।गुरु रविदास और बादशाह बाबर का समाजवाद।
।गुरु रविदास और बादशाह बाबर का समाजवाद।
गुरु रविदास जी महाराज ने,जब बादशाह बाबर का हर्ट ट्रांसप्लांट किया था, तब से ही बाबर ने दिल्ली को आदर्श राज्य बनाने के लिये ऐतिहासिक कदम उठाना शुरू कर दिये थे, जिस का श्रेय केवल गुरु रविदास जी महाराज को ही जाता है मग़र किसी भी ईमानदार साहित्यकार ने, गुरु रविदास जी के इस ऐतिहासिक और असंभव कार्य को इतिहास का हिस्सा नहीं बनाया,अब पचास साल बाद युवा रिसचर्सज ने, गुरु रविदास जी के इतिहास को ढूंढने का प्रयास किया है।डाक्टर हरबंस मुखिया जी ने भले ही गुरु रविदास जी का नाम नहीं लिया है, मगर लक्ष्यार्थ से,यही ध्वनि निकल रही है कि, बादशाह बाबर का दिल बदल गया था और भारत के इतिहास में आज, बादशाह बाबर के स्वभाव में हुए,परिवर्तन के बारे में, साहित्य के शोध छात्र, स्कालर, गुरु रविदास जी का नाम सवर्ण अक्षरों में दर्ज कर रहे हैं। गुरु रविदास जी महाराज ने, बेगमपुरा शहर की कल्पना करते हुए, बादशाह बाबर को भी कहा था:-----
।।शव्द।।
बेगमपुरा शहर को नाऊँ।
दुखु आंदोहू नहीं तिह ठाऊँ।।
नां तसवीस खिराजु ना मालु।।
खउफ ना खता ना तरासु जवालु।।
अब मोहि खूब वतन गह पाई।।
ऊहां खैरी सदा मेरे भाई।।रहाउ।।
काईम दाईम सदा पातिशाही।।
दोम ना सेम ऐक सो आही।।
आबादान सदा मसहूर।।
ऊहां गनी बसहि मामूर।।
तिउ तिउ सैल करहि जिउ भावै।।
महरम महल ना को अटकावै।।
कहि रविदास खलास चमारा।।
जो हम शहरी सु मीत हमारा।।
गुरु रविदास जी महाराज की समाजवादी विचारधारा, समाजवाद की सटीक व स्पष्ट परिभाषा,संसार के सुखों का आधार,इस एक ही पंक्ति में मिल जाता है, ऐसा गागर में सागर भरने वाला इंसान कहीं भी ढूंढने पर भी नहीं मिलता है। गुरु रविदास जी फरमाते हैं,कि "बेगमपुरा शहर कोउ नांऊँ, दुखु अंदोहु नहीं तिह ठाँऊँ" बेगमपुर नामक शहर, ऐसा शहर है, जिस जगह कोई भी दुख-दर्द, तकलीफ, कष्ट, पीड़ा, मानसिक तनाव और किसी किस्म की परेशानी नहीं होती है, अर्थात, इसी धरती पर,सारे सुख मिल जाएं तो यहीं बेगमपुरा हो सकता है मगर ऐसा नहीं हो पा रहा,बेगमपुरा की पहचान के निम्नलिखित मापदण्ड हैं:---
1:--उस शहर में कोई चोर, लुटेरा, बदमाश कपटी,अत्याचारी, दुराचारी, अनाचारी,ठग, भ्रष्टाचारी,और व्याभिचारी नहीं होता है।
2--कोई बेईमान, छली, कपटी,बेगमपुरा का निवासी नहीं होता है।
3--वहां सीमा सुरक्षा के लिए भी कोई सेना तैनात नहीं होती है।
4--कोई सीमा का विवाद नहीं होता है।
5--कोई भी राष्ट्राध्यक्ष किसी की सीमा का अतिक्रमण नहीं करताहै और कोई युद्ध भी नहीं होता है।
6--कोई किसी का नरसंहार नहीं करता।
7--किसी की कोई संपति नहीं छीनता है।
8--कोई भी किसी की जमीन छीन नहीं सकता है।
9--किसी की कोई धन दौलत छीन नहीं सकता है।
10--केवल मिलजुल कर, सदभाव से सभी जीवन बसर करते जा रहते हैं।
11--सभी लोग निश्चिंत होकर खुशहाल जिंदगी जीते हैं।
12--ऐसा शासन ही तो समाजवादी शासन होता है।
13 -इसी व्यवस्था में आदर्श समाज के दर्शन होते हैं,
14--इसी व्यवस्था में सभी को धार्मिक स्वतन्त्रता होती है।
15--ज्ञान हासिल करने का पूर्ण अधिकार मिलता है।
16--मानसिक शांति मिलती है और सभी को स्वच्छंद जीवन जीने का अधिकार भी मिलता है।
17--इसी व्यवस्था में जनता को भरपेट अनाज और सभी खाद्य पदार्थ मिलते हैं।
18--ऐसे शहर में कोई ऊंच नीच, छुआछूत नहीं होती है।
19--कोई वर्ण भी, जातिवाद, नशलवाद, धर्मवाद की व्यवस्था नहीं होती है।
20--बेगमपूरा शहर में आनंद ही आनंद होता है।
21-- बेगमपुरा शहर में हमेशा प्यार, स्नेह, सम्मान, आदर, सदाचार होता है।
कहने का तात्पर्य है कि,अगर सारे संसार को ही बेगमपुरा बना दिया जाए,बेगमपुरा स्थापित हो जाए,तो कहीं भी किसी भी देश में,कोई लड़ाई झगड़े नही होंगे।ना ही युद्धों की भयावह समस्या खड़ी होगी। रोटी,कपड़े और मकान केलिये, दर दर भटकना नहीं पड़ेगा। हर देश में सुख ही सुख होगा। काश ! कि सारे संसार के सभी नेता,राजनेता और सभी धर्मों के मुखिया गुरु रविदास जी के अमूल्य सिद्धान्तों का अनुशरण करें।
।।सोहम।।जय गुरुदेव।।
रामसिंह शुक्ला।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
जुलाई 9,2020।
Comments
Post a Comment