।।गुरु रविदास महाराज और आदिधर्म।।
।।गुरु रविदास जी महाराज और आदिधर्म।।
गुरु रविदास जी महाराज, धार्मिक क्रान्ति के पुरोधा हुए हैं। उनके जन्म तक, विश्व में केवल राजसत्ता की भूख, राजाओँ और बादशाहों को खून की नदियां बहाने के लिए विवश करती जा रही थी मगर कोई भी माँ का सपूत उन विदेशी बहिशियों के विजयरथ को रोक नहीं पा रहा था, कोई अपनी बेटी को उन्हें नजराने में भेंट करके अपना प्राणों की भीख मांग रहा था, तो कोई धन देकर अपने परिवार को सुरक्षित कर रहा था। कई तो तलबार के भय से, धर्म परिवर्तन करके जान बचा रहे थे, मगर गुरु रविदास जी ने, सिकन्दर लोदी के सिहांसन पर विराजमान हो कर ही, सिकन्दर लोदी को कहा था कि:----
बादशाह सिकन्दर "हिंदू अंधा मुस्लिम काणा"
गुरु रविदास जी महाराज ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया था, ना ही तलबारों का ख़ौफ़ खाया था, ना धन दौलत देकर प्राण बचाए थे, ना किसी के पास आत्मसमर्पण किया था, ना ही हिंदू धर्म को कहा कि, मेरा धर्म हिंदू धर्म है, इसी कारण अपनी वाणी रूपी तलबार से हिंदू और इस्लाम को काट दिया था, वे पूर्ण आदिधर्मी थे, क्योंकि वे कहते हैं:-----
आदि से प्रगट भयो, जा को ना कोउ अंत।
आदिधर्म रविदास का, जाने बिरला सन्त।
गुरु रविदास जी फरमाते हैं, कि आदिपुरुष से ही आदिधर्म प्रकट हुआ है, जिसके बारे में कोई नहीं जानता है। आदिधर्म गुरु रविदास जी का है जिसके बारे में कोई बिरला ही सन्त जानता है अर्थात सन्तों को भी इस सत्य का आभास नहीं है, क्योंकि ये सन्त भी दूसरे ही धर्मों के अनुसार, अपने पेट भरने के लिये उन्हीं के धर्मानुसार, उन्हीं के निर्देशानुसार, उन्हीं की पूजा पद्धति को अपना कर तेतीस करोड़ काल्पनिक देवी और देवताओं का ही गुणगान करते हैं। फिर कुछ धर्म का धंधा करने वाले, गुरु रविदास जी को कहते हैं कि, उन्होंने हिंदू धर्म नहीं छोड़ा था। जब आज भी युरेशयन अछूतों को हिन्दू, ना मॉन कर अपने मन्दिरों में घुसने नहीं देते, अपने मुहल्लों में अछूतों को जूते पहन कर गुजरने नहीं देते, अपने कुओं से पानी पीने नहीं देते, अपनी बेटियों से अछूतों को शादी करने नहीं देते, अछूतों के दूहलों को घोड़ी पर चढ़ कर बारात निकलने नहीं देते, नोकरी करने नहीं देते, यहां तक कि मनुबादी हिन्दू धर्म को ही, अपना धर्म नहीं मानते और सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा देकर कहते हैं कि हिंदू एक विचारधारा है, ना कि हिंदुओं का धर्म, फिर गुरु रविदास जी को किस मुंह से कहते हैं, कि उन्होंने हिन्दू धर्म को छोड़ कर इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं किया था औऱ ना ही सिकन्दर लोदी के पास धर्म बदला था। गुरु रविदास स्वयं कहते हैं, कि हिन्दू तो अंधा है और मुसलमान काणा। वे किसी भी बादशाह के पास कभी नहीं झुके और ना कोई धर्म ही परिवर्तन किया :---
गुरु रविदास जी हिन्दू थे, और मुसलमान नहीं बने थे।
गुरु रविदास जी आदिधर्मी थे, डर से विधर्मी नहीं बने थे।
