।।गुरु रविदास जी और समाजवाद व सुरक्षा।।

।।गुरु रविदास जी और समाजवाद व सुरक्षा।।
गुरु रविदास जी महाराज के आविर्भाव तक, विश्व में अत्याचारियों का निरंकुश शासन चलता आ रहा था। तानाशाहों की तानाशाही और बादशाहों को बादशाही ने प्रजा का जीना दूभर कर रखा था।जिसके खिलाफ कहीं कोई दलील अपील नहीं हुआ करती थी, जिस किसी ने आलोचना करने की हिम्मत जुटाई वही मौत के मुंह में चला जाता था। राजतन्त्र ने विज्ञान की प्रगति को स्थिर कर रखा था, जिस किसी ने, विज्ञान का सहारा लेकर, वैज्ञानिक विचारधारा को व्यक्त किया, वही मौत के घाट उतार दिया जाता था।मंसूर ने "अहं ब्रह्म अस्मि"कहा और सूली पर लटका दिया, यही हाल ईशू मसीह का हुआ, कई और भी कई गुरुओं काऐसा ही हाल हुआ मगर गुरु रविदास जी के सामने सभी बौने पड़ गए,सभी गुरु रविदास जी महाराज को  मौत के घाट उतारने के लिए बहुत प्रयास करते रहे मगर गुरु जी के समक्ष सभी ओंधे मुंह गिरते गए,उनकी आलौकिक शक्ति के सामने, उनकी एक भी नहीं चली,जिस कारण, निरंकुश बादशाहों ने भी उनके सामने हाथ खड़े कर, आत्मसमर्पण कर दिए थे।हांरने के बाद वे विवश होकर गुरु जी को अपना राजगुरु बनाते गए। जिस बेगमपुरा की वे कल्पना किया करते उसे, गुरु जी के शिष्य शासक पूर्ण करते गये। विश्व में, जनतंत्र को मिटाकर, लोकतंत्र की नींव गुरु रविदास जी ने ही रखी थी।
विश्व में लोकतंत्र के जन्मदाता:---- जिन्होंने विश्व को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए, अनूठा, अद्वतीय और अति संक्षिप्त संविधान देकर, उसमें मानवीय मूल्यों का निरूपण करके, धरती पर स्वर्ग बना कर, बेगमपुरा स्थापित करने की सारे विश्व को महत्वाकांक्षी योजना तैयार करके भेंट की है, उनके संविधान की विचित्रता और विशेषता देखते ही बनती है:---
बेगमपुरा शहर को नांऊँ।।
दुखु अंदोहु नहीं तिउ ठाँऊँ।।
यही एक पंक्ति, प्राणिजगत को, सुखमय जीवन दे सकती है, सजीव जगत को सभी प्रकार की सुरक्षा की गारंटी देती है और सभी नागरिकों को रोटी, कपड़ा और मकान का पूर्ण अधिकार दिलातीं हैं,अगर शासक वर्ग ईमानदार और सत्यनिष्ठ हो, राजधर्म को निभाने वाला हो, तो विश्व में वैश्विक सरकार बनाकर, सभी समस्याओं को समाप्त कर सकते हैं। गुरु रविदास जी के इस संविधान की विशेताएँ निम्नलिखित हैं:-----
1--संविधान प्रकृति के उसूलों के अनुसार, विश्व में शासन करने की व्यवस्था को मान्यता देकर,आदर्श शासन स्थापित करता है।
2--समतामूलक समाज केलिए समाजवाद की स्थापना करता है।
3--सभी प्रकार के तर्कसंगत, न्यायसंगत, समाजोपयोगी मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करता है।
4--गंभीर विचारवादी सर्वहित संविधान की व्यवस्था सुनिश्चित करता है।
5--विश्व शान्ति के लिये उपयोगी है।
6--यह संविधान वैश्विक अद्वितीय संरचना के लिए प्रकृति पर आधारित है।
7--धार्मिक विचारधारा सम्मत संविधान है।
8--वैश्विक सुख भ्रातृत्व का पोषक है।
9--वैश्वक एकता की गारंटी देता है।
10--दार्शनिक विचारधारा के अनुरूप संविधान है।
11--राजनीति और धर्म का मणिकांचन समिश्रण ही, इस संविधान की विशेषता है।
12--वैश्विक सीमाओं को समाप्त कर एक ही  विश्वदेश बनाने में कारगर होगा।
13-- रक्षा सामग्री की दौड़ समाप्त होकर, बजट विकास कार्यों पर खर्च होगा जिससे बेकारी खत्म होगी, खरबों रुपयों को विकासात्मक कार्यों पर खर्च करके,नए रोजगार के अवसर तैयार होंगे।
14-- धन इतना होगा कि कोई भी नँगा, भूखा, प्यासा और बेघर नहीं रहेगा।
15-- सीमाओं पर अतिक्रमण नहीं होगा और ना किसी के घर का चिराग असमय बुझेगा।
सीमाओं के बंधन खत्म होंगे और कोई किसी को कहीं आने जाने, सैर सपाटे के लिए रोक नहीं पाएगा।
काश ! कि अब भी विश्व के राजनेता कुछ दिमाग से काम लेकर, गुरु रविदास के वैश्विक सिद्धान्त का अनुशरण करके, तत्काल भूमण्डलीय सरकार का चुनाब कर लें और विश्व में बहने वाली मृत्यु की शीत लहर खत्म हो जाए और चीन, उतर कोरिया जैसे तानाशाहों को भी मानवता का संहार करने से रोका जा सके।
।।सोहम ।।जय गुरुदेव।।
रामसिंह शुक्ला।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
जुलाई 10, 2020।

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