।।गऊ पुकार।।

               ।।गऊ पुकार ।।
।।शव्द राग मझार।।
दीनो के नाथ स्वामी तूं आजा आजा आजा ।।गुआउँ तेरियां रुलन चार चफेरे आदि पुरूष कहाँ ला लए डेरे ।।फड़ परना आप चराजा चराजा चराजा ।।आप लिआबो आप छुप जावे ।।घर घराट ना फिर नठाबे।।गल विच संगल पाजा खुलाजा ।।उधर भरन को जेकर जाइए सो सो आगे टेंगे खाइए ।।तरस ना कोई कराजा ना कराजा ।।हकूमत नेहरू आई गऊ गरीब ना तरस कराई ।।हकूमत जुलमी खत्म कराजा कराजा ।।अपने करमा हकूमत करले ।।गऊ गरीब करदे ने तरले।।इनका जतन बनाजा बनाजा ।।सुआमी ईशरदास कहेंदे नेह कलंक कलगीधर जी सुनेदे ।आनंदगढ़ इजलास लगांदा लगांदा ।।
।।भंडाली छंद ।।
जब सी कांशी दे विच रहन्दा,कलसां नाल बहिंदा ।।काम पैन ते गाउँआँ उपजियाँ अज जाई जंगल विच रुल गईंआँ ।।तेरी खुशबू आए निश बासर, आया सी इजलास धर्म मंडल में ।।हमरी माता गुरदेई पछान सकी ना पहरा रोज लगाया ।।अमृत धेन सिर हमारा दोह दोह किसे दलाया।।सम्मत विक्रमी दो हजार सोलह पोह महीना खतम कराया ।मंगल दी रात चढ़ गए बुद्ध रो रो हाल सुनाया।।सुआमी ईशरदास तूं बन बैठा दीवाना अपना भेद छपाया ।।जिला होशियापुर डाक खाना महिलांवाली आनंदगढ़ डेरा ।।असीं रुलदियाँ जंगल माहे आप कदे ना पाया फेरा ।।जे तूं साडा प्रीतम पियारा सार लई छिन आया ।नहीं हुकम दे जाईए बैकुंठ को, नहीं रूलदियाँ गले लगाया ।।सुरग दे मेवे खाने वालिए मत खुआरे पाईआ। फड़फड़ के तोरिया असां नूं उजर ना साडा कोई ।सुधारस पीवण वालिए गन्दे नीर ना ढोई ।।बैकुंठ पुजारी खांदियाँ चँम कचे लूण डाडा।तां भी टेंगे मारदे जोरा कोई ना साडा।।सुआमी ईशरदास नेह कलंक कलगीधर बन बैठा मसीह मैंधी।।पिंड आनंद गढ़ दे विच मैंधी विचरियाँ कस्तूरी खुशबू है पैंदी।।
।। आदि पुरुष की रचना दा शव्द ।।
।।शव्द आशा ।।
असंख भवन दा माली तुंही,आदि पुरुख दा तूँ बाली।सोहं सोहं शव्द विन मुख ते बार ना गया खाली ।।सोहं श्वास श्वास सिमरन से उड गई रात जो काली ।।छती जुगड़े रिहा धुंधकारा ऊँआँ दरस हुआ ना दिन दियाली।।सोहं पलटी के सतगुरु बणिया जिन सतसंग आँण बखाली ।।सत्संग करके अज्ञान अवरण तज झंडा ज्ञान गडाली ।।चुरासी लख जूनी देख सुरत भूल गई हथ काल के आली ।।काल तपसिया करि बहु भारी जुगड़े मल मलाली।।कलजुग माया शैतान मिले तिन ईशर जीव बन्धन में पाली ।।जिस मार्ग में मिलणा दयाल जी सो मारग बन्द कराली ।।बजर के पट बजर का ताला कुंजी कुफ़र दी लाली ।।वेद स्मृति षट शास्त्र रच भुल गए जीव दियाली ।।मन्दिर मसीत गोर तीरथ अनक काल पूजा निज बनाली ।।सुआमी ईशरदास नेह कलंकी बजर तोड़ दियाल दया दिखाली ।।चुरासी लख जूंना दा बन्धन तोड़ के असंख भवन ते किला लगाली ।।जितने फिरके गोर तीरथ मसीत बन्धन तुडाली ।।श्री गुरु आदि प्रगाश बैकुंठी आनंदगढ़ चलाली।।गए भूषण को ढाल कुठाली इको हंस हंसाली।।सुआमी ईशरदास नेह कलंक कलगीधर, अवतार मसीह अमाम मैंधी आलाली ।।जय गुरुदेव जी ।।
राम सिंह शुक्ला ,
हिमाचल प्रदेश ।

Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

।।राम बिन संशय गाँठि न छूटे।।