जब गुरु जी को पूजापाठ ही करने नहीं दिया जाता था। धोती लगाने से रोका गया। तिलक लगाने से रोका गया। शँख बजाने पर उन से घमासान युद्ध छेड़ दिया था। आठ साल की आयु में ब्राह्मण सभा में प्रताड़ित किया गया था।
जगन्नाथपुरी मंदिर में प्रवेश करने नही दिया था।
नदी में नहाने पर कहा कि, गुरु रविदास ब्राह्मणों से ऊपर नदी में नहाकर पानी को अपवित्र करते हैं। नदी में नहाने पर भी राजा के दरबार में पेशी डलबाई थी ? शास्त्रार्थ में, गुरु जी को परास्त करने के लिये, ब्राह्मणों ने मिलकर कई तर्कहीन, बेतुके प्रश्न किये और अंत में पत्थर तैराने की शर्त रखी, जिसमें भी ब्राह्मण बुरी तरह परास्त हुए थे।
अब प्रश्न उतपन होते हैं, ब्राह्मणों ने, सिकन्दर लोदी को, गुरु रविदास के खिलाफ़ क्यों भड़काया ? क्यों झूठे आरोप लगाकर राजाओं, बादशाहों के पास जाने के लिये विवश किया था ? अगर गुरु रविदास जी महाराज हिन्दू थे, तो क्यों उन्हें तुग़लकावाद दिल्ली की, गर्मी से तप्ति जेल में शारीरिक और मानसिक रुप से प्रताड़ित किया था ? क्यों रानी मीराबाई और झालाबाई को गुरु दीक्षा देने पर उन्हें परेशान किया गया ? गुरु रविदास महाराज आदिधर्मी थे, आदिधर्म को ही विकसित किया है और भविष्य में भी आदिधर्म के मसीहा बन कर आएंगे और विधर्मियों को भी अपने ही खण्डे से सजा ऐ मौत भी देंगे।।सोहम।।जय गुरुदेव।।
रामसिंह शुक्ला।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
जुलाई 2, 2020।
गुरु रविदास जी महाराज, धार्मिक क्रान्ति के पुरोधा हुए हैं। उनके जन्म तक, विश्व में केवल राजसत्ता की भूख, राजाओँ और बादशाहों को खून की नदियां बहाने के लिए विवश करती जा रही थी मगर कोई भी माँ का सपूत उन विदेशी बहिशियों के विजयरथ को रोक नहीं पा रहा था, कोई अपनी बेटी को उन्हें नजराने में भेंट करके अपना प्राणों की भीख मांग रहा था, तो कोई धन देकर अपने परिवार को सुरक्षित कर रहा था। कई तो तलबार के भय से, धर्म परिवर्तन करके जान बचा रहे थे, मगर गुरु रविदास जी ने, सिकन्दर लोदी के सिहांसन पर विराजमान हो कर ही, सिकन्दर लोदी को कहा था कि:----
बादशाह सिकन्दर "हिंदू अंधा मुस्लिम काणा"
गुरु रविदास जी महाराज ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया था, ना ही तलबारों का ख़ौफ़ खाया था, ना धन दौलत देकर प्राण बचाए थे, ना किसी के पास आत्मसमर्पण किया था, ना ही हिंदू धर्म को कहा कि, मेरा धर्म हिंदू धर्म है, इसी कारण अपनी वाणी रूपी तलबार से हिंदू और इस्लाम को काट दिया था, वे पूर्ण आदिधर्मी थे, क्योंकि वे कहते हैं:-----
आदि से प्रगट भयो, जा को ना कोउ अंत।
आदिधर्म रविदास का, जाने बिरला सन्त।
