42 ।।कलाम कब्बाली।।

            ।।कलाम कब्बाली।।
विच दोजक दे ना जामा मैं।दस किवें बहिश्त को पामा मैं।
दोजक दे विच भाँबड़ मचदा।जियड़ा सुन सुन जांदा खपदा।।रोज रोज दी क़ियामत ते छुट जामा मैं।दस किवें बहिश्त को पामा मैं।
बहिश्त जाण वाली मिलदी ना चाली।अकल मेरी हो गई खाली ।किस किस नूं पूछ पुछाँबां मैं।दस किवें बहिश्त को पामा मैं।।
कै रोजे रख नमाज गुजाराँ।मौलवी काजी ना देंवें सहारा।कै रोज काबे दे जामा मैं।दस किवें बहिश्त को पामा मैं।।
पढ़ पढ़ किताबां दे दे बांग गुजाराँ ।कै कुरान शरीफ दा पढ़ा छपाराँ ।कै गोरीं सिजदा करामा मैं।दस किवें बहिश्त को पामा मैं।।
इह तो सब ही कीनो कारे।अल्ला दे ना होए दीदारे।किदां भेद किताबों पामा मैं।दस किवें बहिश्त को पामा मैं।।
पढ़ियाँ किताबां समझ जरा ना आई।मुरशद बांझ भेद ना पाई।ईशरदास किस मुरशद वल जामा मैं।दस किवें बहिश्त को पामा मैं।।
।।कलाम कब्बाली।।ताल ३।।
जब हुन मुरशद पाई लिया ,रोजा रोज दा रखाई लिया।मुरशद पंज नमाजां पढाईयाँ ।हक हलाल दियाँ खैर खुदाइयाँ।नियतां साफ सुना दियाँ।जब-----।
मुरशद ऐसा कलमा पढ़ाया।बाहद हुतल अल्ला नजरोँ आया।गेंन का पड़दा उठा लिया।जब---।
लैहमक लैहमी कलमा होवे।इक लैहम ना कलमा खड़ोवे।बातन चरखड़ा चलाई दिया।जब-----।
तज गया लोटा जलिया मुसला।तसबीह आसा सोटा छूट चला।इको बसल पियाला पलाई दिया।जब -----।
देहरे मसीति आना जाना मुकिया ।काबे मदीने मेरा जाणा छुटिया।मेरे घर में काबा बनाई दिया।जब----।
होर किसे नूं की सुनामा मैं।सच कहां तां काफर सदामा।ईशरदास पर रौला पाई दियाँ।जब ----।

Comments

Popular posts from this blog

गुरु रविदास जी की क्रांतिकारी वाणी दोधारी है।

क्रांतिकारी शूरवीर गुरु रविदास जी महाराज।।

।।राम बिन संशय गाँठि न छूटे।।