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भारतवर्ष की संविधान सभा के सदस्य।

।।भारतवर्ष की संविधान सभा के मैंबर।। स्वतंत्र भारत के लिए संविधान लिखने के लिए, एक संविधान सभा का चुनाव किया गया था, जिस के 389 सदस्य चुने गए थे। भारत के सभी प्रांतों के 292, भारतीय रियासतों में से 93 और चार सदस्य चीफ कमिश्नर के प्रांतों में से लिये गए थे। इस कमेटी की एक उस समिति प्रारूप कमेटी बनाई गई थी, जिस के अध्यक्ष डॉक्टर भीमराव अंबेडकर मनोनीत किये गए थे। इस प्रारूप सभा के निम्नलिखित सात सदस्य थे:--- 1 डॉक्टर भीमराव अंबेडकर। 2 अलादी कृषणा स्वामी अय्यर। 3 एन गोपाल स्वामी अय्यंगर। 4 के एम मुंशी। 5 मुहम्मद साउदुल्ला। 6 बी एल मित्र।  संविधान की प्रारूप कमेटी की केवल पहली बैठक में ही बी एल मित्र ही शामिल हुए थे, उस के बाद वे बैठक में नही आए, जिस के कारण उन की सदस्यता समाप्त हो गई थी। पांच दिसंबर 1947 को, उन की जगह एन माधव राव को मनोनीत किया गया था। 7 एन माधव राव। 8 डी पी खेतान। 9 टी टी कृष्णामचारी। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर प्रारूप सभा के अध्यक्ष :--डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को पहली ही बैठक में, प्रारूप कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। इस कमेटी में, अनुसूचित जाति के भी पन्द्रह सदस्य शामिल कि...

सन 1946 में पंजाब विधानसभा के आरक्षित विधायक।।

।।सन 1946 में पंजाब विधानसभा के आरक्षित विधायक।। दूसरे विश्व युद्ध के कारण सन 1942 में भारत में विधानसभा के चुनाव नहीं कराए गए थे, जिस के बाद ये चुनाव सन 1946 में करवाए गए थे। भारत में लोकतंत्र की स्थापना केवल अंग्रेज ही कर गए थे, जिस से भारत के मूलनिवासियों को वोट के अधिकार नसीब हो गए थे, अगर कहीं वे लोकतंत्र की स्थापना नहीं करते तो शायद भारत में वही पुरानी मनुस्मृति थोंप दी जाती और पुनः वही जातिवाद बना रहता, छुआछूत, ऊँच नीच कायम रहती। शायद आदपुरुष ने, ब्राह्मणवाद के खात्मे के लिए ही अंग्रेजों को भारत भेजा था, उन्होंने ही, अछूतों को गुलामी से मुक्त किया था, वही वोट का भी अधिकार दे गए थे, मोहनदास कर्म चन्द गांधी और जवाहर लाल नेहरू एंड कंपनी ने ऐड़ी छोटी का जोर लगा लिया था, ताकि भारत के मूलनिवासी लोगों को, वोट का अधिकार ना मिले, गांधी और उस के पिछलग्गू अछूत समाज के बिकाऊ दलालों ने भी साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल जी के आंदोलन का भी डट कर विरोध कर के, गांधी एंड कंपनी का ही साथ दिया था। आदधर्म मंडल के समानांतर ही अछूत सुधार मंडल जैसे फर्जी संगठन बना कर, पंजाब आदधर्म मंडल को धोखा दिया गया था...

