।।गुरु रविदास जी का "विश्व ग्रँथ पोथीसाहिब"।।

गुरु रविदास जी महाराज ने, भूमण्डलीय सरकार, भूमंडलीय धर्म (विश्वधर्म), भूमंडलीय धर्मग्रँथ, और विश्वभाषा, की गवेषणा ही नहीं की थी, अपितु इस योजना पर कड़ा परिश्रम भी किया था। संसार में, ऐसा कोई भी विचारक नहीं हुआ, जिसने सभी देशों का भूमंडलीकरण करके, वैश्विक सरकार बनाने केलिये, विशाल भूमण्डल को ही, बेगमपुरा बनाने की दिशा में कार्य किया हो, केवल गुरु रविदास जी ही एक ऐसे सन्त महापुरुष हुए, जिन्होंने संकीर्ण दिवारों को तोड़कर, रास्ते में आई रुकाबटों, मुशीबतों को ठोकर मारते हुए, मस्त हाथी की चाल चलते हुए, अपने ही लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, जीवन का अथाह सफर तय किया हो। आदिपुरुष ने, शान्ति के अवतार के रूप में, गुरु रविदास जी को, भारत में भेजा था, जिसका लाभ भारत के ब्राह्मणों ने ना लिया औऱ ना ही दूसरों को लेने दिया। खुद भी उनके प्राणों के प्यासे रहे और राजाओँ, महाराजाओं और बादशाहों को भी, उनके पीछे तलबारें लेकर दौड़ाए रखा, मगर वे थे ही दिव्य पुरूष, जिसके कारण, सभी मुंह की खाकर धरती पर धड़ाम से गिरते रहे और समाज में जलील भी होते रहे। जो लोग शान्ति से नहीं समझे, उन्हें रास्ते पर लाने केलिये, अब आदिपुरुष कल्कि अवतार को भेजकर, उन के खण्डे से नरसंहार भी करवाएंगे, क्योकि गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ के रचयिता, स्वामी ईशरदास जी महाराज ने, गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ में लिखा है कि:-----
नेह कलंक अवतार आवेगा,
संभलपुर मुरादाबाद कहावेगा।।
वैष्णव कन्या हन्या,भाद्रों, तेरह तारीख।
वीरवार आकलेखा नक्षत्र व्यतिपाद योग,
कृष्ण पक्ष, इस महूर्त कलगीधर भव आत।।
आदिपुरुष ने ही, स्वामी ईशरदास जी महाराज को, सन उन्नीस सौ में, गुरु रविदास जी के जलाए गए क्रांतिकारी साहित्य को, पुनः लिखने की शक्ति देकर, गाँव सोहलपुर, जालन्धर के समीप अवतरित किया था। स्कूल का मुंह देखे बिना ही, चौदह सौ पृष्ठों के ग्रँथ में, सात सौ उच्च कोटि के महापुरुषों, सन्तों, भगतों, गुरूओं और अवतारों के नाम पर वाणी लिखकर, जो अद्वितीय चमत्कार किया है, वह पढ़ते और देखते ही बनता है। गुरु रविदास जी का, जो साहित्य ब्राह्मणों द्वारा अग्नि को भेंट किया गया था, वह पुनः स्वामी ईशरदास जी से लिखवाकर, पुनर्जीवित किया है, जिस को जलाने की, किसी की हिम्मत नहीं हुई, जिन्होंने छलकपट करने का प्रयास किया था, उन्हें ऐसे कठोर दण्ड, स्वामीजी के जीते जी, उनके सामने ही मिले थे, जिन्हें सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, उन्होंने ही 1960 ईस्वी में गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ में लिखा था, कि:----
आए गा बीस सौ बीसा।
ना रहेगा ईसा ना रहेगा मूसा।।
ये स्वामी ईशरदास जी की भविष्यवाणी, आज साठ साल के अति कम अंतराल में ही सत्य सिद्ध हो चुकी है, आज बीस सौ बीस के जनवरी महीने से, चीन से शुरूआत होने वाली वैश्विक महामारी, कोरोना ने जो आतंक फैलाया हुआ है, उससे ईसाई और मुसलमानों के ऊपर कहर होता जा रहा है, आज सात मई 2020 ईस्वी तक लाखों लोग कोरोना के शिकार होकर, कॉल के मुंह की ओर देख रहे हैं, संसार के दो लाख लोग मौत का ग्रास बन चुके हैं, चीन में शवों को जलाने केलिये के लिए तो, कई दिनों तक इंतजार करना पड़ा, जिनके शवगृहों से अवशेष भी कई दिनों के बाद, संबधियों को हस्तांतरित होते हुए टीवी की स्क्रीन पर देखे गए। