।सोहम सोहम सोहम सोहम सोहम सोहम सोहम।
।। गुरु रविदास जी और पवित्र "सोहम" शव्द।।
गुरु रविदास जी आदिपुरुष के आदेशानुसार ही, भारत में अवतरित हुए हैं, जिन्होंने, अनादिकाल से चले आ रहे, आदिधर्म और आदिवासियों के दुखों के निवारण के लिये, अपनी दिव्य शक्ति के द्वारा, तत्कालीन निर्दयी राजाओँ, महाराजाओं, बादशाहों को बिना खड़ग, बिना भाल, तीर और तलबार से, उनकी हैवानियत को कत्ल करने के लिए, सोहम शब्द की तीखी धार वाली तलवार का सहारा लिया। जिनकी आंखों पर अहंकार की काली पट्टी चढ़ी हुई थी, वे उस समय भी आदमी की मौत नहीं मरे थे और जो कुछ बच गए थे, बाद में वे भी, उसी तरह नारकीय मौत मरते जा रहे हैं मगर जिन्होंनें "सोहम" शब्द के गूढ़अर्थ को समझ लिया था, वे इस भवसागर में सुखचैन से तैरते रहे, किसी को कोई, दुख रूपी
हिचकोले नहीं लगे, किसी को सांसारिक दुखों ने संतप्त नहीं किया, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण राजा कुंभसिंह और उसका पापी राजकुमार उदय हमारे सामने मौजूद है। गुरु रविदास जी ने राजा कुंभसिंह को "सोहम" का जाम पिलाया था, वह अपने पापों का प्रायश्चित करके बेगमपुरा चला गया था, मगर उसी का राजकुमार उदय, पिता के कत्ल के कारण बुरी तरह बेमौत मरा। जिन जिन ने जालिमों ने आदिपुरुष के प्यारों को सताया, वे कभी सुखी नहीं रहे और जिन्होंनें उसके जीवोँ को सताया उन्हें भी वैसे ही दण्ड दिए, जिस प्रकार फनीयर को गरुड़ पटक पटक कर मारता है। इन सभी दुखों का निःसतारा केवल "सोहम" शब्द से ही संभव है, जो इस का सम्मान ना करके अपमान कर रहे हैं, वे गोलियों का ही शिकार होते रहेंगे। गुरु रविदास जी ने, स्वार्थी, लालची गुरूओं के शोषण से सँगत को, निजात दिलाने के लिए इस पावन शब्द को जगजाहिर भी कर दिया है, जिसका वर्णन वे करते हैं:-----
।।दोहा।।
ओङ्ग, सोहंग, ओम, सतिनाम, बिन मुख जिन्हें जपया।
कहे रविदास गुरमुख से, तिन आदिपुरख लिव लाया।।
गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, जिन्होंनें ओङ्ग सोहंग, ओम, सतनाम, मुंह होंठ हिलाए बिना, इन शब्दों के साथ सुरती को समरस किया है, उन्होंने ही आदिपुरख का ध्यान लगाया है, गुरु रविदास जी, गुरमुख अर्थात सच्चे गुरु के शिष्य को बताते हैं, केवल ऐसे ही गुरुमुखों की लगन प्रभु से लगती है।
गुरु रविदास जी महाराज, तर्कसम्मत ढंग से समझाते हैं कि, स्वाधीनता, मन्दिरों, मस्जिदों, गुरुदुआरों, चर्चो और मठों में बैठ कर कभी नहीं मिलती, ना जंगलों में रह कर शरीर को यातनाएँ देकर सुख शांति मिलती है, ना किसी अखाड़े में बैठ कर सत्य के दर्शन होते हैं, ना परिवारों को त्याग कर पत्नी वच्चों को असहाय, लाचार छोड़ कर प्रभु मिलन होता है, जो ऐसा करते है, कहते हैं, वे केवल सँगत को गुमराह करते हैं, परम पिता परमेश्वर के वच्चों को दुखों में डालते हैं और इसके सिवाए कुछ नहीं करते। गुरु रविदास जी सभी गुलामियों को नेशतनाबूद करने के लिये केवल ""सोहम"" शव्द को ही मुक्ति का मार्ग बताते हैं, क्योंकि, जिसके अंदर ये शब्द निवास करता है, उसे कोई गुंडा ना तो छू सकता है, ना कोई गोली से मार सकता, ना कोई जादू टोना, कर सकता, गुरु जी ने अति गरीबों, मजलूमों के लिये पवित्र शब्द ही ओपन करके घर घर पहुँचा दिया है:----
।।सोहम शव्द।।
सोहम सोहम जप लै, सोहम सोहम जाप।
सोहम सोहम सोहम जपदे, लभ लवैंगे आप।।
उठत बैठत जागत सोवत जपिआ सोहम जाप।
गुर ऐनक में नैन रचे, तिस कोल वसै हरि आप।।
सोहम सोहम श्वास श्वास जप तूँ, श्वास मलाऐ।
इक वी श्वास सखणा ना जावत, कहि रविदास समझाऐ।।
गुरु रविदास जी गुरुमंत्र की अनुपम भेंट, सँगत को अर्पण करते हुए फरमाते हैं कि, आप घर बैठ कर ही सोहम सोहम जप लो, जब आप सोहम सोहम का जाप करते हैं, वे अर्थात आदिपुरख, खुद ही ढूंढते हुए आप के पास चले आते हैं, आपको किसी जंगल में जा कर भूख से प्रताड़ित होने की आवश्यकता नहीं है। गुरु जी ने ये कभी नहीं कहा है, कि आप हर रोज मेरा सत्संग सुनने मेरे पास आओ। सत्संग घरों में आकर अपनी दिहाड़ी मजदूरी बर्बाद करो। गुरु घरों में आने के लिए, अपने हक हलाल की कमाई, बसों में किराए के रूप में बर्बाद करो। आप जहां भी चाहो, वहीं रहो, वहीं उठते-बैठते, सोते-जागते, सोहम सोहम, हंसा प्रणायाम करते रहो, जिससे एक तो शारीरिक में आक्सीजन की मात्रा बढ़ जाएगी जिससे रोगों से मुक्ति मिलेगी, दूसरी आदिपुरख से भी लिव लग जाएगी। जिसकी गुरु रूपी ऐनक में, आपके आंखों की ज्योति समा जाती है अर्थात विलीन हो जाती है, उसी पवित्र आदमी की आत्मा में, आदिपुरुष निवास करते हैं। गुरु रविदास जी फरमाते हैं कि, हे बन्दे ! प्रत्येक सांस के साथ, तूँ मन में सोहम सोहम करता चल, गुरु रविदास जी ये कह कर समझा रहे हैं, कि आप का एक भी सांस खाली नहीं जाना चाहिए अर्थात, प्रत्येक श्वास के साथ साथ, इंसान को सोहम जाप करते रहना चाहिए, यही सुखी जीवन का मूल मंत्र है।
।।सोहम।।जय गुरुदेव।।
रामसिंह शुक्ला।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
जुलाई 1, 2020।
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