सन 1946 की पंजाब विधानसभा के सदस्य।

।। सन1946 की पंजाब विधानसभा के सदस्य।। द्वितीय विश्व के कारण सन 1942 में अंग्रेज सरकार, विधानसभा चुनाव नहीं करवा सकी थी, जिस के कारण, चुनाव सन 1946 में करवाए गए थे। कांग्रेस को भी पूरे दस साल मिल गए थे, जिन में उन्होंने, साहिबे कलाम मंगू राम मुगोवाल के गद्दारों को पहचानने, खरीदने का भी लंबा समय मिल गया। इन्ही दस वर्षों में पंजाब आदधर्म मंडल को, कांग्रेस ने, खेरू खेरू कर के, बाबू जी के आदधर्म मंडल के आंदोलन को धराशायी कर दिया गया। स्वार्थी लालची खुद भी बदनाम हुए और वहुजन समाज की नैया को डुबो बैठे। आदधर्म मंडल के दलबलुओं ने  आदधर्म मंडल को छोड़ कर, कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे और निम्नलिखित लोग चुनाव में सफल हो गए थे। 1 श्री राम शर्मा, पूर्वी टाउन। कांग्रेस। 2 शानो देवी, दक्षिण पूर्व टाउन। कांग्रेस। 3 सेठ सुदर्शन, पूर्वी टाउन।कांग्रेस। 4 भीम सेन सच्चर, लाहौर शहर।कांग्रेस। 5 सन्त राम सेठ, अमृतसर शहरी।कांग्रेस। 6 किशन गोपाल दत्त, उतर पूर्व टाउन।कांग्रेस। 7 चमन लाल, उतर पश्चिम टाउन।कांग्रेस। 8 मुंशी हरि लाल, दक्षिण पश्चिम। कांग्रेस। सामान्य ग्रामीण।। 9 रणजीत सिंह चौधरी, हिसार दक्षि...

सन 1937 में पंजाब विधानसभा के मंत्री और मुख्यमंत्री।।

।।सन 1937 में पंजाब विधानसभा के मंत्री और  मुख्यमंत्री।। अंग्रेजी सरकार ने, 1932 में निर्णय कर लिया था कि, भारत में विधानसभा चुनाव करवा कर, लोकतंत्र की स्थापना कर के, भारत को आजाद कर देंगे। इसीलिए सन 1937 के चुनाब करवाए गए थे, उस के बाद, जब गुलाम भारत का पहला मंत्रिमंडल बना था, उस के निम्नलिखित मंत्री और मुख्यमंत्री बनाए गए थे :---- मुख्यमंत्री------सर सिकन्दर हयात खान। राजस्व मंत्री----सुंदर सिंह मजिठिया। विकास मंत्री----छोटू राम। वित्त मंत्री------- मनोहर लाल। पब्लिक कार्य मंत्री--खिजार हयात टिबाना। शिक्षा मंत्री------- अब्दुल हयात। पंजाब विधानसभा में, जीत कर आए अनुसूचित जाति आदधर्म मंडल के विधायक। चौधरी प्रेम सिंह ठेकेदार, हिदायतपुर छावनी।गुड़गांव। फकीर चन्द चौधरी, करनाल। लाला हरनाम दास अध्यापक चक नंबर 196- आर बी इस्लामावाद, जिला लायलपुर। सेठ किशन दास, गांव व डाकखाना खाम्बरा जालंधर। जुगल किशोर, गांव माजरी चमाराँ, डाकखाना जगाधरी, अंबाला। भगत हंस राज पलीडर, पूरन नगर सियालकोट शहर। सरदार गोपाल सिंह अमरीकन मर्चेंट, गाँव लील, डाकखाना पखोवाल लुधियाना। मूला सिंह, गाँव व डाकखाना बालाचौर, ...

गुरु रविदास जी और "ऐसी लाल तुझ बिन कौन करै"।।

।।गुरु रविदास जी और "ऐसी लाल तुझ बिन कौन करै"।। गुरु रविदास जी महाराज का जिस समय जन्म हुआ था, उसी समय उन्होंने अपनी दैवी शक्ति का जलवा ब्राह्मणों को दिखा दिया था, जन्म से अंधी दाई की आंखों में ज्योति डाल कर, उसे सुनयनीं बना दिया था, नवजात शिशु के, इस चमत्कार को देख कर दाई ने कहा था कि, कालू दास जी महाराज, ये बच्चा कोई रवि नूर धरती पर अवतरित हुआ है, ये कोई साधारण बालक नहीं है, ये चारों वर्णों का गुरु जरूर बनेगा, जो वास्तव में ही आज कल सत्य सिद्ध हो चुका है। जब चार वर्ष की आयु हुई थी तभी गुरु रविदास जी ने, अपना दहिना शंख बजा दिया था, जिस की ध्वनि सुन कर, ब्राह्मणों की कुलियों में आग के शोले बड़ी तीव्रता से धधक उठे थे, जिन के कारण सारे ब्राह्मण निकलती हुई मासूम कोंपल को कुचलने के लिए लामबंद हो गए थे। आठ साल की आयु में, गढ़ाघाट पर गुरु जी महाराज को ब्राह्मणों ने शास्त्रार्थ के लिए बुला लिया था, जिस में वे बुरी तरह से पराजित हो गए। उस समय कोई कानून नहीं था, कोई दलील, अपील नहीं चलती थी, कोई जज नहीं थे, वस था तो केवल एक ब्राह्मण मंत्री जो हमेशा ही राजा को उलटी ही सलाह देकर निराप्राधिय...

