गुरु रविदास जी, विश्व के सर्वोच्च महायोद्धा हुए हैं।
।। गुरु रविदास जी, विश्व के सर्वोच्च महायोद्धा हुए हैं।।
गुरु रविदास महाराज का संपूर्ण जीवन, मानवता की रक्षा का प्रतीक बन गया था, अगर ये कहा जाए कि गुरु जी कास्ट क्रीड, धर्म-अधर्म, छूत-अछूत, उच्च-निम्न की वर्ग की दीवारों को ध्वस्त करने वाले मसीहा हुए हैं तो कोई भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। गुरु जी ने, अपना नाम देदीप्यमान,करने के लिए, अछूतों का एकछत्र मसीहा बनने के लिए, अछूतों की समस्याओं का निवारण करने के लिए, उस का श्रेय लेने का कोई भी काम नहीं किया है, वे तो सामाजिक अत्याचारों, छलों, कपटों, बुराईओं को ध्वस्त करने के लिये चट्टान बन कर, शासन के आगे अड़ गए थे, उनके समक्ष जो भी कातिल,अत्याचारी-हितकारी-व्याभिचारी, पंडा-पुजारी,मोलामा-मुल्ला, पादरी-चर्चिल अड़े थे सब झड़ गये थे, बस बचा वही जो सत्य को पहचान गया, ईमान को अपना गया, तर्क को समझ गया, इंसानियत को भांप गया, बुराइयों के बाद अच्छाइयों का प्रतीक बन गया।
गुरु जी का समय ऐसा था कि, पण्डे-मुल्ले, पुजारी-हितकारी, मौलाने-पादरी, ब्राह्मण -शेख, राजे-महाराजे, बेगम-बादशाह सभी विलासी जिंदगी जी रहे थे, और ये सभी धर्म के अंधे, पाप के धंधे की चादर ओढ़ कर, आनंद के सागर में डुबकियां मार रहे थे। धर्म और राजनीति मिलकर प्रजा के गाढ़े खून की कमाई हराम में हजम कर रहे थे, किसान मजदूर, मिस्त्री अन्न पैदा कर रहा था, अमीरों की सेवा दिनरात कर रहा था मगर वह फिर अछूत, वह फिर घृणित, वह फिर भी ब्राह्मणों की टट्टी सिर पर उठा रहा था, वह फिर दानव, दस्यु, राक्षस, दैत्य दनुज और अपवित्र।
गुरु जी के समय तक, सभी धार्मिक नेता हैवान बन चुके थे। कोई भी मुल्ला मौलबी भी, खूनी, कातिल बादशाह सिकन्दर लोदी को समझाने की हिम्मत नहीं कर रहा था, कोई भी शंकराचार्य हिन्दू राजाओं के बन्द कपाटों को खोल नहीं रहा था, कि आप मानवता का संहार कर रहे हो। जंगल राज ही विश्व मे चल रहा था, किसी भी देश मे सुख शान्ति नहीं थी। अंग्रेज-मुस्लिम दोनों ही विश्व विजेता बनने के चक्र में, जनता के खून से सागरों को भी दूषित करते जा रहे थे, जिनका प्रतिकार किया तो केवल गुरु रविदास जी ने और उनकी सन्त मंडली ने और वह भी जान हथेली पर लेकर। गुरु जी अकेले ही दोनों क्रूर शक्तियों से भिड़ गए, दोनों के ही परखच्चे उखाड़ दिये, गुरु जी ने बिना फ़ौज फानी, बिना तिलक, तीर तलबार, बिना गुंडागर्दी, बिना एक जाति को दूसरी जाति को भड़काए, सब कुछ दिव्य वाणी के मिजायलों से, बादशाह सिकन्दर लोदी, बादशाह बाबर, राजे अपने राजगुरु रविदास जी के निर्देश से शासन चलाते रहे। गुरु जी ने तो बस यही कहा कि शूद्रो :-----
पराधीनता पाप है, जान लियो रे मीत।
रविदास पराधीन से, करै ना कोई प्रीत।
इसी मिजायल ने, बादशाह सिकन्दर लोदी, बादशाह बाबर और तिकलधारी ब्राह्मणों की ईंट से ईंट बजा दी, छुआछूत, ऊँच नीच की अमानवीय बीमारी खत्म करवा दी थी। सति प्रथा को वाय वाय करवा दी, कुओं बाबड़ियों के पानी भरना सभी जातियों को खुलवा दिए, नोकरियाँ के अधिकार बहाल करवा दिए, शूद्रों की बलि प्रथा बन्द करबा दी, जो ऐसा करे राजाओं से उन्हें कठोरतम आर्थिक दण्ड और जेल की व्यवस्था करवा दी, झोंपड़ियों और जंगली गुफाओं में रह रहे शेर जा गए और जब वे दहाड़े तो फिर क्या था, कोई भी अपनी पत्नी को दाव पर नही लगा सका, कोई भी अपनी निर्दोष पत्नी को वनवास या देश निकाला नहीं दे सका, कोई भी अपनी पत्नी को आपस में धन दौलत की तरह बांट नहीं सका, कोई भी लंका को पूँछ से जला नहीं सका था, वस भारत में केवल रामराज्य के स्थान पर बेगमपुरा बन गया था।
