49।।आदिधर्म मडल की स्थापना।।

।।आदिधर्म मण्डल की स्थापना।।
साहिब मंगूराम मुगोबाल, गाँव मुगोबाल,समीप गढ़शंकर, पंजाब के निवासी थे।उनके पिता हरनाम दास चमड़े के व्यापारी थे।वे मंगू राम को अंग्रेजी की शिक्षा देना चाहते थे क्योंकि जब चमड़े की बिल्टी आती थी तो उसे पढ़ने में उन्हें मुश्किल हुआ करती थी।मंगू राम जी को जब छटी कक्षा में होशियारपुर के समीप उच्च विद्यालय बिजबाड़ा में प्रवेश दिलाया गया तो वहां टीचर ने भारी वारिश औऱ तूफान के बीच कमरे में घुसने पर,उन्हें पशुओं की तरह पिटाई की जिससे वे स्कूल नही गए और अमेरिका, नोकरी करने चले गए।वहां वे फल तोड़ने का काम करने लगे।एक दिन उनकी भेंट लालां हरदयाल जी से ही गई जो रास विहारी बोस के साथ ग़द्दर पार्टी में भारत को आजाद कराने केलिये समाज को तैयार कर रहे थे।पार्टी का अखबार गद्दर छपता था जिसके क्रांतिकारी लेखों ने साहिब मंगू राम को भी पार्टी के साथ जुड़ने केलिये विवश कर दिया।वे पार्टी कार्यालय में रास विहारी बोस के क्रांतिकारी भाषण सुन कर क्रांतिकारी बनते गए।उनकी कार्यकुशलता से प्रभावित होकर उन्हें छापेखाने ने कंपोजिंग का कार्य भी दे दिया गया,जिससे उन्हें औऱ क्रांतिकारी लेखों, कविताओं को पढ़ने का सुअवसर मिला।
इसी बीच रास विहारी बोस ने एक जहाज़ अस्त्रों का भर कर अमेरिका से भारत के योद्धाओं केलिये भेजा जिसके नायक साहिब मंगू राम को बनाया गया।वे जहाज को लेकर भारत की ओर चल पड़े।जब जहाज़ अस्त्र लेकर चल पड़ा तो कुछ भारतीयों ने ही इसकी सूचना अमेरिकन पुलिस को देदी।जिसके कारण, उन्हें समुंद्री रास्ते मे जहाज़ सहित गिरफ्तार कर लिया औऱ मंगूराम जी को साथियों सहित इला टापुओं की कत्लगाह में ठूंस दिया गया ।जल्दी ही जन्हें तोफ के सामने गोले से उड़ाने का फरमान जारी हो गया मगर रास विहारी बोस के प्रयास से उन्हें जंगलों की ओर निकाल दिया जहां वे चार वर्षों तक वनमानुषों के साथ रहे। डेथ बारन्ट के समाप्त होने पर भारत आ गए ।
अमेरिका के खुले वातावरण में रहने के कारण वे गाँव मे घुटन अनुभव करने लगे।एक दिन उनके घर की औरतें घास काट रही थी जिनके काटे घास को जाट जबरन उठाकर अपने घर ले गया।जिससे आहत होकर वे वकील के पास गए और पूछा, हम जमीन किस प्रकार खरीद सकते हैं।वकील ने कहा ,सन 1911 के भूमि अराजी एक्ट के अनुसार आप के नाम जमीन नहीं हो सकती,आप अपना कोई और नाम रख लें तो जमीन आप खरीद सकते।
साहिब मंगू राम जी सारे भारत का दौरा किया और 11--12 जून 1926 को अपने गाँव मे अछूतों का सम्मेलन बुलाया जिसमे हजारों अछूतों ने भाग लेकर पंजाब आदिधर्म मंडल की स्थापना करके पचासी प्रतिशत मूलनिवासी अछूतों को आदिधर्म में समाहित होने का आंदोलन शुरू किया जिसने अंग्रेज सरकार से आरक्षण लेकर 1936-1937 के असेंबली चुनाबों में भाग लेकर खुद भी चुनाब जीते औऱ आदिधर्म मंडल के भी आठ विधायक जिताए, एक आजाद विधायक आदिधर्म मडल में शामिल हो गया।लार्ड लोथियन जब लाहौर आया तो वहां भी प्रदर्शन करके जमीन का अधिकार लिया।शिक्षा का अधिकार लेकर दो बैच टीचरों के निकलवाए जो केवल अछूत ही थे।इस प्रकार साहिब मंगू राम ने आदिधर्म को दुबारा जीवित करके हमें स्वतन्त्र कराया था।जय गुरुदेव।
रामसिंह शुक्ला
अध्यक्ष ।
विश्व आदिधर्म मण्डल।
नोट। साथियो वहुजन राज की स्थापना केलिये 85 प्रतिशत वहुजन, मूलनिवासी समाज का एक ही धर्म होना जरूरी हैँ और वह केवल आदिधर्म ही सबको मंजूर हो सकता है, जिसके प्रचार परसार केलिए ही काम करे जातियों के आधार पर हमें वहुजन राज की कल्पना बेमानी ही हैँ. 

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