।।गुरु रविदास महाराज और शव्द सुरत।।
।।गुरु रविदास महाराज और शव्द सुरत।।
गुरु रविदास जी महाराज ने सामाजिक बंधनो के बीच फंसी सँगत को, कुछ समय परम पिता परमेश्वर के निमित लगाने के लिए शब्द-सुरत के महत्व पर भी सँगत को समझाते हुए कहा है:----
।।शव्द मेघ।।
शव्द शव्द जपि मोक्ष पावे। शव्द शव्द बिन छोछा रहावे।। शव्द शव्द जपि जोत हरि जागे।शव्द शव्द बिन रहे अनभागे। शव्द शव्द जप सन्त कहावे। शव्द शव्द बिन असाध सदावे।शव्द शव्द जप तरे तरवाई। शव्द शव्द बिन सिंध डुबाई। शव्द शव्द जप बिन मुख अंतर।शव्द शव्द बिन जूनी फरन्तर। शव्द शव्द जप बने इंसाना। शव्द शव्द बिन है हैवाना। शव्द शव्द जप नीच ते ऊचा। शव्द शव्द बिन उच्च ते नीचा। शव्द शव्द जप बजर तुड़ावहि। शव्द शव्द बिन कुल्फ लगावहि। शव्द शव्द जप गढ़ जीते । शव्द शव्द बिन कोई ना मीते। शव्द शव्द जप कोतवाल डरहे। शव्द शव्द बिन लेखा भरहे।शव्द शव्द जप अनक वकार जाए। शव्द शव्द बिन अघ ताप दोख सताए। शव्द शव्द जप प्रेत भूत दूर हो। शव्द शव्द बिन दरगाह ना मन्जूर हो। शव्द शव्द जप निरधन भरपूर होई। शव्द शव्द बिन सरधन भी कूड़ होई। शव्द शव्द जप रख गुर आसा। शव्द शव्द बिन नाहे रविदासा।
गुरु रविदास जी सँगत को उपदेश देते हुए शव्द की महिमा से परिचित कराते हुए कहते हैं:----
।।शव्द सुरत।।
शव्द सुरत दे नॉल मलाई रेहन दे। छड खलकों प्यार। तोड़ बजर कबाड़। त्रिकुटियों सुरत चलाई रैहन दे।। बजे नोवत नगाड़ा। वेख सुंन दुआरा।मंजन मानसरोवर तराई रैहन दे।।भंवर गुफा सचखंड सोहम सतनाम हँड। सारंगी मुरली बीन बजाई रैहन दे।। अलख अगम ते अनामी गुर मूरत पछानी। गैवी रोशनी दे नाल सुरत जाई रैहन दे।। बिन शव्द कमाई। पूजे धुर धाम जाई।ईशरदास लिव लगी लाई रैहन दे।।
।।शव्द पहाड़ी।।
जिन्दे जग बिच मोहि होई एं। भजन बिन जाएंगी खाली। केहगड़ी गफलत सोई होई एं।भजन बिन जाएंगी खाली। जग बिहूने का मोदन इन मे धरापी जाएं। मिठे लगदे विखे फल जो तिस में खा पी जाएं। विच अबगुण समोई होई ऐं। जग खिड़ीआ बगीचा जो देखदे छड जाणा। इस बाग बगीचे चों हथ नहीं कुझ आणा। काहनूं बाग खपोई होई ऐं। गुजारी उमर बगीचे में पत फुल तेरा नहीं। लखां जगिआं मशालां नी चुकिआ अंधेरा नहीं। तमोगुण च तपोई होई ऐं। कट दो दिन जग विच तूं उड़क छड जाएँगी।कहत कबीर बिना सतिगुर की कुझ, तूँ लभ जाएंगी। खाली हथ खलोई होई ऐं।
।।सोहम।।जय गुरुदेव।।
रामसिंह शुकला।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
जून 30, 2020।
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