गुरु रविदास जी फरमाते हैं, कि आदिपुरुष से ही आदिधर्म प्रकट हुआ है, जिसके बारे में कोई नहीं जानता है। आदिधर्म गुरु रविदास जी का है जिसके बारे में कोई बिरला ही सन्त जानता है अर्थात सन्तों को भी इस सत्य का आभास नहीं है, क्योंकि ये सन्त भी दूसरे ही धर्मों के अनुसार, अपने पेट भरने के लिये उन्हीं के धर्मानुसार, उन्हीं के निर्देशानुसार, उन्हीं की पूजा पद्धति को अपना कर तेतीस करोड़ काल्पनिक देवी और देवताओं का ही गुणगान करते हैं। फिर कुछ धर्म का धंधा करने वाले, गुरु रविदास जी को कहते हैं कि, उन्होंने हिंदू धर्म नहीं छोड़ा था। जब आज भी युरेशयन अछूतों को हिन्दू, ना मॉन कर अपने मन्दिरों में घुसने नहीं देते, अपने मुहल्लों में अछूतों को जूते पहन कर गुजरने नहीं देते, अपने कुओं से पानी पीने नहीं देते, अपनी बेटियों से अछूतों को शादी करने नहीं देते, अछूतों के दूहलों को घोड़ी पर चढ़ कर बारात निकलने नहीं देते, नोकरी करने नहीं देते, यहां तक कि मनुबादी हिन्दू धर्म को ही, अपना धर्म नहीं मानते और सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा देकर कहते हैं कि हिंदू एक विचारधारा है, ना कि हिंदुओं का धर्म, फिर गुरु रविदास जी को किस मुंह से कहते हैं, कि उन्होंने हिन्दू धर्म को छोड़ कर इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं किया था औऱ ना ही सिकन्दर लोदी के पास धर्म बदला था। गुरु रविदास स्वयं कहते हैं, कि हिन्दू तो अंधा है और मुसलमान काणा। वे किसी भी बादशाह के पास कभी नहीं झुके और ना कोई धर्म ही परिवर्तन किया :---
गुरु रविदास जी हिन्दू थे, और मुसलमान नहीं बने थे।
गुरु रविदास जी आदिधर्मी थे, डर से विधर्मी नहीं बने थे।
जब गुरु जी को पूजापाठ ही करने नहीं दिया जाता था। धोती लगाने से रोका गया। तिलक लगाने से रोका गया। शँख बजाने पर उन से घमासान युद्ध छेड़ दिया था। आठ साल की आयु में ब्राह्मण सभा में प्रताड़ित किया गया था।
जगन्नाथपुरी मंदिर में प्रवेश करने नही दिया था।
नदी में नहाने पर कहा कि, गुरु रविदास ब्राह्मणों से ऊपर नदी में नहाकर पानी को अपवित्र करते हैं। नदी में नहाने पर भी राजा के दरबार में पेशी डलबाई थी ? शास्त्रार्थ में, गुरु जी को परास्त करने के लिये, ब्राह्मणों ने मिलकर कई तर्कहीन, बेतुके प्रश्न किये और अंत में पत्थर तैराने की शर्त रखी, जिसमें भी ब्राह्मण बुरी तरह परास्त हुए थे।
अब प्रश्न उतपन होते हैं, ब्राह्मणों ने, सिकन्दर लोदी को, गुरु रविदास के खिलाफ़ क्यों भड़काया ? क्यों झूठे आरोप लगाकर राजाओं, बादशाहों के पास जाने के लिये विवश किया था ? अगर गुरु रविदास जी महाराज हिन्दू थे, तो क्यों उन्हें तुग़लकावाद दिल्ली की, गर्मी से तप्ति जेल में शारीरिक और मानसिक रुप से प्रताड़ित किया था ? क्यों रानी मीराबाई और झालाबाई को गुरु दीक्षा देने पर उन्हें परेशान किया गया ? गुरु रविदास महाराज आदिधर्मी थे, आदिधर्म को ही विकसित किया है और भविष्य में भी आदिधर्म के मसीहा बन कर आएंगे और विधर्मियों को भी अपने ही खण्डे से सजा ऐ मौत भी देंगे।।सोहम।।जय गुरुदेव।।
रामसिंह शुक्ला।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
जुलाई 2, 2020।
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