पंजाब विधानसभा सन 1937 के सदस्य।।

।।पंजाब विधानसभा सन 1937 के सदस्य।। सन 1936-1937 में गुलाम भारतवर्ष में पहले विधानसभा चुनाव चुनाव हुए थे, जिस में साहिबे कलाम मंगू राम जी ने, चुनाव लड़ कर आदधर्म का परचम सारे विश्व में, लहराया था। वे इसी चुनाव में अछूतों को आरक्षण लागू करवाने में भी सफल हो गए थे। भारतवर्ष का संविधान तो 1947 में बनना श्रु हुआ था और लागू 1950 में हुआ था, मगर ये महाउपलब्धि परमपूज्य साहिबे कलामें मंगू राम मुगोवाल जी, गुरु आदि परगास ग्रँथ के रचयिता स्वामी ईशरदास जी महाराज, बीडीओ हजारा सिंह पिपलांवाला पंजाब और स्वामी अच्छूतानंद जी महाराज कानपुर उतर प्रदेश के आंदोलनकारियों, प्रदर्शनकारियों की ही थी। पंजाब विधानसभा के 175 विधायकों के लिये चुनाव मार्च 1937 में हुए थे, जिन का विवरण निम्नलिखित है। 1 सर्व माननीय मेजर सरदार सर सिकन्दर हयात खान पश्चिम पंजाब। 2 सरदार बहादुर डॉक्टर सरदार सर सुंदर सिंह बटाला सिख ग्रामीण। 3 राव बहादुर चौधरी छोटू राम झझर सेंट्रल सामान्य ग्रामीण। 4 माननीय मिस्टर मनोहर लाल विश्वविद्यालय। 5 नबाबजादा मेजर मलिक खिजार हयात खान टिवाणा, खुशहाब मुहम्मदन ग्रामीण। 6 मियां अब्दुल हयात खान, दक्षिण पूर...

गुरु रविदास जी और "ऐसी लाल तुझ बिन कौन करै"।।

।।गुरु रविदास जी और "ऐसी लाल तुझ बिन कौन करै"।। गुरु रविदास जी महाराज का जिस समय जन्म हुआ था, उसी समय उन्होंने अपनी दैवी शक्ति का जलवा ब्राह्मणों को दिखा दिया था, जन्म से अंधी दाई की आंखों में ज्योति डाल कर, उसे सुनयनीं बना दिया था, नवजात शिशु के, इस चमत्कार को देख कर दाई ने कहा था कि, कालू दास जी महाराज, ये बच्चा कोई रवि नूर धरती पर अवतरित हुआ है, ये कोई साधारण बालक नहीं है, ये चारों वर्णों का गुरु जरूर बनेगा, जो वास्तव में ही आज कल सत्य सिद्ध हो चुका है। जब चार वर्ष की आयु हुई थी तभी गुरु रविदास जी ने, अपना दहिना शंख बजा दिया था, जिस की ध्वनि सुन कर, ब्राह्मणों की कुलियों में आग के शोले बड़ी तीव्रता से धधक उठे थे, जिन के कारण सारे ब्राह्मण निकलती हुई मासूम कोंपल को कुचलने के लिए लामबंद हो गए थे। आठ साल की आयु में, गढ़ाघाट पर गुरु जी महाराज को ब्राह्मणों ने शास्त्रार्थ के लिए बुला लिया था, जिस में वे बुरी तरह से पराजित हो गए। उस समय कोई कानून नहीं था, कोई दलील, अपील नहीं चलती थी, कोई जज नहीं थे, वस था तो केवल एक ब्राह्मण मंत्री जो हमेशा ही राजा को उलटी ही सलाह देकर निराप्राधिय...