स्कूलों में शिक्षा हासिल करने की मनाही है, कुओं से पानी भरने की मनाही है, कुओं पर चढ़कर पानी पी नही सकते, धोबी भी हमारे कपड़े नहीं धो सकता, अगर कोई धोने की हिम्मत करे तो उसका सामाजिक बहिष्कार कर देते, ये हिन्दू लोग नाई को भी अछूतों के वाल काटने नहीं देते, अछूत हिंदुओं के होटलों में खाना खाने नहीं देते, फिर हम हिन्दू कैसे हो सकते? इन वातों के सबूत आप भी, ये मनुस्मृतियों में देख सकते हैं।( बाबा साहिब अंवेदकर लार्ड लोथियन को रामायण दिखाते हुए) वाल्मीकि रामायण में राजा रामचन्द्र द्वारा, महाऋषि शंबूक का कत्ल, इस बात का ये प्रमाण है। महाभारत काल में एकलव्य का अंगूठा, कलियुगी गुरु द्रोणाचार्य द्वारा कटवाना आदि आदि के हवाले हिन्दू किताबों में से शाही कमीशन को पेश किए गए।
शूद्रानंद के सवाल का हमारी ओर से कड़ा जबाब:----सर ये शूद्रानंद सवर्णों से पैसे की इमदाद लेने वाला, वहुत ही फितरती अछूत स्वामी है, इस की एक फेक संस्था है, ये कभी मुसलमानों का प्रचारक बन जाता तो कभी आदिधर्म मंडल का प्रचारक बन जाता है, जब हमारी ओर से कम पैसे मिलते हैं तो सरस्वती दयानन्द उद्धार मंडल होशियारपुर का चहेता बन जाता है, हमें किसी भी हिन्दू, मुसलमान, सिख, इसाई संस्था की इमदाद नहीं मिलती, हम तो अपने अछूत भाइयों से चंदा लेकर उसी फंड से अपनी संस्था को चला रहे हैं। हिन्दू मैंबरों ने ये भी झूठ ही कहा है, कि जिन किताबों को आदिधर्म मंडल वालों ने पेश किया है, वे मुस्लिम प्रेस ने हमारी किताबों का संस्कृत भाषा का अनुवाद, अपनी मर्जी के अनुसार किया है, जिन का जबाब भी डाक्टर भीमराव अंवेदकर ने हिंदुओं को बड़े तर्कपूर्ण ढंग से दिया था।
साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के कड़े संघर्ष के बाद, आदिधर्म पुनः अस्तित्व में आया था मगर आज सरकारी दलाल फिर पैदा हो गए और जो जो काली करतूतें तत्कालीन दयानन्द उधार मंडल, दलित उधार मंडल के, स्वामी शूद्रान्द, पंडित गुरुदत्त, लाला रामदास आदि दलालों ने खलारी थीं, वही आज गुरु रविदास जी के नाम पर चलाए जा रहे डेरों के, प्रकाण्ड विद्वान, काली करतूतें करते हुए, आदिधर्म को ब्राह्मणों के इशारों पर खंडित करने में लगे हुए हैं, मगर साधु संप्रदाय सोसाइटी के प्रधान सन्त कुलबन्त जी और उनकी कार्यकारिणी ने, महत्वपूर्ण निर्णय लेकर आदिवासी, आदवंशी समाज को, आने वाली 2021 की जनगणना में आदिधर्म को, दर्ज करने का हुकमनामा जारी कर दिया है जिससे इन वहुजन विरोधी ताकतों को बड़ी शिकस्त, हार मिली है। जिन्होंने आदिधर्म के पेट में छुरा घोंपा है और गुरु रविदास जी के समाज को बांटने लिए नए धर्म का ड्रामा रचने के लिए समाज, उन्हें वैसे ही माफ नहीं करेगा, जिस प्रकार गद्दार लाला रामदास, शूद्रानंद, पंडित गुरुदत्त को दण्ड स्वरूप जनता भुला चुकी है, मगर मंगूराम मुगोवाल जी आज विश्व में सूर्य की तरह चमकते ही जा रहे हैं और भविष्य में भी वे, वहुजन समाज को बेचने वाले, दलालों को मिट्टी में मिलाते हुए, वहुजन समाज के सर्वोच्च मसीहा सिद्ध होते जाएंगे।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
अगस्त 24, 2020।
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