62 ।।गुलाम आदिधर्मी को निर्देश।।
।। गुलाम आदि धरमी को निर्देश।।
।।बैत ।।
आदि धर्मिया अजे भी जाग ,सुतिया लुट पुट के लै गए होर तैंनूं ।रिहा महल उसारदा उन्हां दे तूँ जिनि कर छडिया कमजोर तैंनूं।बुतपरस्तियाँ खा लिया भरम भरिया बना दिता ने अंतक गैर तैंनूं ।सँगल वेद कतेब दे पा पैरीं आदिधरमी पिछे लाई के रखिया तोर तैंनूं ।
।।बैंत ।।
खलां बांग तूँ रिहा फोक आदि धरमी कड लिआ ने असली तेल विचों ।फल तोड़ के लै गया होर कोई,रह गई सखनी पई ने वेल विचों ।इम्तिहान सतबंजा दा गया हो हुशियार होंबी ना फेल विचों ।झंडा आदि प्रगाश दा चक के निकल वेद कतेब दी जेल विचों।
।।बैंत ।।
जो जो गुरु रविदास नूं मनण वाला कसम खा के कर लै दान धरमी ।गुरु आदि प्रगाश वाणी गुरां वाली बन गई धरम दी कमान धरमी ।।गुरु आदि प्रगाश छपबा हो जाए,बण जाई कौम दी शान धरमी ।बुत बहकदे पए ने थां थांइं, पै जाउ सब मे जान धरमी ।
।।बैत।।
इस मुलख दा असली बसिन्दा आदि धरमी अज तड़फड़दा फिरदा तूँ दांनियाँ नूं ।।धरम मंदिरां उत्ते हक है ना,धक्के झिड़कां पेंदे ने निमाणियाँ नूं ।।तेरे पुरखों ने नमा लईआं चारों कुंटां, अज मथे टेके अंधे कांनिआँ नूं।।फड़ हथ तीर कमान गुरु रविदास गुरु दी,जिन नमा लिया राजे राणिआ नूं।।
।।बैंत ।।
हथों गुरु आदि प्रगाश नूं दान करके बन जाऊगा इक तों लख धरमी ।जड़ लगदी है इस देश विच तेरी ,अज हथ ना तेरे कख धरमी।।किसे रोज नूं हो जाए देश वाला गल सन्ता दी लबिं परख आदि धरमी ।।वस्तु किसे दी उत्ते तूँ मेलदा ए बना अपनी आपे रख आदि धरमी।
।।बैं त।।
जिस कौम दा धार्मिक नहीं लिटरेचर सो कौम जगत बरबाद हुन्दी।।धार्मिक ग्रंथ धार्मिक होइ मन्दिर गरीब कौम भी सदा आवाद हुन्दी।।आदि पुरुख ,गुरु आदि प्रगाश सिमरो, संगल टूट गुलामी आजाद हुन्दी।।जिहड़ा भुल्ला बैठा धर्म भगबान ताई दुनियां विच ना उह दी मनियाद हुन्दी।।
।।बैं त ।।
मूसा जन्मिआ गरीब घराणिआ में तप करके तौरतेय तैयार किती ।।धरम मन्दिर बताली वर्ष गया बनियां हकूमत तौरतेय ने बेसुमार किती।।सुलतान दाऊद मजंबूर करके रुलदी कौम जंबूर हुशियार किती।।इंजील यीशु मसीह बनाया जिहड़ा चौदह मुलख अंगरेजां इख्तियार किती ।।
।। बैंत ।।
चौथी कुरान कतेब मुहम्मद वाली जिन दीन इस्लाम नूं बनाया ई ।।अफगानिस्तान तुर्कस्तान दुआ तीआ बलोचस्तान उपजान आई ।।चौथे भारत पाकिस्तान होया नक हिन्दू धर्म दा भनिया ई।।आए एशिया ते आरियन कौम हिन्दू वेद सिमरती अछूत नूं फ़ंदिया ई।।
।। बैंत ।।
गुरु ग्रंथ,गुरु आदि दुआरा धर्म सिखन का कई रियासतां सूबा पंजाब दसदे ।।बाहरों आके मलके देश वह गए जिन्हा दा मुलख उन्हां नूँ अजाब दसदे ।।आदि धर्मिया आदि बसिंदियाँ ई बनके शेर हुन लोकां नूं लाभ दस दे।।फड़ के गुरु आदि प्रगाश दी तेग हथ विच,कहे दास तूं करके हिसाब दस दे ।।