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप, इटली, जर्मनी, इंग्लैंड स्पेन के राष्ट्राध्यक्ष, काल के मुंह में जा रही, जनता को देखकर, विलख विलख कर रो रहे हैं। भारत में गुरु रविदास जी की कृपा से कोरोना महामारी ने उतना आतंक नहीं मचाया हुआ है, जितना कहर चीन और अन्य देशों में फैलाया हुआ है। स्वामी ईशरदास जी ने पुनः भविष्यवाणी करते हुए, गुरु आदिप्रकाश ग्रँथ के बारह माह में लिखा है:-----
लोंद लिव लाई प्रभु की भगतन को रछपाल।
दुष्ट जनांको संघार सी सन्त जनां पर दियाल
सँभर नरेश संघार के आन देश को संभाल।
काबुल कंधार बलख बुखारा कश्मीर किसतबाड़ नाल।
बगदाद खुरासन बीजापुरी गोलकुंडी दरबाड़ी।
तेलगी चीन मचीन माधो देश विदेश पक हाड़ी।
शरण पियो सो रख लीजो आकी होइयो सो पार।
नजराने लै लै कर आन मिलेंगे भूपति बेशुमार।
हां हां माधो चित आएंगे कलियुग खत्म कराई।
सतजुग दी लग लड़ी तब निहकलंक हुकम चलाई।
आन भूप सब सूबेदार होंणगे कलगीधर जी का राज।
गरीब अमीर इक सम होई सच का बरते काज।
खालसा नाम खालस कलगीधर जी का नाम।
अब बोह मौसम आ रहा मुल्क मुल्क संग्राम।
नेहकलंक कलगीधर जी आ रहे डंका बजाई।
गऊ गरीब की पालन करनगे जात पात उड़ाई।
मंदिर मसीत गोर तीर्थ वेद पुराण सिमरती जोई।
कुरान कतेब ना रेहसियां इक़ आदिप्रकाश ग्रँथ चलोई।
पच्छमो दखण जावसी चढ़दी तरफ पुन आवन।
होशियारपुर नजदीक जो नंदगढ़ चो डेरे लावन।
सतगुर रामदास हरिमंदिर पुनरप हरि जी आण।
भणि रविदास उत्साह करे गरीब जनत कल्याण।
स्वामी ईशरदास जी महाराज ने, ये भविष्यवाणी, होशियारपुर के नजदीक, गाँव आनंदगढ़ में, अपने आश्रम में की थी, जिसे सुनकर दुष्टों ने, होशयारपुर थाने में पर्चा दाखिल करके स्वामी जी को जेल में बन्द करबाया था, मगर जब उनके अनन्य सेवक भगवान दास जी महाराज को, इस घटना का पता चला तो वह, तुरन्त दौड़े दौड़े थाने आ गए और थानेदार को अनुचित ढंग से परेशान करने पर फटकार लगाते हुए, तुरन्त स्वामी जी को कुर्सी पर बैठाने केलिये कहा, थानेदार ने ज्यों ही स्वामी जी को कुर्सी पर बैठाया, त्यों ही थानेदार स्वामी जी का विराट स्वरुप देखकर मूर्छित हो गया था, जिसे बाद में स्वामी जी ने ही, पानी के छींटे फेंक कर होश में लाया था।
स्वामी ईशरदास जी की वाणी और गुरु रविदास जी महाराज की भविष्यवाणी के अनुसार, यही सिद्ध होता जा रहा है कि, जिस विश्वग्रँथ को गुरु रविदास जी ने "पोथीसाहिब" के रूप में तैयार किया था और जिसको ब्राहमणों ने जलाकर राख कर दिया था, वही पुनः स्वामी ईशरदास जी से लिखवाया था। गुरु रविदास जी के अनुसार, भविष्य में केवल यही पावन विश्वग्रँथ, "गुरु आदिप्रकाश" ही चलेगा औऱ भारत में ही विश्वधर्म का मुख्यालय होगा। मुझे इस पवित्र ग्रन्थ को पंजाबी से हिंदी में अनुवाद करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था और इसका पहला संस्करण दो हजार दस में, अक्षय भारद्वाज और अशोक भारद्वाज के सहयोग से निकाला था। बड़ी जल्दी ही, हम देश विदेश के कुछ सन्तों की वाणी इसी ग्रँथ में शामिल करके, राष्ट्रीय संगठन से पारित करवा कर दूसरा अंतरराष्ट्रीय संस्करण भी निकालेंगे, जिसके लिये हमारी पूरी योजना बन चुकी है।
।।सोहम।।जय गुरुदेव।।
रामसिंह शुक्ला।
अध्यक्ष।
विश्व आदिधर्म मंडल।
मई 7, 2020।

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