।गुरु रविदास महाराज और क्रांतिकारी समाजवाद।

।।गुरु रविदास महाराज और क्रांतिकारी समाजवाद।।
ऐसा चाहूँ राज मैं, जहां मिले सभन को अन्न।
छोट बड़ सभ सम वसै, तां रविदास रहै प्रसन्न।
गुरु रविदास महाराज ने, संसार को जो उपरोक्त्त समाजवाद का आदर्श सिद्धान्त दिया था,उससे सारे विश्व में विष्मयकारी क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं। जिन देशों के शासकों ने ये सिद्धांत लागू किए वे विकास की चरमसीमा पर पहुँच चुके हैं। रूस इस सिद्धांत से भटका तो विश्व की दूसरी शक्ति के पायदान से गिर कर कहीं का नहीं रहा और आज वह अमेरिका से बुरी तरह दौड़ में पिछड़ गया। आज तक चीन उसी सिद्धान्त पर चलता आ रहा है, और अमेरिका को भी पछाड़ कर, विश्व की नंबर एक शक्ति बन गई है। सन 1902 से शी जिनपिंग सत्ता पर काबिज हैं,उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे कार्लमार्क्स की विचारधारा के अनुसार चलते रहेंगे। गुरु रविदास जी की समाजवादी विचारधारा, चीन, क्यूबा, उतर कोरिया, वियतनाम, लाओस, रूस में रंग लाती हुई, नजर आ रही है, बाकी देश पूंजीपतियों के दबाब का शिकार होते जा रहे हैं, जिससे वहां अमीरी गरीबी का फासला बढ़ता ही जा रहा है, जनता में असंतोष बढ़ता ही जा रहा है, अमीरों की लूट, गरीबों का शोषण बढ़ता ही जा रहा है, राजनेताओं की आर्थिक भूख बढ़ती ही जा रही है, सभी राजनेता अंधाधुंध अपने वेतन भत्ते बढ़ाकर जनता के धन पर डाके मारते जा रहे हैं, सभी राजनैतिक दलों के कंगाल राजनेता मिलकर, नूराकुश्ती करते जा रहे हैं, भारत की जनता बढ़ते करों से पिसती जा रही है, जनता अंदर ही अंदर घुटती जा रही है, भले ही खुल कर जनता बोल नहीं रही मगर जब लाबा फटेगा तब, इन लुटेरे नेताओँ को छुपने के लिए कोई गुफा नहीं मिलेगी, बेहतर है कि गुरु रविदास जी महाराज के बताए सिद्धान्तों का अनुसरण करते हुए, अमीरों और गरीबों के बढ़ते हुए फासले को कम किए जाएँ। जनता एक तंत्रीय और बहु तंत्रीय शासन व्यवस्था से परेशान है, क्योंकि एक तंत्रीय शासन व्यवस्था में तानाशाही जन्म लेती जा रही है जिससे जनमानस की इज्जत आबरू खतरे में पड़ चुकी है, न्याय खत्म हो चुका है, जो डिक्टेटर कह रहा है, वही कानून बनता जा रहा है, उधर बहुदलीय व्यवस्था में, सभी राजीतिक दलों के अध्यक्ष आपस में मिलकर नूराकुश्ती करते हुए लोकतंत्र का जनाजा निकालते जा रहे, आपस में बारी बारी चुनाव जीत कर निरीह जनता का शोषण करते जा रहे, जिससे लोकतंत्र नाम मात्र का ही रह चुका है, ऐसे चुनाब जीतने वाले दल भी एक तंत्रीय शासन व्यवस्था के अनुसार डिक्टेटरशिप का ही प्रयोग करके, जनता के साथ मनमाने ढंग का सलूक कर रहे हैं, जिससे अराजकता पनपती जा रही है।
गुरु रविदास का लोकतंत्र ब्रह्म ज्ञान पर आधारित:----- गुरु रविदास महाराज का लोकतंत्र ब्रह्मज्ञान और सत्य पर आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था का समर्थन करता है।बिना धार्मिक ज्ञान और ईश्वरीय भय से चलने वाला शासक जनता की इच्छाओं के अनुरूप शासन नहीं चला सकता। आज वही लोग विश्व में शासन तँत्र को चला रहे हैं, जिससे सारे विश्व में अराकता फैली हुई है। शासक वर्ग ये नहीं समझ रहा कि, ये शरीर क्षणभंगुर है, इसे फना होना ही है, ये मिट्टी का बना हुआ पुतला है, ना जाने कब  ये कब चलना बन्द कर दे। गुरु रविदास जी के इस आलोकिक दर्शन का शासकों को ज्ञान होगा, तभी उनमें इंसानियत,सत्य का संचार हो सकता है:-----
              ।।शव्द।।
माटी को पुतरा कैसे नचतु है।।
देखै देखै सुनै बोलै दोरियो फिरतु है।।रहाउ।।
जब कछु पावै तब गरवु करत है।।
माईया गई तब रोवनु लगतु है।।
मन वचन कर्म रस कसहि लुभाना।।
बिनसि गइया जाइ कहूँ समाना।।
कहि रविदास बाजी जगु बनाई।।
बाजीगर सउ मोहि प्रीति बनि आई।।
गुरु रविदास जी महाराज मानव की स्थिति का वर्णन करते हुए फरमाते हैं, कि हमारा शरीर एक मिट्टी का पुतला है,ये पुतला हर समय, किस, किस प्रकार नाचता रहता है अर्थात कुछ ना कुछ अच्छा और बुरा कार्य करता रहता है। ये पुतला कभी देखता है, कभी सुन कर दौड़ता, फिरता है।जब कुछ प्राप्त कर लेता है, तब बड़ा घमंड करता फिरता है अर्थात दिनरात धन संचय करने में लगा रहता है, अपने मान सम्मान के लिए दिनरात अच्छे बुरे कर्म करता रहता है, जब धन दौलत, सीरत, मान सम्मान मिट्टी में मिल जाते हैं, तब रोने लगता है। मन, वचन, कर्म आदि अनेकों प्रकार के मायावी रसों के लालच में किस प्रकार फंसा रहता है, मगर कभी ये नहीं सोचता है, कि जब मेरा विनाश हो जाएगा, तब कहाँ जा कर समाऊंगा अर्थात जब मृत्यु हो जाएगी तब कहाँ, किस जगह पर,जा कर रहूँगा। गुरु रविदास जी फरमाते हैं, कि हे भाई ! ये संसार, बाजीगर (प्रभु) ने बनाया हुआ है, मेरी प्रीत तो इसी बाजीगर से लग चुकी है अर्थात प्रभु से मेरा प्यार हो गया।
गुरु रविदास जी के कहने का तात्पर्य है कि, जिसे प्रभु का भय हो, जिसे प्रभु की शक्ति का अहसास हो, जिसे मृत्यु का पता हो,जिसे घमंड की असलियत का पता हो वह शासक कभी भी अन्याय व अनाचार, व्याभिचारी, भ्रष्टाचार ना तो करेगा और ना ही करने देगा, ना खुद ही बुरे कर्म करेगा, ना ही करने देगा, वही सुशासन देगा और समस्त जनता को समतामूलक समाजवाद के उसूलों के आधार पर शासन करेगा और प्रजा के लिए, सुखी जीवन जीने के लिये कार्य स्वयं और प्रशासन से भी न्यायसंगत काम करवाएगा।।सोहम।।जय गुरुदेव।।
रामसिंह शुक्ला।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
जुलाई 7,2020

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