60।।लार्ड लोथियन और डाक्टर भीमराव अंवेदकर।।
।।लार्ड लोथियन और डाक्टर भीमराव अंवेदकर।।
चार मार्च सन 1932 को फ्रेंचाइज कमेटी ने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता शुरू कर दी। लार्ड लोथियन के आदेशानुसार पुलिस ने आंदोलनकारियों को छाया में बैठा दिया।मंगूराम जी अध्यक्ष पंजाव आदिधर्म मण्डल, महासचिब हजारा राम बीडीओ, मिस्त्री लभूराम, सेठ सुंदर दास,भगत गुलाबा राम, श्री गणेश दलपति, सन्तराम आजाद, हकीम प्रताप चंद, हरनाम दास जंडाली, श्री साहिबा राम, खड़कू राम जमादार, किरपा राम जी, सुंदर सिंह, गुरदित जी, लाल चंद, पूर्ण चंद रमता, भुल्ला सिंह फौजी असेंबली हाल में चले गए।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्मों के प्रतिनिधियों से वही सवाल पूछे जिन की कल्पना डाक्टर भीमराव अंवेदकर ने की थी।लोथियन ने सभी से पूछा, कि आप कौन हैं, आप का धर्म क्या है, आपके अवतार कौन कौन हैं, आपके धर्म ग्रँथों के क्या नाम हैं और अपने अपने धर्म ग्रँथ भी दिखाओ, आपके ध्यान लगाने वाले पवित्र शव्द क्या क्या हैं। सभी ने ये उतर बड़ी आसानी से दे दिए।उनके बाद मंगू राम जी से भी लोथियन ने सवाल पूछने शुरू किये।
पहला सवाल:----आप कौन हो?
जबाव हम आदिधर्मी है।
लोथियन का सवाल। आदिधर्मी का क्या अर्थ है
जबाब:--- हम भारत के असली वाशिंदों की औलाद हैं, इसीलिये हम आदिवासी,मूलनिवासी और आदिधर्मी। हैं।हिन्दू तिब्बत और एशिया से आए हुए हैं।मुसलमान अरब देशों से आए हुए हैं।ये हिन्दू मुसलमान सिख दो जन्मे हैं, हम सभी आदिवासी, आदिधर्मी एक जन्मे हैं।
लोथियन का प्रश्न:----- ये हिन्दू, मुस्लिम, सिख दो जन्मे किस प्रकार हैं
हमारा जबाब:-----तीनों ही एक बार माँ के गर्भ से जन्म लेते हैं,उसके बाद जब हिन्दू जनेऊ धारण करता है,तब पक्का हिन्दू बनता है, जब मुसलमान खतना करबाता है, तब पक्का मुस्लिम बनता है, जब सिख पाँच कक्के धारण करके अमृत छकता है,तब पक्का सिख बनता है।हम एक बार माँ के गर्भ से जन्म लेते हैं,उसके बाद कोई आडंबर नहीं करते हैं,हम तो परमात्मा के उसूलों के मुताबिक जिस शक्ल में पैदा होते हैं,उसी में रह कर मर जाते हैं।
लोथियन का प्रश्न:-----आपका धर्म क्या है ?
हमारा जबाब:------ हमारा धर्म, आदिधर्म है क्योंकि हम इस देश के आदिवासी हैं।
सिखों का हस्ताक्षेप:-----सर इन लोगों में से कुछ लोग गुरु ग्रँथ साहिब को मानते हैं,विवाह शादी के समय गुरु ग्रँथ साहिब में से आनंद कारज पढ़ते हैं,इसलिये इनकी गिनती आधी सिखों में की जाए।
हमारी ओर से जबाब। सर ना हम आनंद कारज पढ़ते हैं,ना ही सहजधारी सिख हैं,गुरु ग्रँथ साहिब को हम इसलिये नमस्कारी करते है, कि उसमें हमारे आदि गुरूओं गुरु रविदास जी महाराज, ऋषि वाल्मीकि जी, सतगुरू कबीरजी, सतगुर नामदेब जी, सतगुरू सेन जी, की वाणी है।
मुस्लिमों की ओर से जबाब:---- सर इन लोगों में से कुछ कुरान को मानते हैं,और नमाज पढ़ते हैं, मुर्दों को दफनाते हैं इसलिये इनकी गिनती आधी मुसलमानों में की जाए।
हमारा जबाब:---- सर हम ना नमाज पढ़ने के आदि हैं, ना ही मुर्दे दफनाते हैं,केवल मुसलमान अपने गांवों के समीप बसने वाले अछूतों को डरा धमका कर अपने पीछे लगा लेते हैं,हिन्दू और सिख भी अपने गांवों के समीप बसने वाले अछूतों को अपने रिवाजों के अनुसार डरा धमका कर अपने पीछे लगा लेते हैं।
हिंदुओं की ओर से जबाब:----सर ये लोग हमारे वेदों को मानते हैं, विवाह शादी के समय वेदों के फेरे लेते हैं, इसलिये ये सारे हिन्दू ही हैं।इनकी गिनती के हकदार हिंदुओं के बिना कोई नहीं है।इसलिये इन सब की गिनती हिंदुओं में ही की जाए, इन के हकदार केबल हम ही हैं।