ये सभी काम गुरु रविदास महाराज जी ने बिना हथियार उठाए, बिना सेना बुलाए ही किये जबकि चमार भाई अब्राहिम लिंकन को हथियार उठा कर गृहयुद्ध का सामना करने के बाद दासों की दासता की बेड़ियां खत्म करनी पड़ी थी, गुरु रविदास फिर, साहिब कांशीराम बन कर आए थे, फिर वहुजन समाज को कहा था कि, उठो "बोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा" मगर ब्राह्मणवाद की अर्थी उठाने वालों ने उनका अधूरा काम पूरा करने नहीं दिया अन्यथा वे भी, अपने वंशज लेनिन, अब्राहीम, हिटलर से कम नहीं थे मगर जिन्होंने ये गद्दारी की है, उनका सफाया करने गुरु रविदास जी कल्कि बन कर जल्दी आ रहे हैं, वे यही काम करेंगे। स्वामी ईशरदास जी महाराज सन 1940 में कह गए है:----
लौंद लिव ( लगन) लाई, प्रभ के भगतन पर रछपाल (रक्षक)। दुष्ट जनां को संहार सी सन्त जनां पर दयाल। सँभर नरेश संघार (कत्ल) के आन देश संभाल (सत्ता छीन लेंगे)। काबुल कंधार बलख बुखारा कश्मीर किश्तबाड नाल। बगदाद खुरासन बीजापुरी गोलकुंडी दरबाड़ी। तेलगी चीन मचीन (मंगोल) माधो देश विदेश पकहाड़ी ( सन 2020 की हाड़ी फसल जो इस वर्ष पक गई और असाध्य महामारी ने अमीरों को जहाजों में भर कर संसार के कोने कोने में पंहुचाया और कोरोना फैलाया)। शरण पियो सो रख लियो आकी(अहंकारी) होउ सो पार(मारे जाएंगे)। नजराने ( तोहफे गिफ्ट) लैकर मिलनगे भूपत बेशुमार। हां हां माधो चित आएंगे कलिजुग खत्म कराए। सतजुग दी लग लड़ी तब नेह कलंक हुक्म चलाए। आन भूप सब सूबे होणगे कलगीधर जी का राज। अब वोह मौसम आ रिहा मुलक मुलक संग्राम। नेह कलंक आ रहे डंका बजाए। गऊ गरीब की पालन करनगे जातपात उड़ाए। मंदिर मसीत गोर तीर्थ वेद कुरान स्मृति जोय ( अब पापियाँ से भरे धर्मस्थल खत्म हो जाएंगे और केवल आददुआरे बनेंगे जिन में गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ ही शोभित होगा)।कुरान कतेब ना रहसियां आदिप्रकाश ग्रँथ चलोए। पछमो दखन जावसी चढ़दी तरफ पुनः आवन। होशियारपुर नजदीक जो नंदपुर चो (नाला जहां काम चल पड़ा है जिसका काम शुरू करने का सौभाग्य भी हमें मिला है) डेरे लावन। रामदास हरि मंदिर पुनरप हरि जी जान। भन रविदास उत्साह करे गरीब जनता कल्याण।
गुरु रविदास जी, ज्योतिर्मंडल में रह कर भी, भारत के अत्याचारियों पर पूरी निगाह बनाए हुए हैं, वे बार बार शान्ति पुरुष भेज कर ब्राह्मणों को सुधारने का प्रयास करते रहे, साहिब कांशीराम जी भी इसी कड़ी में अवतार आए थे मग़र ब्राह्मण और हमारे भी कुछ स्वार्थी तत्व नहीं सुधरे जिन में अछूत भी है, अब वे आने वाले ही है। ऊपर जो लिखा है,उसके अनुसार समय जल्दी आता हुआ नजर आता है, क्योंकि उन्होंने, अपनी भविष्यवाणी के अनुसार लिखा हुआ है कि, विनाश करने वाली महामारी चीन से शुरू होगी, बुरे कर्म चीन के पापी शासक जिन शिपिंग से शुरू करा कर ज्योतिर्मंडल को स्वच्छ कर लिया नदियां वायू सब साफ कर लिए, गन्दगी भी साफ कर ली अब बस पापियाँ का बेड़ा तबाह करने के लिये तैयारी है जिसमें भागबत का नाम और सभर (संभलपुर) का हत्यारा शामिल है जिन्होंने मानव को बड़ी नृशंसता से कुचल दिया है।
गुरु रविदास जी से बड़ा विश्व में कोई योद्धा नहीं हुआ, अब स्वयं आप आ कर खण्डे से सफाई करेंगे, इसीलिए सुखी रहने के लिए, वर्तमान चल रहे प्रलय में "सोहम" जाप करो, ईमान से रहो, दिल में दया धारण करो अन्यथा गुरु रविदास जी के खण्डे से कोई नहीं बचेगा।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
अगस्त 20,2020।
Comments
Post a Comment