।।बैं त ।।
पिआ अंधेर आदि नसल तांईं पिछले बुझ गए बलदे गैस लिटरेचर ।।आए भन्ने इतिहास गैर गैरां चक्के गए हुनर दे लिटरेचर ।।होइ गुरां दी मेहर मुड़ फिर बणिया गुरु आदि प्रगाश है गैस लिटरेचर ।।जाऊ चुकिया मुल्कों अंधेर सारा जगाऊ आदि प्रगाश गैस लिटरेचर।।
।।बैं त ।।
जांदे होरनां दे कुएं भरण पाणी, किते आपणा सुगड़ा भी ला बैठो ।।करो सरोबर सोहणे इस्नान जाके माड़ी छप्पड़ी आपणी भी बना बैठो ।।शीश मन्दिर पूजदे दूजे दे जा, कोई घर दी झूँगी भी बना बैठो ।।आदि धर्मियो समझ सोच बैठो बिना आपणे कंम ना आ बैठो ।।
।।बैंत।।
गल होरनाँ कौम दी इह बहुत चंगी खिमा बन्दगी धर्म दे करन वाली ।।जुआ खेलदे ना जीव मारदे ना हकां परायां नूं हरन वाली।। दर वेशवा ना देखन जानदे, अते चोरियां भी ना करन वाली।।बिना ईष्ट तों खाली नजर आवे गल होरनी दे खूब हैं तरण वाली ।।
।।बैंत ।।
जेकर कौम दी उन्नति करनी, चाहो गुरु आदि प्रगाश नूं पढ़ो भाई ।।रखो धार्मिक कमान अगाड़ी फिर हकां हकूकां नूं लड़ो भाई।।भव तरने नूं बणिया जहाज भारी उतारना पार इस ते चढ़ो भाई।।आदि प्रगाश जहाज जे छड दिता ढुंहगे पानियाँ दे विच हड़ो भाई ।।
जय गुरुदेव जी ।।
राम सिंह शुकला ।
अध्यक्ष,
विश्व आदिधर्म मंडल।।
।।बैत ।।
आदि धर्मिया अजे भी जाग ,सुतिया लुट पुट के लै गए होर तैंनूं ।रिहा महल उसारदा उन्हां दे तूँ जिनि कर छडिया कमजोर तैंनूं।बुतपरस्तियाँ खा लिया भरम भरिया बना दिता ने अंतक गैर तैंनूं ।सँगल वेद कतेब दे पा पैरीं आदिधरमी पिछे लाई के रखिया तोर तैंनूं ।
।।बैंत ।।
खलां बांग तूँ रिहा फोक आदि धरमी कड लिआ ने असली तेल विचों ।फल तोड़ के लै गया होर कोई,रह गई सखनी पई ने वेल विचों ।इम्तिहान सतबंजा दा गया हो हुशियार होंबी ना फेल विचों ।झंडा आदि प्रगाश दा चक के निकल वेद कतेब दी जेल विचों।
।।बैंत ।।
जो जो गुरु रविदास नूं मनण वाला कसम खा के कर लै दान धरमी ।गुरु आदि प्रगाश वाणी गुरां वाली बन गई धरम दी कमान धरमी ।।गुरु आदि प्रगाश छपबा हो जाए,बण जाई कौम दी शान धरमी ।बुत बहकदे पए ने थां थांइं, पै जाउ सब मे जान धरमी ।
।।बैत।।
इस मुलख दा असली बसिन्दा आदि धरमी अज तड़फड़दा फिरदा तूँ दांनियाँ नूं ।।धरम मंदिरां उत्ते हक है ना,धक्के झिड़कां पेंदे ने निमाणियाँ नूं ।।तेरे पुरखों ने नमा लईआं चारों कुंटां, अज मथे टेके अंधे कांनिआँ नूं।।फड़ हथ तीर कमान गुरु रविदास गुरु दी,जिन नमा लिया राजे राणिआ नूं।।
।।बैंत ।।
