36 ।। कौम दा इतिहास।।

            ।।भगवानदास सारँगवाल।।
।।दोहे।।
याद करूँ जगदीश को जी सबका प्रितपाल।
आदि पंथ चों मैँ इक कीटी दो कर जोड़ सुआल।
सुणो सभा साजणो सानूं इक बीमारी।
आदि नसल विच रम गई मैं खोल सुनामा।।
।।भजन जिला।।
बिन इतिहासों पंथ दी शान ते ईमान नहीं।सुआर्थ ते परमार्थ दी हथ बिच कोई कमान नहीं।धार्मिक शास्त्र खा गए मूलों ई पंथ गुआ गए।तृण आतिश ला गए बचदी साडी जान नूं।

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