41।।बहिश्तनामा।।
।।बहिश्तनामा।।
हजूर परम पिता सुआमी ईशरदास जी महाराज ने बहिश्तनामा बिच हिन्दू अते मुसलमाना प्रति भरमजाल दरशाया है। हिन्दू परमात्मा नूं राम कहिन्दे हन अते मुस्लिम खुदा कहिन्दे हन। इह दोनों ही भरम भुलेखे विच पए होए हन। जद कि असीं परमात्मा नूं प्रेम करके कई नामा नाल याद करदे हन। जिवें इक छोटे बच्चे दे प्रेम विच असीं कई नाम रख लैंदे हन। ऐथे असीं मझवां जातां विच फसे बैठे हन। परमात्मा ही खुदा है, राम है, रहीम है, ईश्वर है, परमेश्वर है, गॉड आदि नाँ हन। सुआमी जी कहिन्दे हन हिन्दू अंधे अते मुस्लिम काणे हन। हिन्दू जदों राम पुकारदे हन तां मुसलमान हसदे हन। जदों मुस्लिम खुदा कहिन्दे हन तां हिन्दू मजाक उड़ादे हन। असल विच परमात्मा कहि लओ, राम कहि लओ, खुदा कहि लओ, परमात्मा सब दा इको ही है। इह दुनियां भरमा विच पई होई है। इस प्रति सुआमी जी ने बहिश्तनामा लिखया है।
निवेदक,
संगत सिंह।
आदि दुआरा आनंदगढ़-महिलांवाली।
।।कलाम कब्बाली।।
चार अल्ला दे यार जो आए। पता नही हैं इह कहाँ को जाए। रहे ना अल्ला दे जो जानी है।बन्दे झूठी तेरी जिंदगानी है।
पीर पैगंबर शाह सुल्ताना चले गए, सब छोड़ मकानाँ। गए मुहंम्मद रच के कुरानी है। खाकी झूठी तेरी जिंदगानी है।
ईशा मूशा शाह सिकन्दर। छोड गए सब सुन्ने मन्दर, गए इब्रा अमामां हसन हुसानी है। खाकी झूठी तेरी जिंदगानी है।
कुतुबशाह अली बा चले गए बलि बलि चले यूशफ अली हट बकानी है। खाकी झूठी तेरी जिंदगानी है।
सुन्नीआँ पइयाँ बाराँ दरिआँ छोड गए सब परिंदे, परिआं छड गईआं तख्त बोह सुलेमानी है।खाकी तेरी झूठी तेरी जिंदगानी है।
खल खलील ईशा जो मन्सूरा। इस जगत हो गए जरुरा। होर वहुत गिने ना जानी है। खाकी झूठी तेरी जिंदगानी है।
निवेदक,
संगत सिंह।
आदि दुआरा आनंदगढ़-महिलांवाली।
।।कलाम कब्बाली।।
चार अल्ला दे यार जो आए। पता नही हैं इह कहाँ को जाए। रहे ना अल्ला दे जो जानी है।बन्दे झूठी तेरी जिंदगानी है।
पीर पैगंबर शाह सुल्ताना चले गए, सब छोड़ मकानाँ। गए मुहंम्मद रच के कुरानी है। खाकी झूठी तेरी जिंदगानी है।
ईशा मूशा शाह सिकन्दर। छोड गए सब सुन्ने मन्दर, गए इब्रा अमामां हसन हुसानी है। खाकी झूठी तेरी जिंदगानी है।
कुतुबशाह अली बा चले गए बलि बलि चले यूशफ अली हट बकानी है। खाकी झूठी तेरी जिंदगानी है।
सुन्नीआँ पइयाँ बाराँ दरिआँ छोड गए सब परिंदे, परिआं छड गईआं तख्त बोह सुलेमानी है।खाकी तेरी झूठी तेरी जिंदगानी है।
खल खलील ईशा जो मन्सूरा। इस जगत हो गए जरुरा। होर वहुत गिने ना जानी है। खाकी झूठी तेरी जिंदगानी है।
अनुबादक।
रामसिंह आदवंशी।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
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