गुरु रविदास जी और साधु संप्रदाय व आदिधर्म।
।।गुरु रविदास जी और साधु संप्रदाय व आदिधर्म।।
गुरु रविदास जी महाराज, आदिधर्म के एकछत्र सर्वोच्च, सर्वश्रेष्ठ अवतार हुए हैं जिनकी सत्ता को कोई भी चैलेंज नहीं कर सकता है। भविष्य तय करेगा कि, भारत की पवित्र भूमि पर ही, आदिपुरुष के रूप में गुरु रविदास जी ही प्रकट हुए हैं, भले ही ब्राह्मणों ने गुरु रविदास जी को जातीयता के अमानवीय कलंक से, उनके सर्वोच्च सम्मान को ग्रहण लगाया हो, मगर वह दिन दूर नहीं, जब ये ब्राह्मण अपने दुष्कर्मों की सजा अवश्य भुगतेंगे। आदिधर्म आदिपुरुष द्वारा स्थापित, आदिवंशी आदिवासियों का आदिकाल से चला रहा धर्म है, जिसे कोई भो धूमिल नहीं कर सकता है, क्योंकि ये स्पष्ट सत्य है:-----
आद से परगट भयो, जा को ना कोउ अंत।
आदधर्म रविदास का,जाने बिरला सन्त।।
गुरु रविदास जी महाराज के, आदिधर्म के इस कथन ने, विश्व साधुसंप्रदाय को अपनी ओर आकृष्ट कर लिया है, इसके अध्यक्ष सन्त कुलबन्त जी भरोमाजरा और उनके साथी सन्तों ने , गुरु रविदास की सरपरस्ती में, आदिधर्म को जन जन तक पहुंचाने के लिये कमर कस ली है, सन्त कुलबन्त जी ने तो, गत दिवस, अपने सभी लाखों, हजारों समर्थकों के साथ, ऐलान कर दिया है कि, 2021 की जनगणना में सारे विश्व के गुरु रविदास जी के सेवक आदिधर्म ही दर्ज करबाएँ।
प्रोफेसर लालसिंह जी, अपने शोध काव्य, "आदिधर्म बनाम, विश्व धर्मग्रंथ आदि पोथीसाहिब दे सिरजक सतिगुरु रविदास जी" के पृष्ठ 18 पर लिखते हैं कि, समूचा पंजाब श्री गुरु रविदास साधु संप्रदाय सोसाइटी (रजि) पंजाब, भारत के सन्त महापुरुष ""आदिधर्म"" ही मानते हैं। अब समूचा साधु समाज आदिधर्म को मान्यता देता है, और किसी भी धर्म को, बिलकुल स्वीकार नहीं करता है। साधु समाज के तत्कालीन चेयरमैन सन्त सरवन दास जी महाराज सलेम टाबरी, प्रधान सन्त निर्मल दास जी और महासचिव सन्त निर्मल सिंह जी ने, प्रेस वालों को संबोधन करते हुए, चार फरवरी 2010 को अजीत अखबार में कहते हैं कि,"अपने आप को आदिधर्म के साथ संबन्धित बताते हुए, सन्त समाज ने कहा है कि, दूसरा किसी भी धर्म मजहब का निर्णय उन्हें कतई मन्जूर नहीं है", फिर जालन्धर और दिल्ली में भी कांफ्रेंस करके निम्नलिखित व्यान देते हुए कहा है कि, दूसरे किसी धर्म की बात करना, बल्लां वाले महानपुरुषों का गुरु रविदास जी का हुक्म ना मानना है। गुरु रविदास जी ने, जिन सन्त महापुरुषों की अपनी वाणी के बीच उपमा की है, बल्लां वाले महापुरुषों ने, उसे अपने धर्म में कोई भी स्थान नहीं दिया है। गुरु रविदास जी महाराज ने जिन महापुरुषों की उपमा करते हुए, संबोधन किया है, वे हैं गुरु नामदेब जी, गुरु कबीर जी, गुरु त्रिलोचन, गुरु सधना जी, गुरु सेन जी और महाऋषि वाल्मीकि। "अमृतवाणी सतिगुरु रविदास महाराज जी बल्लां वाले ऐलानिया धर्मग्रंथ को स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे गुरु रविदास जी के हुकम का सीधा सीधा उलंघन करते हैं।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
अगस्त 23, 2020।
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