हथों गुरु आदि प्रगाश नूं दान करके बन जाऊगा इक तों लख धरमी ।जड़ लगदी है इस देश विच तेरी ,अज हथ ना तेरे कख धरमी।।किसे रोज नूं हो जाए देश वाला गल सन्ता दी लबिं परख आदि धरमी ।।वस्तु किसे दी उत्ते तूँ मेलदा ए बना अपनी आपे रख आदि धरमी।
।।बैं त।।
जिस कौम दा धार्मिक नहीं लिटरेचर सो कौम जगत बरबाद हुन्दी।।धार्मिक ग्रंथ धार्मिक होइ मन्दिर गरीब कौम भी सदा आवाद हुन्दी।।आदि पुरुख ,गुरु आदि प्रगाश सिमरो, संगल टूट गुलामी आजाद हुन्दी।।जिहड़ा भुल्ला बैठा धर्म भगबान ताई दुनियां विच ना उह दी मनियाद हुन्दी।।
।।बैं त ।।
मूसा जन्मिआ गरीब घराणिआ में तप करके तौरतेय तैयार किती ।।धरम मन्दिर बताली वर्ष गया बनियां हकूमत तौरतेय ने बेसुमार किती।।सुलतान दाऊद मजंबूर करके रुलदी कौम जंबूर हुशियार किती।।इंजील यीशु मसीह बनाया जिहड़ा चौदह मुलख अंगरेजां इख्तियार किती ।।
।। बैंत ।।
चौथी कुरान कतेब मुहम्मद वाली जिन दीन इस्लाम नूं बनाया ई ।।अफगानिस्तान तुर्कस्तान दुआ तीआ बलोचस्तान उपजान आई ।।चौथे भारत पाकिस्तान होया नक हिन्दू धर्म दा भनिया ई।।आए एशिया ते आरियन कौम हिन्दू वेद सिमरती अछूत नूं फ़ंदिया ई।।
।। बैंत ।।
गुरु ग्रंथ,गुरु आदि दुआरा धर्म सिखन का कई रियासतां सूबा पंजाब दसदे ।।बाहरों आके मलके देश वह गए जिन्हा दा मुलख उन्हां नूँ अजाब दसदे ।।आदि धर्मिया आदि बसिंदियाँ ई बनके शेर हुन लोकां नूं लाभ दस दे।।फड़ के गुरु आदि प्रगाश दी तेग हथ विच,कहे दास तूं करके हिसाब दस दे ।।
।।बैं त ।।
पिआ अंधेर आदि नसल तांईं पिछले बुझ गए बलदे गैस लिटरेचर ।।आए भन्ने इतिहास गैर गैरां चक्के गए हुनर दे लिटरेचर ।।होइ गुरां दी मेहर मुड़ फिर बणिया गुरु आदि प्रगाश है गैस लिटरेचर ।।जाऊ चुकिया मुल्कों अंधेर सारा जगाऊ आदि प्रगाश गैस लिटरेचर।।
।।बैं त ।।
जांदे होरनां दे कुएं भरण पाणी, किते आपणा सुगड़ा भी ला बैठो ।।करो सरोबर सोहणे इस्नान जाके माड़ी छप्पड़ी आपणी भी बना बैठो ।।शीश मन्दिर पूजदे दूजे दे जा, कोई घर दी झूँगी भी बना बैठो ।।आदि धर्मियो समझ सोच बैठो बिना आपणे कंम ना आ बैठो ।।
।।बैंत।।
गल होरनाँ कौम दी इह बहुत चंगी खिमा बन्दगी धर्म दे करन वाली ।।जुआ खेलदे ना जीव मारदे ना हकां परायां नूं हरन वाली।। दर वेशवा ना देखन जानदे, अते चोरियां भी ना करन वाली।।बिना ईष्ट तों खाली नजर आवे गल होरनी दे खूब हैं तरण वाली ।।
।।बैंत ।।
जेकर कौम दी उन्नति करनी, चाहो गुरु आदि प्रगाश नूं पढ़ो भाई ।।रखो धार्मिक कमान अगाड़ी फिर हकां हकूकां नूं लड़ो भाई।।भव तरने नूं बणिया जहाज भारी उतारना पार इस ते चढ़ो भाई।।आदि प्रगाश जहाज जे छड दिता ढुंहगे पानियाँ दे विच हड़ो भाई ।।
जय गुरुदेव जी ।।
राम सिंह शुकला ।
अध्यक्ष,
विश्व आदिधर्म मंडल।।
Comments
Post a Comment