चार मार्च सन 1932 को फ्रेंचाइज कमेटी ने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता शुरू कर दी। लार्ड लोथियन के आदेशानुसार पुलिस ने आंदोलनकारियों को छाया में बैठा दिया।मंगूराम जी अध्यक्ष पंजाव आदिधर्म मण्डल, महासचिब हजारा राम बीडीओ, मिस्त्री लभूराम, सेठ सुंदर दास,भगत गुलाबा राम, श्री गणेश दलपति, सन्तराम आजाद, हकीम प्रताप चंद, हरनाम दास जंडाली, श्री साहिबा राम, खड़कू राम जमादार, किरपा राम जी, सुंदर सिंह, गुरदित जी, लाल चंद, पूर्ण चंद रमता, भुल्ला सिंह फौजी असेंबली हाल में चले गए।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई धर्मों के प्रतिनिधियों से वही सवाल पूछे जिन की कल्पना डाक्टर भीमराव अंवेदकर ने की थी।लोथियन ने सभी से पूछा, कि आप कौन हैं, आप का धर्म क्या है, आपके अवतार कौन कौन हैं, आपके धर्म ग्रँथों के क्या नाम हैं और अपने अपने धर्म ग्रँथ भी दिखाओ, आपके ध्यान लगाने वाले पवित्र शव्द क्या क्या हैं। सभी ने ये उतर बड़ी आसानी से दे दिए।उनके बाद मंगू राम जी से भी लोथियन ने सवाल पूछने शुरू किये।
पहला सवाल:----आप कौन हो?
जबाव हम आदिधर्मी है।
लोथियन का सवाल। आदिधर्मी का क्या अर्थ है
जबाब:--- हम भारत के असली वाशिंदों की औलाद हैं, इसीलिये हम आदिवासी,मूलनिवासी और आदिधर्मी। हैं।हिन्दू तिब्बत और एशिया से आए हुए हैं।मुसलमान अरब देशों से आए हुए हैं।ये हिन्दू मुसलमान सिख दो जन्मे हैं, हम सभी आदिवासी, आदिधर्मी एक जन्मे हैं।
लोथियन का प्रश्न:----- ये हिन्दू, मुस्लिम, सिख दो जन्मे किस प्रकार हैं
हमारा जबाब:-----तीनों ही एक बार माँ के गर्भ से जन्म लेते हैं,उसके बाद जब हिन्दू जनेऊ धारण करता है,तब पक्का हिन्दू बनता है, जब मुसलमान खतना करबाता है, तब पक्का मुस्लिम बनता है, जब सिख पाँच कक्के धारण करके अमृत छकता है,तब पक्का सिख बनता है।हम एक बार माँ के गर्भ से जन्म लेते हैं,उसके बाद कोई आडंबर नहीं करते हैं,हम तो परमात्मा के उसूलों के मुताबिक जिस शक्ल में पैदा होते हैं,उसी में रह कर मर जाते हैं।
लोथियन का प्रश्न:-----आपका धर्म क्या है ?
हमारा जबाब:------ हमारा धर्म, आदिधर्म है क्योंकि हम इस देश के आदिवासी हैं।
सिखों का हस्ताक्षेप:-----सर इन लोगों में से कुछ लोग गुरु ग्रँथ साहिब को मानते हैं,विवाह शादी के समय गुरु ग्रँथ साहिब में से आनंद कारज पढ़ते हैं,इसलिये इनकी गिनती आधी सिखों में की जाए।
हमारी ओर से जबाब। सर ना हम आनंद कारज पढ़ते हैं,ना ही सहजधारी सिख हैं,गुरु ग्रँथ साहिब को हम इसलिये नमस्कारी करते है, कि उसमें हमारे आदि गुरूओं गुरु रविदास जी महाराज, ऋषि वाल्मीकि जी, सतगुरू कबीरजी, सतगुर नामदेब जी, सतगुरू सेन जी, की वाणी है।
मुस्लिमों की ओर से जबाब:---- सर इन लोगों में से कुछ कुरान को मानते हैं,और नमाज पढ़ते हैं, मुर्दों को दफनाते हैं इसलिये इनकी गिनती आधी मुसलमानों में की जाए।
हमारा जबाब:---- सर हम ना नमाज पढ़ने के आदि हैं, ना ही मुर्दे दफनाते हैं,केवल मुसलमान अपने गांवों के समीप बसने वाले अछूतों को डरा धमका कर अपने पीछे लगा लेते हैं,हिन्दू और सिख भी अपने गांवों के समीप बसने वाले अछूतों को अपने रिवाजों के अनुसार डरा धमका कर अपने पीछे लगा लेते हैं।
हिंदुओं की ओर से जबाब:----सर ये लोग हमारे वेदों को मानते हैं, विवाह शादी के समय वेदों के फेरे लेते हैं, इसलिये ये सारे हिन्दू ही हैं।इनकी गिनती के हकदार हिंदुओं के बिना कोई नहीं है।इसलिये इन सब की गिनती हिंदुओं में ही की जाए, इन के हकदार केबल हम ही हैं।
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